Times Now Navbharat
live-tv
Premium

CBSE विवाद के बीच एक्शन में सरकार, लेकिन छात्रों को अभी राहत की दरकार, परेशान अभिभावक और छात्र अब क्या करें?

CBSE OSM Controversy: सीबीएसई से जुड़े हालिया विवाद के बाद देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं। सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कई प्रशासनिक कदम उठाए हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन छात्रों और परिवारों पर इस पूरे विवाद का सीधा असर पड़ा है, उन्हें आखिर राहत कब और कैसे मिलेगी?

Image
CBSE OSM Controversy: सीबीएसई ओएसएम विवाद
Authored by: Kuldeep Raghav
Updated Jun 3, 2026, 19:48 IST

CBSE OSM Controversy: सीबीएसई से जुड़े हालिया विवाद के बाद देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं। सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कई प्रशासनिक कदम उठाए हैं। कहीं अधिकारियों का तबादला किया जा रहा है, कहीं जांच समितियां बनाई जा रही हैं और कहीं पूरे मामले की समीक्षा चल रही है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को नया चेयरपर्सन मिल गया है। केंद्र सरकार की नियुक्ति समिति (Appointments Committee of the Cabinet-ACC) ने मंगलवार को जारी आदेश में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रशांत सिताराम लोखंडे को CBSE का नया चेयरपर्सन नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है, जबकि वरुण भारद्वाज को नया सचिव नियुक्त किया है। वहीं दूसरी ओर, उच्च स्तरीय एक-सदस्यीय जांच समिति भी गठित की गई है।

रिटायर्ड आईएएस अधिकारी एस. राधा चौहान (S. Radha Chauhan) की अध्यक्षता में यह समिति जांच करेगी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन छात्रों और परिवारों पर इस पूरे विवाद का सीधा असर पड़ा है, उन्हें आखिर राहत कब और कैसे मिलेगी? दरअसल, किसी भी परीक्षा विवाद में सबसे ज्यादा परेशानी छात्रों और उनके परिवारों को उठानी पड़ती है। कई महीनों की मेहनत, भविष्य की चिंता और मानसिक तनाव उन्हें लगातार परेशान करता है। ऐसे में केवल जांच बैठा देना या अधिकारियों पर कार्रवाई कर देना पर्याप्त नहीं माना जाता। छात्रों को यह जानना जरूरी है कि उनके भविष्य की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं और उन्हें स्वयं क्या करना चाहिए।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

Physics Head Quarters के संचालक और ट्यूटर अनुराग त्यागी का कहना है कि हर समस्या का समाधान संवाद, पारदर्शिता और सुधार से निकलता है, अराजकता से नहीं। मुझे चिंता उन बच्चों की है जिनके अंक कम आए, जिनका भविष्य दांव पर लगा है, जो re-evaluation के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस पूरे मामले में बिना देर किए बच्चों को ग्रेस मार्क्स देकर राहत देनी चाहिए। उनका कहना है कि छात्र किसी स्पेशल फेवर की मांग नहीं कर हे हैं। छात्र फ्री में नंबर नहीं मांग रहे हैं। 15 से 20 ग्रेस मार्क्स देकर इस व्यवस्था को सही किया जा सकता है।

तबादले से समस्या हल हो जाएगी?

20 वर्षों से IIT, NEET और बोर्ड परीक्षा के छात्रों को कोचिंग दे रहे अमित दीक्षित (M-tech, IIT-DELHI/GATE- AIR 1) का कहना है कि प्रशासनिक फेरबदल या समितियों के गठन से छात्रों की समस्याएं खुद-ब-खुद खत्म नहीं हो जाती हैं। प्रशासनिक स्तर पर तबादले या समितियों का गठन समस्याओं का तात्कालिक उपाय हो सकता है, स्थायी समाधान नहीं। अभिभावकों को केवल प्रशासनिक एक्शन पर खुश होने के बजाय बच्चों की शिक्षा पर नजर रखनी चाहिए। छात्रों को वास्तविक राहत तभी मिलेगी जब उनकी शिकायतों का ठोस निवारण होगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक मजबूत व्यवस्था लागू की जाएगी।

अमित दीक्षित आगे कहते हैं, 'मुझे नहीं लगता कि इस गलती को अब समय रहते सही किया जा सकेगा क्यों कि अगर हम दोबारा से मूल्यांकन प्रक्रिया शुरू करें तो इसकी योजना और क्रियान्वयन और परिणाम की घोषणा के साथ 45 दिन का समय लगेगा। बेहतर होगा कि अब पेपर की पढ़ाई को बदला जाए और पेपर को कुछ हद तक वस्तुनिष्ठ प्रश्न ही पूछे जाएं। अगर आईआईटी वस्तुनिष्ठ पेपर से भारत के बच्चे का मूल्यांकन कर सकता है तो सीबीएसई को भी इस पर विचार करना चाहिए

पहली महत्वपूर्ण राहत

17-18 साल की उम्र के 12वीं के छात्र इस समय किस मेंटल Trauma से गुजर रहे हैं, यह आपको तब पता चलेगा जब आप उन छात्रों की जगह खुद को रखकर देखेंगे। अगर राहत की बात करें तो सबसे पहली और महत्वपूर्ण राहत यह हो सकती है कि किसी भी छात्र का शैक्षणिक नुकसान न होने दिया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रभावित छात्रों को निष्पक्ष अवसर और वैकल्पिक समाधान उपलब्ध कराना सरकार और बोर्ड की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि किसी परीक्षा, मूल्यांकन या प्रशासनिक प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है तो उसका भार छात्रों पर नहीं डाला जाना चाहिए।

दूसरी बड़ी राहत

दूसरी बड़ी राहत पारदर्शिता हो सकती है। छात्र और अभिभावक लगातार यह जानना चाहते हैं कि जांच कहां तक पहुंची है, क्या निष्कर्ष निकले हैं और आगे क्या कदम उठाए जाएंगे। स्पष्ट जानकारी मिलने से अफवाहों और भ्रम की स्थिति कम होती है।

तीसरी राहत की बात

तीसरी राहत मानसिक दबाव को कम करना है। कई छात्र परीक्षा या परिणाम से जुड़े विवादों के कारण तनाव में आ जाते हैं। ऐसे मामलों में बोर्ड और सरकार को समय पर सूचना देकर छात्रों की चिंता कम करने की जरूरत होती है।

अभिभावक और छात्र अभी क्या करें?

महाराजा अग्रसेन पब्लिक स्कूल, बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश) के प्रधानाचार्य नरेंद्र मित्तल बताते हैं, 'यदि छात्र किसी विवाद या प्रभावित प्रक्रिया का हिस्सा है तो उससे संबंधित सभी दस्तावेज, आवेदन, एडमिट कार्ड, परिणाम, ईमेल और नोटिस सुरक्षित रखें। भविष्य में किसी भी शिकायत या सत्यापन के दौरान ये दस्तावेज महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यदि किसी छात्र को लगता है कि उसके साथ अन्याय हुआ है या उसके रिकॉर्ड में कोई त्रुटि है तो वह निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तुरंत शिकायत दर्ज कराए। समय पर शिकायत करने से समाधान मिलने की संभावना बढ़ जाती है।'

छात्रों के लिए सलाह

लगातार तनाव और अनिश्चितता छात्रों के आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकती है। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों से नियमित बातचीत करें, उनकी चिंताओं को समझें और जरूरत पड़ने पर पेशेवर परामर्श भी लें। सोशल मीडिया पर कई प्रकार की अपुष्ट खबरें और अफवाहें फैलती रहती हैं। छात्रों और अभिभावकों को केवल CBSE, शिक्षा मंत्रालय या संबंधित आधिकारिक संस्थाओं की वेबसाइट और नोटिस पर ही भरोसा करना चाहिए। ऐसे विवादों के दौरान सबसे बड़ा नुकसान तब होता है जब छात्र पढ़ाई से ध्यान हटा लेते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जांच और प्रशासनिक प्रक्रिया अपने स्तर पर चलती रहेगी, लेकिन छात्रों को अपनी नियमित तैयारी जारी रखनी चाहिए।

आगे क्या देखने की जरूरत है?

फिलहाल सबसे जरूरी बात यह है कि छात्र घबराएं नहीं, आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा रखें और अपने शैक्षणिक लक्ष्य पर फोकस बनाए रखें। वहीं अभिभावकों को भावनात्मक प्रतिक्रिया देने के बजाय तथ्यों के आधार पर निर्णय लेने चाहिए। किसी भी विवाद का सबसे प्रभावी समाधान तभी संभव है जब छात्रों का भविष्य केंद्र में रखा जाए और हर निर्णय उसी को ध्यान में रखकर लिया जाए। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच समितियां क्या निष्कर्ष निकालती हैं और सरकार कौन-कौन से सुधारात्मक कदम उठाती है। यदि जांच पारदर्शी तरीके से पूरी होती है और प्रभावित छात्रों के हितों की रक्षा की जाती है, तो यह भविष्य में परीक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने का अवसर भी साबित हो सकता है।

End of Article