Women's Day: पिता और भाई के निधन से भी नहीं टूटा हौसला, साधना चौहान ने अफसर बनकर पूरा किया सपना

पिता चाहते थे कि बेटी उनसे बड़ी अफसर बने लेकिन यह सपना पूरा होने से पहले ही वह इस दुनिया को छोड़कर चले गए। पिता के बाद भाई को खोया लेकिन साधना चौहान ने हौसला नहीं खोया।

Sadhna Chauhan PCS officer Uttar Pradesh
Sadhna Chauhan PCS officer Uttar Pradesh 

Women's Day special Story Sadhna Chauhan: पिता चाहते थे कि बेटी उनसे बड़ी अफसर बने लेकिन यह सपना पूरा होने से पहले ही वह इस दुनिया को छोड़कर चले गए। पिता के बाद भाई को खोया लेकिन साधना चौहान ने हौसला नहीं खोया। यही मजबूत हौसला था जिसकी बदौलत उन्‍होंने अफसर बनकर पिता का सपना पूरा कर दिखाया। आज पिता जहां भी होंगे, उन्‍हें अपनी बेटी साधना पर फक्र हो रहा होगा।

मेहनत और दृढ़निश्चय के बल पर साधना चौहान ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की पीसीएस परीक्षा में सफर होकर एक अलग मिसाल पेश की। उन्‍होंने साबित कर दिया कि सीमित संसाधनों से भी सफलता पाई जा सकती है। महिला दिवस पर साधना की कहानी तमाम महिलाओं को प्रेरित करेगी। 

साधना इन दिनों जीएसटी विभाग (पूर्व में सेल्स टेक्स विभाग) में असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर तैनात हैं। वह गाजियाबाद के अतरौली गांव की रहने वाली हैं। साधना ने टाइम्‍स नाउ से विशेष बातचीत में बताया कि सन् 2002 में उन्‍होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की थी। उनके पापा ने दिल्ली के बाजीराव रवि कोचिंग संस्थान में दाखिला कराया था लेकिन 2004 में पिता का निधन हो गया। घर की जिम्मेदारी साधना के ही ऊपर आ गई थी। 

पिता के निधन के बाद हिम्‍मत नहीं हारी। पिता फूड इंस्पेक्टर थे और चाहते थे कि मैं उनसे बड़ी अफसर बने। पापा के जाने के बाद 2012 में भाई को खोया तो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। एक बार तो हिम्‍मत ने भी जवाब दे दिया। घर में मैं, मां और एक भाई थे। 

2006 और 2009 में इंटरव्यू तक पहुंची थी लेकिन चयन नहीं हुआ था। अब अगर हार जाती तो पापा का सपना मर जाता। मैं फ‍िर उठी और तैयारी में जुट गई। हजारों मुसीबते झेलने के बाद आखिरकार पीसीएस परीक्षा में कामयाबी हासिल हुई। हालांकि असल परीक्षा तो अब शुरू हुई थी। पूरे परिवार को संभालने की। मेरे भाई की दोनों बेटियों और भाभी को साथ लेकर मैं बरेली आ गई। चुंकि यहां असिस्‍टेंट कमिश्‍नर के रूप में मेरी पोस्टिंग हुई थी। आज मैं पीलीभीत में तैनात हूं और सभी लोग मेरे साथ रहते हैं। पिता और भाई के जाने का दुख तो ताउम्र रहेगा, फ‍िर भी मेरी कोशिश है कि घर वालों को हर खुशी दूं। 

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