Delhi-NCR में कब से खुल पाएंगे स्कूल? जानिए स्कूलों ने क्या की है तैयारी

एजुकेशन
भाषा
Updated Oct 06, 2020 | 20:13 IST

दिल्ली सरकार ने कोरोना के मद्देनजर 31 अक्टूबर तक बंद रखने का ऐलान किया है। सरकार ने राज्यों को 15 अक्टूबर तक चरणबद्ध तरीके से स्कूल खोलने की इजाजत दी है।

Delhi-NCR School
दिल्ली में कोरोना के मद्देनजर स्कूल 31 अक्टूबर तक बंद है।  |  तस्वीर साभार: BCCL

मुख्य बातें

  • 15 अक्टूबर से स्कूलों को फिर से खोले जाने की अनुमति
  • दिल्ली में कोरोना के मद्देनजर स्कूल 31 अक्टूबर तक बंद
  • सरकार ने 25 मार्च को देशव्यापी लॉकडाउन लगाये जाने का ऐलान किया था

नई दिल्ली:  दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में स्कूल सुरक्षित वातावरण में औपचारिक कक्षाओं को फिर से शुरू करने के संबंध में कोविड-19 दिशा-निर्देशों का पालन करने के लिए बुनियादी ढांचे में सुधार से लेकर पाठ्यक्रम को पूरा करने के वास्ते एक ‘प्रभावी’ समय सीमा तय करने समेत कई कदम उठा रहे हैं।करीब छह माह बाद स्कूलों में फिर से कक्षाएं संचालित होंगी। केन्द्र सरकार ने चरणबद्ध ढंग से 15 अक्टूबर से स्कूलों को फिर से खोले जाने की अनुमति दे दी है।

हालांकि दिल्ली सरकार ने कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर स्कूलों को बंद रखने की अवधि को 31 अक्टूबर तक बढ़ा दिया है।एनसीआर में कक्षा नौ से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए स्वैच्छिक आधार पर शैक्षणिक मार्गदर्शन लेने के लिए कुछ स्कूल फिर से खोल दिये गये हैं। एनसीआर में पूरी दिल्ली और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ जिले आते है।

25 मार्च को हुई थी  देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा

दिल्ली पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्य सगीता हजेला ने बताया कि स्कूलों को बंद रखे जाने की अवधि बार-बार बढ़ाये जाने का मुख्य प्रभाव छात्रों, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की मानसिकता में बदलाव के रूप में पड़ा है। हम सरकार के फैसले का पूरी तरह से समर्थन करेंगे, लेकिन इन नए दिशा-निर्देशों के बीच दृढ़ता की जरूरत है। केन्द्र ने 16 मार्च को स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों समेत सभी शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने की घोषणा की थी। सरकार ने 25 मार्च को देशव्यापी लॉकडाउन लगाये जाने की घोषणा की थी।

कोरोना की वजह से भय का माहौल

पेसिफिक वर्ल्ड स्कूल की प्रो-वाइस चेयरपर्सन निधि बंसल ने कहा कि छात्रों और शिक्षकों के लिए ये कठिन समय है कि क्योंकि वे कक्षा में जाने के आदी थे। उन्होंने कोविड-19 महामारी और इसके बाद लॉकडाउन का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ ही दिनों में, पूरा ढांचा ऑनलाइन लर्निंग मंचों पर स्थानांतरित हो गया। बंसल ने कहा कि हालांकि स्कूलों को फिर से खोलने की बातें हो रही है लेकिन कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है। अधिकारियों ने दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। हमने बुनियादी ढांचे में बदलाव किया है और हमने स्टॉफ को तैयार किया है लेकिन एक निश्चित समय सीमा में यह सब किये जाने की जरूरत है। यह केवल भ्रम का माहौल पैदा कर रहा है, जो पाठ्यक्रम और अकादमिक कैलेंडर योजना को प्रभावित कर रहा है।

ज्यादातर अभिभावक बच्चों को भेजने को तैयार नहीं

कई स्कूल प्रबंधनों ने कहा कि भले ही स्कूल फिर से खुल जाएं, माता-पिता अपने बच्चों को अभी तक भेजने के लिए तैयार नहीं हैं और इसलिए, वे वैकल्पिक योजना पर काम कर रहे हैं।मॉर्डन पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्य अलका कपूर ने कहा कि हमने जो सर्वे किया है , उसके अनुसार लगभग 98 प्रतिशत अभिभावक अपने बच्चों को अभी स्कूलों में भेजने के लिए तैयार नहीं हैं, उन्हें डर है कि वे कोविड-19 से संक्रमित हो जायेंगे।

उन्होंने कहा कि हालांकि हमने अपने स्कूल परिसर के अंदर छात्रों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाये है। हम अभिभावकों की चिंताओं को समझ सकते हैं। शिक्षा मंत्रालय ने स्कूलों को फिर से खोलने के लिए सोमवार को दिशानिर्देश जारी किये थे। इनमें परिसरों की पूरी तरह सफाई और उन्हें संक्रमणमुक्त करना, उपस्थिति की नीतियों में लचीलापन रखना, तीन सप्ताह तक मूल्यांकन नहीं करना और कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान घर से पढ़ाई से सुगमता से औपचारिक स्कूल प्रणाली तक बदलाव सुनिश्चित करना शामिल है। मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से उनकी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार स्वास्थ्य एवं सुरक्षा सावधानियों के आधार पर खुद की मानक परिचालन प्रक्रियाएं बनाने को कहा है।
 


 

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