महज पांचवी तक पढ़ी मोबिना ने पढ़ाया IAS अफसरों को, बदल दी कई महिलाओं की जिदंगी

एजुकेशन
आईएएनएस
Updated Nov 30, 2020 | 13:43 IST

क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि एक पांचवी तक पढ़ी महिला भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को पढ़ा सकती है? लेकिन यह सच है और इसे कर दिखाया है पांचवी तक पढ़ी मोबिना ने।

Mobina A women who Studied only up to class fifth but has taught IAS officers
महज पांचवी तक पढ़ी मोबिना ने पढ़ाया IAS अफसरों को 

मुख्य बातें

  • मोबीना ने गांव की गरीब और कमजोर महिलाओं की जिंदगी को किया रोशन
  • भारतीय प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षणरत अधिकारियों को मसूरी में साझा किए अपने अनुभव
  • मोबीना ने अधिकारियों को स्व सहायता समूह के बारे में विस्तार से बताया

भोपाल: नाम है मोबीना और उन्होंने पढ़ाई की है पांचवी तक, मगर उन्होंने देश की सबसे बड़ी सरकारी सेवा भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को पढ़ाया है। यह सुनने में अचरज भरा हो सकता है मगर हकीकत यही है क्योंकि उन्होंने गांव की गरीब और कमजोर महिलाओं की जिंदगी को रोशन करने का काम किया है। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के पंडोला गांव की रहने वाली है मोबिना। उनका परिवार मजदूरी करके चलता था मगर उन्होंने अपने परिवार के साथ अन्य लोगों के परिवार की जिंदगी में बदलाव लाने की मुहिम शुरू की और वर्ष 2005 में बिस्मिल्ला स्व सहायता समूह बनाया। इस स्व सहायता समूह के जरिए 10 महिलाओं को जोड़ा और उनके परिवारों की जिंदगी में बड़ा बदलाव ला दिया।

बदल गई महिलाओं की जिदंगी

मोबीना बताती हैं कि उन्होंने आपस में मिलकर पहले न्यूनतम राशि इकटठा की और एक दूसरे की सहायता शुरू की। बात आगे बढ़ी तो उन्हें सरकारी स्तर पर और बैंक से भी सहायता मिलने लगी, उसी का नतीजा है कि आज उनकी समूह की महिलाओं की जिंदगी बदल गई है, सभी अलग-अलग तरह के कारोबार कर रही हैं। मोबीना बताती हैं कि उनके पति मोहम्मद सलीम मजदूरी करते थे। आमदनी नहीं होने पर पहले बमुश्किल से एक फसल ले पाती थी। जब उनकी आमदनी बढ़ी तो उन्होंने सिंचाई के लिए पंप खरीदा और अब तो दो फसलें लेने लगी है। इसके साथ ही आय भी लगातार बढ़ती जा रही है। अब तो वे अन्य लोगों को भी काम देने लगी है।

किए कई अविष्कार

राष्ट्रीय आजीविका मिशन के जुगल सोनी बताते हैं कि मोबिना और उनके साथियों ने कई इनोवेशन किए हैं और उसकी चर्चा हर तरफ है। आर्थिक मामले में भी सक्षम हो रही है। यही कारण है कि मोबीना और उनकी साथी महिलाओं को भारतीय प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षणरत अधिकारियों को अपने प्रयास और अनुभव को साझा करने के लिए मसूरी बुलाया गया था।

इस तरह कर रही हैं मदद

मोबीना बताती है कि उन्हें मसूरी जाने से पहले उनके दिमाग में कई तरह के सवाल उठ रहे थे और सोच रही थी कि इन बड़े शहरों के लोगों को वह कैसे अपने अनुभव बताएंगी। उन्होंने आगे बताया कि इस प्रवास से उन्हें भी लाभ मिला। वहां जाकर देखा की बड़ी-बड़ी उम्र की लड़कियां भी पढ़ाई कर रही हैं और जब अपने गांव लौटे तो अपनी बेटियों को पढ़ाया। उनके स्व सहायता समूह की महिलाएं अपनी बेटियों को भी पढ़ा रही हैं।

मोबीना कहती हैं कि उन्होंने मसूरी में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे अधिकारियों को स्व सहायता समूह के गठन, उनके काम करने के तरीके और होने वाली आमदनी के बारे में विस्तार से बताया था। उनके इन अनुभवों को प्रशिक्षण प्राप्त करने वालों ने बड़े उत्साह के साथ जाना था।

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