Success Story: बेटी के जन्‍म के बाद ससुरालियों ने घर से निकाला, न्‍याय मांगते मांगते वृंदावन की बेटी बन गई जज

वृंदावन की अवनिका गौतम को बेटी के जन्‍म के बाद ससुरालियों ने घर से निकाला और वह न्‍याय के लिए अदालत जाते जाते झारखंड में स‍िविल जज बन गईं।

Avanika Gautam
Avanika Gautam 

Avanika Gautam Success Story: राह के पत्‍थर आपका रास्‍ता नहीं रोकते हैं, बल्कि उन पर चलकर आप मजबूत होते हैं। जिंदगी में जो लिखा है, वह तो होकर रहेगा लेकिन हर घटना आपको अनुभव के साथ सशक्‍त बनाती है। अवनिका गौतम, एक ऐसी ही शख्सियत हैं जिन्‍होंने मुसीबतों को अपनी ताकत बनाया।

वृंदावन की बेटी अवनिका गौतम इन दिनों झारखंड हाईकोर्ट में असिस्टेंट रजिस्ट्रार (ज्यूडिशियल) के पद पर कार्यरत हैं। हैं। झारखंड लोकसेवा आयोग की परीक्षा पीसीएस-जे पास कर उनका चयन सिविल जज जूनियर डिवीजन के पद पर हुआ था। 

अवनिका आज भले ही लोगों को न्‍याय दिलवाती हैं लेकिन एक वक्‍त उन्‍हें न्‍याय की दरकार थी। ये भी कहना गलत नहीं होगा कि न्‍याय मांगते मांगते वह न्‍यायाधीश बन गईं। अवनिका गौतम की शादी 2008 में जयपुर के एक परिवार में हुई थी। उस वक्‍त वह एमएससी में थीं। शादी के कुछ वक्‍त बाद ही ससुराल पक्ष ने दहेज की मांग शुरू कर दी। अवनिका यह सहती रहीं लेकिन जब वह एक बेटी की मां बनीं तो ससुराल ने उन्‍हें 2009 में घर से बाहर कर दिया। अपनी छोटी सी बेटी को लेकर वह मायके वृंदावन आ गईं और न्‍याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। 

सोच लिया था वकालत करनी है
न्‍याय मांगते मांगते और अदालत के चक्‍कर लगाते हुए अवनिका के मन में वकालत करने का विचार आया। 2012 में उन्‍होंने वकालत पूरी और मथुरा में प्रैक्टिस शुरू कर दी। बचपन से ही मेधावी रहीं अवनिका ने एक साल दिल्‍ली आकर पीसीएस जे की तैयारी की। जिसकी बदौलत 2014 में उनका चयन झारखंड पीसीएस जे के लिए हो गया। 

कोई लड़की न्‍याय को ना भटके
जज बनने के बाद अवनिका गौतम ने एक प्रण लिया था कि उनकी तरह कोई लड़की न्‍याय को ना भटके। उनकी कोशिश रहती है कि हर मजबूर को इंसाफ मिले। वो कहती हैं कि उनके द्वारा न्‍याय में भले ही देर हो, लेकिन अन्‍याय ना हो। 

 

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