केजरीवाल की संपत्ति में 2015 के बाद 1.3 करोड़ रुपए का हुआ इजाफा, 5 साल में पत्नी की बढ़ी 42 लाख, जानिए कैसे

दिल्ली
भाषा
Updated Jan 22, 2020 | 10:31 IST

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया। हलफनामे में बताया कि उनके पास कितनी संपत्ति है।

Arvind Kejriwal's assets, अरविंद केजरीवाल ने पर्चा भरा
अरविंद केजरीवाल ने पर्चा भरा  |  तस्वीर साभार: PTI

नई दिल्ली : दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पास 3.4 करोड़ रुपए की संपत्ति है और वर्ष 2015 से इसमें 1.3 करोड़ रुपए का इजाफा हुआ है। केजरीवाल ने मंगलवार को विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन में जो हलफनामा जमा किया उसके मुताबिक 2015 में उनकी कुल संपत्ति 2.1 करोड़ रुपए की थी। केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल के पास 2015 में नकदी और सावधि जमा (एफडी) 15 लाख रुपए की थी जो 2020 में बढ़कर 57 लाख रुपए हो गया। पार्टी के एक पदाधिकारी ने कहा कि स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लाभ (वीआरएस) के तौर पर सुनीता केजरीवाल को 32 लाख रुपए और एफडी मिले बाकी उनका बचत धन है।

मुख्यमंत्री के पास नकदी और एफडी 2015 में 2.26 लाख रुपए की थी जो 2020 में बढ़कर 9.65 लाख हो गई। उनकी पत्नी की अचल संपत्ति के मूल्यांकन में कोई बदलाव नहीं हुआ है जबकि केजरीवाल की अचल संपत्ति 92 लाख रुपए से बढ़कर 177 लाख रुपए हो गई। पार्टी के पदाधिकारियों ने बताया कि 2015 में केजरीवाल की जितनी अचल संपत्ति थी, उसके भाव में बढोतरी के कारण यह यह वृद्धि हुई है ।

उधर दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने उन आरोपों को मंगलवार को खारिज कर दिया जिसमें यह कहा जा रहा था कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नामांकन प्रक्रिया में कार्यालय ने जानबूझकर विलंब किया। कार्यालय ने कहा कि वे तय प्रक्रियाओं का पालन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अंतिम दिन ज्यादा उम्मीदवार नामांकन पत्र दाखिल करने आए जिससे रिटर्निंग अधिकारी को ज्यादा समय लगा।

आम आदमी पार्टी के कुछ नेताओं ने दावा किया था कि अधूरे कागजात के साथ आए 35 उम्मीदवारों ने कहा कि जब तक वे नामांकन नहीं भर लेते तब तक मुख्यमंत्री को नामांकन नहीं भरने देंगे। पार्टी नेताओं को इसमें साजिश दिखी। इस बयान पर दिल्ली चुनाव कार्यालय ने प्रतिक्रिया दी है।

बयान में बताया गया है कि इकाई को सोशल मीडिया के जरिए ऐसी जानकारी मिली कि उस पर मुख्यमंत्री के नामांकन पत्र दाखिले में जानबूझकर विलंब करने के आरोप लग रहे हैं। आरोपो में यह कहा जा रहा था कि रिटर्निंग अधिकारी एक उम्मीदवार के नामांकन पत्र को दाखिल करने में 30-35 मिनट का समय ले रहे हैं। बयान में कहा गया कि यह स्पष्ट किया जाता है कि यह जानकारी भ्रामक है और चुनाव कार्यालय की तरफ से जानबूझकर कोई विलंब नहीं किया गया।

दिल्ली सीईओ कार्यालय ने शाम को बयान जारी कर कहा कि मंगलवार को नामांकन के आखिरी दिन उम्मीदवारों की भारी भीड़ थी। शाम तीन बजे की अंतिम समय सीमा तक नई दिल्ली क्षेत्र के निर्वाचन अधिकारी के समक्ष 66 उम्मीदवार मौजूद थे। भारी भीड़ के कारण नामांकन प्रक्रिया में तीन बजे के बाद तक का समय लगा।

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