मंदिरों में अब बदला-बदला होगा दर्शन का तरीका, माथे पर नहीं लगेगा तिलक न छिड़का जाएगा गंगा जल

Worship Places to open on June 8: देशभर में सभी धार्मिक स्‍थल 8 जून से खुल रहे हैं, लेकिन इस बार हर जगह श्रद्धालुओं को बदले-बदले माहौल में अपने अराध्‍य की पूजा-अर्चना करनी होगी।

मंदिरों में अब बदला-बदला होगा दर्शन का तरीका, माथे पर नहीं लगेगा तिलक न छिड़का जाएगा गंगा जल
मंदिरों में अब बदला-बदला होगा दर्शन का तरीका, माथे पर नहीं लगेगा तिलक न छिड़का जाएगा गंगा जल  |  तस्वीर साभार: ANI

मुख्य बातें

  • देशभर में सभी धार्मिक स्‍थलों को 8 जून से खोलने की घोषणा की गई है
  • लॉकडाउन के बीच देशभर में धार्मिक स्‍थल करीब दो महीने तक बंद रहे
  • धार्मिक स्‍थलों को खोलने से पहले तमाम जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं

नई दिल्‍ली : देशभर में सभी धार्मिक स्‍थल 8 जून से खुल जाएंगे, जिसके लिए तैयारियां जोरशोर से जारी हैं। लॉकडाउन के कारण देशभर में धार्मिक स्‍थल 2 महीने से भी अधिक समय तक बंद रहे, जिसे अब अनलॉक-1 के तहत खोलने का फैसला लिया गया है। हालांकि इस दौरान मंदिरों, मस्जिदों, गुरुद्वारों, गिरजाघरों में सोशल डिस्‍टेंसिंग सहित संक्रमण की रोकथाम को लेकर अन्य नियमों का भी पालन किए जाने की बात कही है।

मंदिरों में नहीं बजा पाएंगे घंटी

राष्‍ट्रीय राजधानी दिल्‍ली में भी धार्मिक स्‍थलों को खोलने की तैयारी जोरशोर से जारी है। इस बीच मंदिरों में खास इंतजाम किए जा रहे हैं। लगभग सभी जगह यह साफ कर दिया गया है कि कोरोना संक्रमण के इस दौर में मंदिरों में दर्शन का तरीका पहले जैसा नहीं रहेगा। इसमें कई बदलाव किए गए हैं, जिसमें एक यह भी है कि भक्‍तगण मंदिर में अब घंटियां नहीं बजा पाएंगे और न ही प्रसाद या पूजा की अन्‍य सामग्री लेकर जा सकें।

नहीं लगेगा माथे पर तिलक

इतना ही नहीं, मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं के ऊपर अब गंगाजल भी नहीं छिड़का जाएगा और न ही माथे पर तिलक लगाए जाएंगे, जबकि आम दिनों में मंदिरों में ऐसा अमूमन होता रहा है। दिल्‍ली में झंडेवालान मंदिर के ट्रस्‍टी रवींद्र गोयल के मुताबिक, मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को सोशल डिस्‍टेंसिंग के नियमों का पालन करना होगा। श्रद्धालु दो पंक्तियों में मंदिर के भीतर प्रवेश करेंगे और दो अगल निकास द्वार से बाहर निकलेंगे।

श्रद्धालुओं की होगी थर्मल स्‍क्रीनिंग

उन्‍होंने यह भी बताया कि मंदिरों में श्रद्धालु घंटियां न बजा सकें, इसके लिए इन्‍हें ढक दिया गया है। उन्‍हें प्रसाद/माला आदि लाने की अनुमति नहीं होगी। मंदिर में उनके प्रवेश पर न तो गंगा जल छिड़का जाएगा और न ही माथे पर तिलक लगाए जाएंगे। उन्‍होंने यह भी बताया कि मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की दो अलग-अलग जगह थर्मल स्‍क्रीनिंग की जाएगी और जिनके शरीर का तापमान अधिक होगा, उन्‍हें भीतर नहीं जाने दिया जाएगा।

निकास पर मिलेगा प्रसाद

मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को आम तौर पर प्रसाद का इंतजार रहता है। इस बारे में उन्‍होंने बताया कि भले ही मंदिर में भगवान के दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालु अपने साथ पूजा सामग्री, फूल-मालाएं और अन्‍य सामान न ला पाएं, लेकिन निकास द्वारा पर उन्‍हें प्रसाद का पाउच दिया जाएगा, जिसमें मिश्री के दाने होंगे। बहरहाल, श्रद्धालुओं को दो दिनों बाद देशभर में तमाम धार्मिक स्‍थल खुलने का इंतजार है।

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