Happy Birthday Master Blaster: सचिन तेंदुलकर ने फूंका था वो मंत्र, जिससे अनिल कुंबले ले सके थे 10 विकेट

Sachin Tendulkar birthday special: सचिन तेंदुलकर अपने खेलने वाले दिनों में काफी अंधविश्‍वासी हुआ करते थे। अनिल कुंबले ने जब ऐतिहासिक 10 विकेट लिए थे, तब तेंदुलकर का एक टोटका काफी फायदेमंद साबित हुआ।

anil kumble 10 wickets against pakistan
अनिल कुंबले के पाकिस्‍तान के खिलाफ ऐतिहासिक 10 विकेट 

मुख्य बातें

  • अनिल कुंबले के ऐतिहासिक 10 विकेट लेने में सचिन तेंदुलकर ने दिया था योगदान
  • सचिन तेंदुलकर के इस टोटके पर पहले किसी का ध्‍यान नहीं गया था
  • भारत ने दिल्‍ली टेस्‍ट में पाकिस्‍तान को मात देकर सीरीज में वापसी की थी

नई दिल्‍ली: सचिन तेंदुलकर ऐसी शख्सियत हैं, जिन्‍हें किसी पहचान की जरुरत नहीं है। तेंदुलकर को देश में 'क्रिकेट के भगवान' का दर्जा प्राप्‍त है। महान बल्‍लेबाज शुक्रवार को अपना 47वां जन्‍मदिन मना रहे हैं। मास्‍टर ब्‍लास्‍टर ने 22 यार्ड पर 24 साल एकछत्र राज किया और दुनिया को अपना मुरीद बनाया। विश्‍व क्रिकेट में भारत को पहचान दिलाने का श्रेय भी सचिन तेंदुलकर को ही हासिल है। क्रिकेट फैन शायद ही तेंदुलकर की कोई पारी भूले हो क्‍योंकि वह जब भी मैदान पर उतरते थे, तो उम्‍मीदों का भार अपने कंधों पर लेकर आते थे। फिर गेंद पर इस तरह प्रहार करते थे मानो एक कलाकार कोई ऐसी चीज रचने जा रहा है, जिसकी किसी ने कल्‍पना भी नहीं की हो।

सचिन तेंदुलकर बेशक बुद्धिमान क्रिकेटर रहे, लेकिन अपने खेलने वाले दिनों में वह काफी अंधविश्‍वासी भी थे। सचिन तेंदुलकर के अंधविश्‍वास के कई किस्‍से हैं, लेकिन ये एक ऐसा किस्‍सा है, जो टीम के लिए तो फायदेमंद साबित हुआ ही, साथ ही साथ क्रिकेट में ऐतिहासिक पल भी बना। आपको 1999 में अनिल कुंबले के एक पारी में 10 विकेट लेने वाला मुकाबला तो याद ही होगा! इस मैच में सचिन तेंदुलकर ने एक टोटका अपनाया, जिस पर पहले तो किसी का ध्‍यान नहीं गया, लेकिन फिर इसने काफी सुर्खियां बटोरी।

चलिए आज सचिन तेंदुलकर के जन्‍मदिन के मौके पर हम आपको ये मजेदार किस्‍सा बताते हैं

साल 1999 की बात है। दिल्‍ली में गजब की ठंड पड़ रही थी। दिल्‍ली के फिरोजशाह कोटला में भारत और पाकिस्‍तान के बीच तीन मैचों की टेस्‍ट सीरीज का दूसरा टेस्‍ट खेला जा रहा था। टीम इंडिया को चेन्‍नई में खेले पहले टेस्‍ट में शिकस्‍त झेलनी पड़ी थी। मेजबान टीम के पास वापसी के लिए यही सही मौका था ताकि सीरीज जीतने की उम्‍मीदें बरकरार रहे। बता दें कि पाकिस्‍तान की टीम 9 साल के अंतरराल के बाद भारत दौरे पर आई थी।

सचिन का बल्‍ला रहा खामोश

भारतीय कप्‍तान मोहम्‍मद अजहरूद्दीन ने टॉस जीतकर पहले बल्‍लेबाजी का फैसला किया। भारत की पहली पारी 252 रन पर सिमटी। सचिन तेंदुलकर महज 6 रन बनाकर स‍कलैन मुश्‍ताक की गेंद पर एलबीडब्‍ल्‍यू आउट हो गए। जवाब में पाकिस्‍तान की पहली पारी 172 रन पर ही ढेर हो गई। पहली पारी के आधार पर मेजबान टीम को 80 रन की बढ़त मिली। इसके बाद भारत की दूसरी पारी 339 रन पर सिमटी और इस तरह पाकिस्‍तान को जीत के लिए 420 रन का लक्ष्‍य मिला। दूसरी पारी में सचिन 29 रन बनाकर मुश्‍ताक अहमद की गेंद पर वसीम अकरम को कैच थमाकर पवेलियन लौटे।

फिर अपनाया वो टोटका

420 रन के लक्ष्‍य का पीछा करने उतरी पाकिस्‍तान ने दमदार शुरुआत की। सईद अनवर (69) और शाहिद अफरीदी (41) ने 101 रन की ओपनिंग साझेदारी की। 24 ओवर हो गए थे और भारत को कोई विकेट नहीं मिला था। तब मोहम्‍मद अजहरूद्दीन ने गेंद अनिल कुंबले को थमाई। सचिन तेंदुलकर ने परंपरा के मुताबिक गेंदबाज से उसका स्‍वेटर और टोपी ली व अंपायर को सौंप दी। ऐसा इसलिए ताकि गेंदबाज सीधे अपने रनअप पर जाए और गेंदबाजी पर ध्‍यान लगाए। 25वें ओवर में कुंबले ने शाहिद अफरीदी और एजाज अहमद को आउट कर दिया।

सचिन तेंदुलकर का अंधविश्‍वास जागा कि उनके स्‍वेटर और टोपी लेने से कुंबले को विकेट मिला। सचिन तेंदुलकर ने उस पल इसे ही अपनी सफलता का मंत्र बनाया और कुंबले के ओवर के दौरान उनका स्‍वेटर व टोपी लेकर अंपायर को सौंपने का काम किया। इसका जोरदार असर देखने को मिला और फिरोजशाह कोटला स्‍टेडियम पर इतिहास रचा गया। अनिल कुंबले ने एक पारी में सभी 10 विकेट लिए। पाकिस्‍तान की दूसरी पारी 60.3 ओवर में 204 रन पर ऑलआउट हुई। भारत ने यह मैच 212 रन के विशाल अंतर से जीता। सचिन तेंदुकलर का अंधविश्‍वास न सिर्फ टीम के काम आया बल्कि अनिल कुंबले इस संयोग के सहारे इतिहास रचने में कामयाब हुए।

वैसे, सचिन तेंदुलकर के अंधविश्‍वास की कहानियां और भी हैं। मगर सबसे ज्‍यादा सुर्खियां इसी किस्‍से ने बटोरी हैं। सचिन तेंदुलकर के अंधविश्‍वास की बात चल रही है तो उन्‍होंने 2003 विश्‍व कप में नेट्स पर अभ्‍यास नहीं किया था। इसके अलावा ऑस्‍ट्रेलिया में सिडनी में जब दोहरा शतक जमाया था तो तेंदुलकर ने लगातार चार दिन तक एक ही डिश होटल की निश्चित टेबल पर बैठकर खाई। इसके अलावा 2011 विश्‍व कप का फाइनल तेंदुलकर ने नहीं देखा और न ही वीरेंद्र सहवाग को देखने दिया। उनके अंधविश्‍वास के और भी कई किस्‍से हैं।

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