रामचंद्र गुहा ने ठुकराए 40 लाख रुपए, बतौर सीओए सदस्य 5 महीने किया था काम

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Updated Oct 23, 2019 | 18:58 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

रामचंद्र गुहा ने बतौर सीओए सदस्य अपनी सेवाओं के लिए मानदेय लेने से मना कर दिया है। गुहा ने कहा कि उन्हें भुगतान की उम्मीद नहीं की थी और सीओए की पहली बैठक में ही इसे स्पष्ट कर दिया था।

Ramachandra Guha
रामचंद्र गुहा   |  तस्वीर साभार: Twitter

मुख्य बातें

  • रामचंद्र गुहा बीसीसीआई की सीओए समिति का हिस्सा रहे थे
  • गुहा ने बतौर सीओए सदस्य पांच महीने काम किया था
  • गुहा ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए समिति से इस्तीफा दिया था

नई दिल्ली: जाने माने इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने साल 2017 में बतौर सीओए सदस्य बीसीसीआई में दी अपनी सेवाओं के लिए 40 लाख रुपए मानदेय लेने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सीओए सदस्यों को बीसीसीआई में उनके तकरीबन तीन साल के कार्यकाल के एवज में दिए जाने वाले मानदेय को स्वीकृति दी थी। इसके अनुसार सभी सदस्यों को उनकी कार्य की अवधि के अनुरूप मानदेय दिया जाना सुनिश्चित किया गया था। कोर्ट ने बीसीसीआई को आदेश दिया था कि 48 घंटे के अंदर सभी सदस्यों को दी जाने वाली राशि का भुगतान कर दिया जाए। 

ऐसे में रामचंद्र गुहा ने साल 2017 सीओए के लिए बतौर सदस्य मिलने वाले मानदेय को लेने से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी स्थिति नियुक्ति के दौरान ही स्पष्ट कर दी थी। गुहा ने पीटीआई से कहा, 'मैंने पहली बैठक में ही कह दिया था कि मैं किसी भुगतान की उम्मीद नहीं कर रहा और ना ही भुगतान चाहता हूं।' उन्होंने कहा, 'मैंने सीओए की पहली बैठक में ही बता दिया था कि मैं इसके लिए कोई मुआवजा नहीं लूंगा। यह मेरी मौजूदा स्थिति नहीं है, मैंने इसे पहले ही स्पष्ट किया था... यह निजी चीज थी। इसका किसी अन्य चीज से कोई लेना देना नहीं है।'

रामचंद्र गुहा के अलावा सीओए के एक अन्य पूर्व सदस्य बैंकर विक्रम लिमये ने भी मानदेय लेने से मना कर दिया। लिमये को 50 लाख 50 हजार रुपए का भुगतान होना था। विनोद राय की अगुआई वाली प्रशासकों की समिति में शुरुआत में चार सदस्य थे जिन्हें सूप्रीम कोर्ट ने 30 जनवरी 2017 को नियुक्त किया था। इन सदस्यों को लोढ़ा समिति की अनुशंसाओं के लागू होने तक बीसीसीआई का संचालन की जिम्मेदारी दी गई थी। हालांकि, गुहा ने जुलाई 2017 में व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए समिति से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद लिमये ने भी अपना पद छोड़ दिया था।

गुहा ने इस्तीफा देने के बाद बीसीसीआई द्वारा अनिल कुंबले को कोच पद से हटाए जाने के मामले पर पत्र लिखकर सवाल उठाए थे। उनका मानना था कि कुंबले को कार्यकाल को बढ़ाया जाना चाहिए था। कुंबले ने चैंपियंस ट्रॉफी 2017 के फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय टीम की हार के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने बीसीसीआई में चलने वाले सुपर स्टार कल्चर की कड़ी आलोचना भी की थी।

 

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