बीसीसीआई ने 'हितों का टकराव' मामले में सीएसी सदस्यों को दी पेशी से छूट 

क्रिकेट
Updated Sep 30, 2019 | 07:00 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

बीसीसीआई ने एक बड़ा कदम उठाते हुए सीएसी के सदस्यों को हितों का टकराव मामले में एथिक्स ऑफिसर के सामने पेश होने से छूट दे दी है। सीओए रखेगी सीएसी का पक्ष।

CAC BCCI
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मुख्य बातें

  • सीओए एथिक्स अधिकारी के सामने रखना चाहती है सीएसी का पक्ष
  • बीसीसीआई ने कपिल देव सहित अन्य सदस्यों को पेशी से दी छूट
  • सीओए ने कहा उन्हें मामले में नहीं नजर आता है हितों का टकराव

नई दिल्ली: बीसीसीआई का मानना है कि कपिल देव की अध्यक्षता वाली क्रिकेट सलाहकार समिति( सीएसी) के सदस्यों को 'हितों का टकराव' मामले में एथिक्स ऑफिसर का नोटिस मिलने के बाद पेश होने की जरूरत नहीं है। शनिवार को मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के आजीवन सदस्य संजीव गुप्ता द्वारा कपिल देव, शांता रंगास्वामी और अंशुमान गायकवाड़ को बोर्ड के एथिक्स ऑफिसर डीके जैन ने नोटिस भेजकर 10 अक्टूबर तक जवाब देने को कहा था। 

टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासनिक समिति(सीओए) ने सीएसी के सदस्यों का प्रतिनिधित्व एथिक्स अधिकारी के सामने करने का प्रस्ताव दिया है। क्योंकि इस समिति ने ही नए हेड कोच के चुनाव के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। 

डीके जैन ने शनिवार को कपिल देव, शांता रंगास्वामी और अंशुमान गायकवाड़ को नोटिस भेजकर हितों का टकराव मामले में सफाई देने को कहा था। बीसीसीआई के अधिकारी ने कहा, सीओए ने तीनों सदस्यों से इस मामले में खुलासा करने को कहा था। इसके बात सभी ने इस बारे में खुलासा किया जिस पर विचार करने के बाद सीओए का मानना था कि तीनों पर हितों के टकराव का कोई मामला नहीं बनता है। सौरव गांगुली के मामले की तरह इसमें भी कोई बड़ा टकराव नहीं है। ऐसे में इस मामले को अब बीसीसीआई संभालेगा और सीएसी के सदस्यों को एथिक्स ऑफिसर के सामने पेश होने की आवश्यक्ता नहीं है।

इससे पहले रविवार को सीओए के अध्यक्ष विनोद राय ने भी साफ किया था कि उन्हें इस मामले में कोई हितों का टकराव नजर नहीं आता है। 

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