विश्व कप 2019 फाइनल के ओवरथ्रो विवाद पर आईसीसी ने किया कुमार धर्मसेना का बचाव 

क्रिकेट
Updated Jul 27, 2019 | 21:15 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

आईसीसी ने विश्व कप 2019 के फाइनल के दौरान उपजे ओवर थ्रो विवाद पर फील्ड अंपायर कुमार धर्मसेना का बचाव किया है।

kumar Sangakara
कुमार धर्मसेना   

मुख्य बातें

  • आईसीसी ने किया कुमार धर्मसेना का बचाव
  • कहा निर्णय के लिए सही प्रक्रिया का किया गया था पालन

दुबई: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने 14 जुलाई को लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए विश्व कप 2019 के फाइनल मुकाबले के दौरान उपजे ओवर थ्रो विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। आईसीसी ने मैच का यू टर्न माने जाने वाले मार्टिन गुप्टिल के ओवर थ्रो पर 6 रन दिए जाने के फील्ड अंपायर कुमार धर्मसेना का बचाव किया है। जीत के लिए 241 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरे मेजबान इंग्लैंड को जीत के लिए आखिरी ओवर में 15 रन बनाने थे। ऐसे में ओवर की चौथी गेंद पर मिड विकेट पर फील्डिंग कर रहे मार्टिन गुप्टिल ने  विकेटकीपर के छोर पर गेंद फेंकी लेकिन गेंद दो रन पूरा करने की कोशिश में डाइव लगाने वाले बेन स्टोक्स के बल्ले से लगकर थर्ड मैन बाउंड्री की ओर चार रन के लिए चली गई। इसके बाद फील्ड अंपायर कुमार धर्मसेना ने इंग्लैंड को इस गेंद पर 6 रन दे दिए जबकि नियमत: इस गेंद पर पांच रन दिए जाने थे क्योंकि जब गेंद फेंकी गई थी उस वक्त दोनों खिलाड़ियों ने एक दूसरे को पार नहीं कर सके थे। 

इसके बाद दोनों टीमें 50 ओवर में बराबर रन बना सकी और मुकाबला बराबर रहा। इसके बाद सुपर ओवर में भी दोनों टीमें 15-15 रन बना सकीं। इसके बाद मैच के दौरान ज्यादा बाउंड्री जडने वाली टीम को वितेजा घोषित किया गया। ऐसे में कीवी टीन के हाथ निराशा लगी और इंग्लैंड पहली बार वनडे क्रिकेट में विश्व चैंपियन बनने में सफल हुआ। 

फाइनल मुकाबले के एक सप्ताह बाद धर्मसेना ने एक इंटरव्यू में इस बारे में सफाई दी थी और कहा था कि उन्होंने यह निर्णय सभी मैच ऑफीशियल्स की सहमति से लिया था। मैदान पर रीप्ले देख पाना संभव नहीं था ऐसे में आलोचना करना आसान है। धर्मसेना ने निर्णय के दौरान हुई भूल को स्वीकार किया था लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उन्हें अपने निर्णय पर खेद नहीं है। 

अब दो सप्ताह बाद आईसीसी के जनरल मैनेजर(क्रिकेट) ज्यॉफ एलर्डिस ने कहा है कि इस निर्णय को लेते समय फील्ड अंपायर्स ने सही प्रक्रिया का पालन किया था। उन्होंने कहा, उस दिन अंतिम निर्णय फील्ड अंपायर्स को इस आधार पर लेना था कि जब थ्रो फेंका गया क्या तब दोनों बल्लेबाजों ने एक दूसरे को क्रॉस कर लिया था या नहीं। उस गेंद पर जो कुछ भी हुआ उसके बाद अंपायर्स ने कम्युनिकेशन सिस्टम पर इसके बारे में चर्चा करने के बाद 6 रन देने का निर्णय किया। उस निर्णय को लेते वक्त सही प्रक्रिया का पालन किया गया। 

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