जानिए क्या है क्रिकेट का विवादित डकवर्थ लुईस स्टर्न मैथड (DLS), जिसके एक जनक का हुआ देहांत

क्रिकेट की दुनिया के सबसे विवादित डकवर्थ लुईस मैथड के जनक में से एक टोनी लुईस को निधन हो गया। आइए जानते हैं कैसे काम करता है ये विवादित नियम।

Duckworth Lewis
Duckworth Lewis  |  तस्वीर साभार: Twitter

मुख्य बातें

  • तीन संसाधनों रन, ओवर और विकेट पर आधारित है पूरी गणना
  • दूसरी पारी में मौसम या बारिश की बाधा की वजह से इसके आधार पर होता है दूसरी टीम के लक्ष्य का निर्धारण
  • साल 2014 में डीएल मैथड से का नाम डीएलएस मैथड कर दिया गया

नई दिल्ली: क्रिकेट की दुनिया में अगर कोई अनसुरझी पहले है तो वो है डकवर्थ लुईस का नियम। जिसे समझ पाना क्रिकेट खिलाड़ियों को मुश्किल ही नहीं नामुमकिन सा नजर आता है। जेंटलमेंस गेम के रूप में पहचान रखने वाले क्रिकेट को विवादों के घेरे में खींचने का काम इस नियम ने बहुत किया है। बुधवार को इस विवादित नियम के एक जनक टोनी लुईस का निधन हो गया वो 78 वर्ष के थे। 

क्रिकेट के खेल में बारिश या मौसम के बाधा डालने के बाद खिलाड़ियों के खेल से ज्यादा अगर किसी चीज की चर्चा होती है तो वो है डकवर्थ लुईस नियम। ये वो नियम है जिसके आधार पर खिलाड़ियों का खेल गणित के फॉर्मूले और आंकड़ों के बीच उलझ जाता है।  जिसे समझना खिलाड़ियों के साथ-साथ प्रशंसकों के लिए मुश्किल है क्योंकि ये गणित के सूत्रों और साख्यिकी के आंकड़ों के आधार पर काम करता है। ये नियम ऐसा है कि एक बार एक क्रिकेट समीक्षक ने इसकी आलोचना करते हुए कहा था कि ये नियम दुनिया में केवल दो लोगों के समझ में आया है पहला डकवर्थ और दूसरा लुईस। ऐसे में अब डकवर्थ इसे समझने वाले अकेले इंसान रह गए हैं। उनके साथी टोनी ने उन्हें अलविदा कह दिया। 

डकवर्थ लुईस नियम आपस में क्रिकेट मैच के दौरान टीमों के विकेटों और रनों के तुलनात्मक अध्ययन पर आधारित है। यह नियम मैच की पहली पारी में टीम द्वारा बनाए रनों के आधार पर दूसरी टीम के लिए लक्ष्य के निर्धारण के लिए लागू होता है। इसी के आधार पर मैच का नतीजा तय होता है जैसा कि 1992 के विश्व कप के दौरान 1 गेंद में 21 रन बनाने का लक्ष्य द. अफ्रीका को सेमीफाइनल में मिला था। 

थ्री-डायमेंशनल है ये नियम
आसान भाषा में समझने की कोशिश करें कि ये नियम कैसे काम करता है। ये नियम तीन दिशाओं में एक साथ यानी थ्री डायमेंशनल रूप से काम करता है। जिसकी तीन दिशाएं रन, विकेट और ओवर होते हैं। तीनों के लिए पुराने मैच के आंकड़ों के आधार पर स्टैंडर्ड स्कोर तय किए गए हैं। इसका मतलब पहली टीम के द्वारा पहली पारी में बनाए रनों के आधार पर  X ओवर में  Y विकेट पर Z रन बनना चाहिए। 

डकवर्थ-लुईस नियम का सार है संसाधन यानी रिसोर्स। क्रिकेट मैच में दौरान किसी भी समय टीम के रन बनाने की क्षमता दो बातों पर निर्भर करती है कि पहला कितने ओवर या गेंद हैं और इसके साथ  कितने विकेट हैं। इन्हीं दो संसाधनों के आधार पर टीमें ज्यादा से ज्यादा रन बनाने की कोशिश करती हैं। ऐसे में दूसरी टीम के लिए लक्ष्य निर्धारित करके लिए सबसे जरूरी आंकड़ा है पहली टीम का अंतिम स्कोर। पहली टीम ने ये स्कोर कितने ओवर में कितने विकेट के नुकसान पर खड़ा किया है इसका भी महत्व होता है।

रिसोर्स पर आधारित है पूरी गणना 
उदाहरण के लिए यदि बारिश की वजह से 2 टीमों के पास केवल 90 प्रतिशत रिसोर्स बचे हों। उसमें से पहली टीम ने 100 प्रतिशत संसाधन (यानी 50 ओवर में 10 विकेट खोकर) का उपयोग करके 254 रन बनाए हैं। ऐसे में दूसरी टीम को जीत के लिए पहली टीम की तुलना में नब्बे प्रतिशत ओवरों में नब्बे प्रतिशत रन ही बनाने होंगे। यानी दूसरी टीम को 45 ओवर में 229 रन बनाने का लक्ष्य मिलेगा। 228 रन पर स्कोर बराबर होगा। विकेट तो दूसरी टीम के पास भी 10 ही होंगे ऐसे में शुरुआत में केवल रन और ओवर की ही बात होती है विकेट कॉन्सटेंट होते हैं।  लेकिन लक्ष्य का पीछा करते हुए विकेटों के गिरते ही लक्ष्य भी बदलता जाता है। ये डकवर्थ लुईस नियम के काम करने का बेसिक तरीका है लेकिन और अधिक करीबी गणना के लिए कंप्यूटरीकृत आंकड़ों और फॉर्मूलों का उपयोग किया जाता है। गणित के सामान्य फॉर्मूले से वो गणना नहीं की जा सकती क्योंकि डकवर्थ-लुईस ने अपनी रिसर्च के कई आंकड़ों को कभी सार्वजनिक नहीं किया और उनके पास इसका पेटेंट भी है। ऐसे में बगैर आधिकारिक सॉफ्टवेयर के ये गणना नहीं की जा सकती। 

2015 में बदलकर डीएल से डीएलएस हो गया नाम 
साल 2015 में डकवर्थ लुईस फॉर्मूला बदलकर डकवर्थ-लुईस-स्टर्न फॉर्मूला कर दिया गया। डकवर्थ और लुईस के की रिसर्च में क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर स्टीव स्टर्न के द्वारा किए गए शोध को भी शामिल कर लिया गया जिसमें टीमों के लिए शुरुआत में  लक्ष्य का पीछा करते हुए विकेट बचाकर रखने के साथ-साथ तेजी से रन बनाने को भी शामिल किया गया है। जो कि टी20 मैचों के शुरू होने के बाद अहम बो गया। इसके बाद इसे डीएल की जगह डीएलएस मैथड कहा जाने लगा।  

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