'हितों के टकराव' मामले में राहुल द्रविड़ को नोटिस मिलने के बाद भड़के अनिल कुंबले

क्रिकेट
Updated Aug 09, 2019 | 22:28 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

राहुल द्रविड़ को हितों के टकराव का नोटिस भेजे जाने के बाद टीम इंडिया के पूर्व कप्तान अनिल कुंबले ने इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी है।

Anil Kumble
अनिल कुंबले   |  तस्वीर साभार: Twitter

मुख्य बातें

  • कुंबले ने कहा हर खिलाड़ी के साथ है हितों के टकराव का मामला
  • जीवन के हर कदम पर हर किसी के साथ होता है हितों का टकराव
  • द्रविड़ एनसीए के अध्यक्ष होने के साथ हैं इंडिया सीमेंट्स में वाइस प्रेसिडेंट

पणजी: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ को बीसीसीआई के एथिक्स ऑफीसर द्वारा हितों के टकराव मामले का नोटिस थमाए जाने के बाद इस मामले पर बहस तेज हो गई है। एक के बाद एक पूर्व क्रिकेटर राहुल द्रविड़ के समर्थन में उतर आए हैं। ऐसें में टीम के पूर्व साथी रहे अनिल कुंबले में भी इस मामले में अपनी चुप्पी तोड़ी है। कुंबले ने कहा है कि सभी प्रोफेशन में हितों के टकराव होते हैं लेकिन असली मुद्दा यह है कि इनका सामना कैसे किया जाता है। 

कुंबले ने कहा, मुझे लगता है कि जीवन के हर कदम पर हितों के टकराव हैं। लेकिन सबसे अहम बात यह है कि आप इनसे कैसे पार पाते हैं। आप पहले से हितों के टकराव के सभी मामलों का खुलासा कैसे कर सकते हैं यह बेहद जटिल है। लेकिन एक बार जब ये बात सबके सामने आ जाती है कि आप इन कार्यों में भी शामिल हैं तो मुझे नहीं लगता कि वहां हितों के टकराव का कोई मामला बनता है।    

द्रविड़ को हाल ही में नेशलन क्रिकेट अकादमी(एनसीए) का मुखिया नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही वो आईपीएल टीम चेन्नई सुपर किंग्स का मलिकाना हक रखने वाली इंडिया सीमेंट्स समूह में वाइस प्रेसिडेंट भी हैं। ऐसे में उन्हें मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के सदस्य संजय गुप्ता ने राहुल द्रविड़ के खिलाफ हितों के टकराव की शिकायत दर्ज कराई थी। इसी शिकायत पर कार्यवाही करते हुए बीसीसीआई के एथिक्स ऑफीसर न्यायमूर्ति डीके जैन ने द्रविड़ को नोटिस भेजकर दो सप्ताह में जवाब देने को कहा है। 

टीम इंडिया के पूर्व कप्तान ने आगे कहा, यह बेहत दुर्भाग्यपूर्ण है कि सभी क्रिकेट खिलाड़ियों को हितों के टकराव से जूझना पड़ रहा है। आप इस बात से अच्छी तरह वाकिफ हैं कि उनमें से कुछ ही क्रिकेट के विकास में अपना योगदान दे सकते हैं उनमें से कुछ ने ही भारत का प्रतिनिधित्व किया है। अभी तक 300 खिलाड़ी ही देश का प्रतिनिधित्व करने में सफल हुए हैं। मेरे अनुमान में उनमें से तकरीबन पचास प्रतिशत आज जीवित हैं वही खेल को कुछ वापस दे सकते हैं। यदि आप चाहते हैं कि वो खेल को कुछ वापस न दें तो इसके लिए और कोई व्यक्ति ढूंढना पड़ेगा। 

इससे पहले संजय गुप्ता की ही शिकायत पर ही सचिन तेंदुलकर और वीवीएस लक्ष्मण को भी एथिक्स अधिकारी ने हितों के टकराव का नोटिस भेजा था। दोनों ही खिलाड़ी बीसीसीआई की क्रिकेट सलाहकार समिति के सदस्य थे और अपनी-अपनी टीमों के मेंटोर भी थे। 

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