निठारी कांड में सुरेंद्र कोली आज होगा रिहा
साल 2006 के निठारी हत्याकांड कौन भूल सकता है। यहां की डी-5 कोठी में क्या होता था, किसी को नहीं पता। इस कोठी का मालिक था व्यवसायी मोनिंदर सिंह पंढेर और इसी कोठी में नौकरी करता था सुरेंद्र कोली। एक दिन इस कोठी के पीछे नाले में अचानक कई नर-कंकाल दिखे। इसके बाद जांच शुरू हुई तो निठारी कांड परत-दर-परत खुलता गया। आरोप लगे कि मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली न सिर्फ निठारी से बच्चों का अपहरण कर उनके साथ दुष्कर्म करते थे, बल्कि उन्हें मारकर उनका मांस भी खाते थे। यहां तक कि अदालत ने भी इन दोनों को दोषी मानकर मौत की सजा सुनाई।
2006 के इस मामले में मंगलवार 11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सुरेंद्र कोली को बरी करने का आदेश सुनाया। बेंच ने कहा कि अगर किसी और मामले या कार्यवाही में आवश्यकता न हो तो सुरेंद्र कोली को तुरंत रिहा कर दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा था कि इस मामले में सजा ज्यादातर एक बयान और किचन चाकू की बरामदगी पर आधारित थी, जिससे सबूतों की पर्याप्तता पर प्रश्न उठते हैं। कोर्ट के इस आदेश के बाद आज यानी बुधवार 12 नवंबर 2025 को सुरेंद्र कोली जेल से बाहर आ जाएगा। चलिए जानते हैं निठारी कांड में अब तक क्या-क्या हुआ यहां देखें पूरी Timeline.
29 दिसंबर 2006: नोएडा के निठारी स्थित एक कोठी के पीछे नाले से आठ बच्चों के कंकाल मिलने से निठारी हत्याकांड के बारे में खुलासा हुआ। दो संदिग्धों, घर के मालिक और व्यापारी मोनिंदर सिंह पंढेर व उसके नौकर सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार कर लिया गया।
30 दिसंबर 2006: निठारी के डी-5 कोठी के पीछे नाले से और महिलाओं और बच्चों के कंकाल निकाले गए।
31 दिसंबर 2006: इतने बड़े हत्याकांड के बाद लगातार राजनीतिक दबाव बढ़ने लगा। इस बीच दो बीट कांस्टेबल को निलंबित कर दिया गया।
3 जनवरी 2007: राज्य सरकार ने गौतमबुद्ध नगर जिले के एसएसपी पीयूष मोर्डिया, नोएडा के तत्कालीन एडिशनल एसपी सौमित्र यादव और पूर्व सर्किल ऑफिसर सेवक राम यादव को निलंबित कर दिया। यही नहीं पहले से निलंबित किए गए 6 सब-इंस्पेक्टरों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
5 जनवरी 2007: मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली को यूपी पुलिस नार्को टेस्ट के लिए गांधीनगर ले गई।
10 जनवरी 2007: सीबीआई ने निठारी हत्याकांड की जांच अपने हाथ में ली।
11 जनवरी 2007: सीबीआई की पहली टीम निठारी हत्याकांड की जांच शुरू करने के लिए निठारी स्थित डी-5 बंगले पर पहुंची। यहां उन्हें पंढेर के घर के पास 30 और हड्डियां बरामद हुईं।
12 जनवरी 2007: सीबीआई ने मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली से पूछताछ की।
20 जनवरी 2007: राज्य सरकार ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) को निठारी हत्याकांड की रिपोर्ट सौंपी।
8 फरवरी 2007: विशेष सीबीआई अदालत ने मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली को 14 दिन की सीबीआई हिरासत में भेजा।
13 फरवरी 2009: सुरेंद्र कोली को विशेष सीबीआई अदालत ने 14 साल की लड़की रिम्पा हलधर, के साथ बलात्कार और हत्या के लिए दोषी मानते हुए मौत की सजा सुनाई।
10 सितंबर 2009: निचली अदालत ने भी मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली को मौत की सजा सुनाई। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोनिंदर सिंह पंढेर को हत्याकांड में बरी कर दिया, लेकिन नौकर सुरेंद्र कोली की मौत की सजा को बरकरार रखा।
7 जनवरी 2010: सुप्रीम कोर्ट ने निठारी हत्याकांड मामले में सुरेंद्र कोली की मौत की सजा पर रोक लगा दी।
20 जुलाई 2014: राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने निठारी कांड के दोषी सुरेंद्र कोली और पांच अन्य मृत्युदंड प्राप्त दोषियों की दया याचिकाएं खारिज कर दीं।
4 सितंबर 2014: सुरेंद्र कोली को फांसी के लिए गाजियाबाद की डासना जेल से मेरठ भेजा गया।
12 सितंबर 2014: अदालत ने रात लगभग 2 बजे सुरेंद्र कोली की फांसी पर 29 अक्टूबर 2014 तक रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट के सामने आधी रात के बाद एक याचिका आई, जिस पर रात 1.40 बजे आदेश पारित किया गया। सुरेंद्र कोली को 12 सितंबर 2014 को मेरठ जेल में फांसी दी जानी तय थी।
28 सितंबर 2014: सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली की फांसी पर पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश एच.एल. दत्तू की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मृत्युदंड की समीक्षा याचिका को खारिज किया और कहा कि निर्णय में कोई त्रुटि नहीं है।
28 जनवरी 2015: हत्या के मामले में सुरेंद्र कोली की फांसी की सजा को हाईकोर्ट ने उम्र कैद में बदल दिया।
8 दिसंबर 2015: हत्या के एक अन्य मामले में मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा सुनाई गई।
22 जुलाई 2017: सीबीआई अदालत ने मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके सुरेंद्र कोली को दोषी ठहराया और कहा कि सजा 24 जुलाई को सुनाई जाएगी।
24 जुलाई 2017: 20 वर्षीय पिंकी सरकार की हत्या और बलात्कार की कोशिश के मामले में सीबीआई अदालत ने मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली को दोषी माना। इन दोनों पर हत्या के कुल 16 मामलों में से आठवां था, जिसमें उन्हें सजा सुनाई गई थी।
6 अप्रैल 2019: सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा, कोठी का मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर बरी।
15 जनवरी 2021: सुरेंद्र कोली फिर से दोषी करार, लेकिन मोनिंदर सिंह पंढेर बरी हो गया।
16 अक्टूबर 2023: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली को दोषमुक्त किया।
11 नवंबर 2025: सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली को निठारी हत्याकांड के एक मामले में बरी कर दिया। कोर्ट ने कोली को रिहा करने का आदेश दिया।