मुम्बई BMC 'मेयर' पद चुनाव: अब BJP ने अपने नवनिर्वाचित पार्षदों को मुंबई के बाहर न जाने का दिया आदेश
BMC Election Result: शिवसेना के सभी 29 पार्षदों को मुम्बई के होटल में शिफ्ट करने के बाद अब बीजेपी ने अपने नवनिर्वाचित पार्षदों को अगले 10 मुंबई के बाहर न जाने का आदेश दिया है।
मुम्बई BMC 'मेयर' पद चुनाव पर मची है खींचतान (प्रतीकात्मक फोटो)
BMC Election Result: मुम्बई BMC चुनाव परिणाम आने के बाद शिवसेना और BJP में 'मेयर' पद चुनाव को लेकर खींचतान मची हुई है। शिवसेना के सभी 29 पार्षदों को मुम्बई के होटल में शिफ्ट करने के बाद अब बीजेपी ने अपने नवनिर्वाचित पार्षदों को अगले 10 मुंबई के बाहर न जाने का आदेश दिया है।
साथ ही अगर किसी आपात स्थिति की वजह से शहर के बाहर जाना जरूरी हो तो पहले इसकी सूचना पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को दी जाए। दरअसल, BMC के नए मेयर चुनाव में करीब 8-10 दिन लग सकते हैं।
बीजेपी के पास 89 और शिवसेना के पास 29 पार्षद है, 227 की BMC में मेयर पद के लिए 114 पार्षदों की जरुरत है। महायुति के पास बहुमत से सिर्फ 4 वोट ज्यादा यानी कुल 118 पार्षद है..इसलिए एहतियात बरतते हुए बीजेपी मेयर का चुनाव होने तक सभी पार्षदों को मुंबई में ही रखना चाहती है।
मेयर पद को लेकर सियासी हलचल तेज
बीएमसी चुनाव के बाद मुंबई में मेयर पद को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इसी बीच महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने अपने 29 पार्षदों को मुंबई के एक लग्जरी होटल में ठहराया है। शिवसेना का कहना है कि इन पार्षदों के लिए तीन दिन का वर्कशॉप आयोजित किया गया है, जिसमें एकनाथ शिंदे उन्हें बृहन्मुंबई महानगरपालिका के कामकाज की जानकारी देंगे। हालांकि सूत्रों की मानें तो नए कॉर्पोरेटर्स को होटल में बुलाने का उद्देश्य यह बताया जा रहा है कि किसी भी तरह की खरीद-फरोख्त या दबाव के जरिए पार्षदों को अपने गुट में लाने की कोशिश रोकी जा सके। शिंदे गुट यह सुनिश्चित करना चाह रहा है कि नए चुने गए पार्षद उनके पक्ष में रहें।
'ताज होटल को यरवदा और आर्थर रोड जेल बना दिया'
संजय राउत ने तंज कसते हुए कहा कि शिंदे गुट ने ताज होटल को यरवदा और आर्थर रोड जेल बना दिया है, जहां नए चुने गए पार्षदों को बंद कर दिया है। उन्होंने इसे पूरी तरह नाइंसाफी और अनुचित कार्रवाई बताया। राउत ने कहा कि यह लॉ एंड ऑर्डर का सवाल है। राज्य में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे की सरकार है, लेकिन इसके बावजूद नए चुने गए शिवसेना के पार्षदों के साथ गलत किया जा रहा है। उनका आरोप है कि शिवसेना को डर है कि उनके पार्षदों को तोड़ा जा सकता है।