करवा चौथ (फोटो-Istock)
दिल्ली : त्योहारों के मौसम की शुरुआत करवा चौथ से हो चुकी है। देशभर के बाजारों में रौनक है, मेहंदी और श्रृंगार के रंग बिखरे हैं। लेकिन इस बार का करवा चौथ सिर्फ पारंपरिक व्रत तक सीमित नहीं, बल्कि प्रेम, समानता और भारतीय बाजार की ताकत का प्रतीक बनता जा रहा है। पारंपरिक तौर पर विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। मगर अब बदलते दौर में कई पुरुष भी अपनी पत्नियों के सम्मान में व्रत रख रहे हैं। चांदनी चौक से सांसद और कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि करवा चौथ का आर्थिक असर बड़ा है।
देशभर में इस बार लगभग ₹25,000 करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान है। आभूषण, साड़ी, कॉस्मेटिक्स, मिठाई, गिफ्ट और पूजा सामग्री की बिक्री में जबरदस्त उछाल है। दिल्ली, मुंबई, जयपुर, सूरत और लखनऊ जैसे शहरों के बाजारों में शाम ढलते ही भीड़ उमड़ रही है।
इस बार ‘स्वदेशी करवा चौथ’ पर भी जोर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान के तहत कैट ने अपील की है कि पूजा की थाली, लोटा, छलनी और दीपक जैसी वस्तुएं भारत में बनी ही खरीदी जाएं। पहले जहां यह सामान चीन से आता था, अब बाजार में ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों की मांग बढ़ी है।
महिलाएं करवा चौथ से कई दिन पहले से ही तैयारियों में जुट जाती हैं। क्या पहनना है, कौन सी साड़ी या लहंगा चुनना है, और सबसे खूबसूरत दिखने की होड़ के बीच पूरा माहौल उत्सव में बदल जाता है। शाम को माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा के बाद चांद को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। करवा चौथ का बदलता स्वरूप बताता है कि यह सिर्फ आस्था नहीं, बराबरी और परस्पर सम्मान का पर्व बन चुका है। जहां चांद का दीदार अब रिश्तों की नई रोशनी लेकर आता है।
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