जबलपुर में RSS की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल बैठक (फोटो: RSS)
RSS Meeting 2025: एमपी के जबलपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक के बाद सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने संगठन की विचारधारा, मौजूदा सामाजिक चुनौतियों और देश की राजनीतिक परिस्थितियों पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि देश में नक्सलवाद की गतिविधियों में अब सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। उनके अनुसार, “कई नक्सली अब हिंसा का मार्ग छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं, जो एक उत्साहजनक संकेत है। आखिर वे भी हमारे समाज का ही हिस्सा हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि विकास कार्य हर क्षेत्र में समान रूप से होने चाहिए, लेकिन इसके साथ प्रशासन का व्यवहार भी मानवीय और संवेदनशील होना चाहिए।
सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “कई विश्वविद्यालयों में ड्रग्स का सेवन और उसकी बिक्री दोनों ही बढ़ रही हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर है।” होसबाले ने बताया कि इस मुद्दे पर बैठक में विशेष रूप से चर्चा की गई और देशभर में नशा-मुक्ति के लिए एक व्यापक अभियान चलाने पर विचार किया गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए होसबाले ने कहा, “ऐसा प्रयास पहले भी किया गया था। उन्हें अपने पिछले अनुभवों से सीख लेनी चाहिए। समाज ने संघ को स्वीकार किया है और न्यायपालिका ने भी इस विषय पर स्पष्ट राय दी है। बिना किसी ठोस कारण के प्रतिबंध की बात करना उचित नहीं है।”
देश में बढ़ते जातीय मतभेद और राजनीति में जाति के इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि यह स्थिति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा, “जो लोग सार्वजनिक रूप से कहते हैं कि वे जाति की राजनीति नहीं करेंगे, अक्सर वही इसमें सबसे अधिक लिप्त पाए जाते हैं। इस प्रवृत्ति को बदलने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। प्रश्न यह है कि पहल कौन करेगा और यह जिम्मेदारी संघ निभाएगा।” बिहार और पश्चिम बंगाल की परिस्थितियों पर बोलते हुए होसबाले ने कहा कि संघ हमेशा राष्ट्रहित को ध्यान में रखकर वोट करने की सोच रखता है। उन्होंने पश्चिम बंगाल की स्थिति को चिंताजनक बताते हुए कहा, “वहां का वातावरण तनावपूर्ण है, जिसका मुख्य कारण नेतृत्व और मुख्यमंत्री की नीतियां हैं। यह स्थिति देश के लिए उचित नहीं है। संघ इस स्थिति को सुधारने के प्रयास कर रहा है, लेकिन मीडिया को भी सच्चाई सामने लाने में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।”