उज्जैन में लैंड पूलिंग नीति रद्द
Ujjain Land Pooling Policy Cancellation: किसानों के आगे एक बार फिर सरकार को झुकना पड़ा है। उज्जैन में सिंहस्थ के मद्देनजर होने वाली लैंड पूलिंग अब नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने किसान संघ और उज्जैन के स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मुलाकात की और उज्जैन में होने वाली लैंड पूलिंग के फैसले को रद्द करने का ऐलान कर दिया। भारतीय किसान संघ और अन्य किसानों के संगठन लंबे समय से इस लैंड पूलिंग के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे। दरअसल प्रदेश सरकार ने करीब एक साल पहले सरकारी योजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण करने के लिए लैंड पुलिंग का कानून बनाया। इसी के तहत सिंहस्थ के लिए 17 गांवों की 2378 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित कर आध्यात्मिक सिटी बनाना तय किया गया। कई किसान संगठन इसे किसान विरोधी बताते हुए पिछले सात माह से आंदोलन कर रहे थे। सूत्रों के मुताबिक राज्य सरकार के लैंड पूलिंग के इस फैसले से बीजेपी आलाकमान और केंद्रीय नेतृत्व भी खुश नहीं थे और इसे लेकर केंद्रीय नेतृत्व ने अपनी नाराज़गी भी ज़ाहिर कर दी थी।
कुछ समय पहले ही भारतीय किसान संघ की ओर से इस लैंड पूलिंग के खिलाफ भोपाल में 'घेरा डालो-डेरा डालो' आंदोलन का ऐलान किया गया था। प्रदेश सरकार ने 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ के लिए लैंड पूलिंग करने का ऐलान किया था। जिसके तहत किसानों से उनकी जमीन लेकर सिंहस्थ को मद्देनजर रखते हुए डेवलप करने और सिंहस्थ के हिसाब से जरूरी पक्का कंस्ट्रक्शन करने का प्लान था। इसे लेकर किसान काफी आक्रोशित हो गए, लंबे वक्त से उज्जैन में किसानों का आंदोलन चल रहा था। लैंड पूलिंग को लेकर किसानों ने कई बार उज्जैन कलेक्ट्रेट का घेराव भी किया, कई आंदोलन किए। अबकि किसान संघ की ओर से भोपाल आकर सीएम हाउस घेरने की तैयारी की जा रही थी, मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किसानों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करके लैंड पूलिंग के फैसले को वापस लेने का ऐलान कर दिया। किसान संघ ने आरोप लगाया था कि लैंड पूलिंग के नाम पर किसानों से उनकी जमीन जबरदस्ती ली जा रही है। इतना ही नहीं, किसानों पर जमीन बेचने के लिए दबाव भी बनाया जा रहा है। किसान संघ ने इस फैसले को अनैतिक बताया था।
भारतीय किसान संघ, भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारी, उज्जैन के जनप्रतिनिधिगण और जिला प्रशासन उज्जैन के साथ मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव द्वारा आज भोपाल में मुख्यमंत्री निवास पर बैठक की गई। इस बैठक में सिंहस्थ के आयोजन को लेकर समग्र रूप से चर्चा की गई। जानकारी के मुताबिक सिंहस्थ का आयोजन दिव्य, भव्य और विश्वस्तरीय करने के लिये हर संभव प्रयास करने पर सहमति बनी, सीएम ने आश्वासन दिया कि साधु संतों, किसानो के हितों का व्यापक रूप से ध्यान रखा जायेगा। इसी चर्चा के बाद सिंहस्थ लैंड पूलिंग को निरस्त करने का निर्णय लिया गया। भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने बताया कि लैंड पूलिंग एक्ट को निरस्त किया गया है। उज्जैन के लिए हर्ष का विषय है कि 2028 के सिंहस्थ में उत्साह के साथ करोड़ों लोग आएंगे, हमारे पास पर्याप्त जगह है। साधु संतों के लिए ये सारा आयोजन है। उनका पूरा ध्यान रखा जाएगा वो हमारे मेहमान हैं। सिंहस्थ के लिए लैंड पूलिंग होनी थी, जिसे निरस्त किया गया है। ये हमारे लिए खुशी की बात है, हम इसके लिए साधुवाद देते हैं।