हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को US सुप्रीम कोर्ट से टैरिफ के मुद्दे पर बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने दुनियाभर के देशों पर ट्रंप की ओर से लगाए गए ट्रैरिफ को अवैध करार देकर रद्द करने का फैसला दिया था। हालांकि, इसके बावजूद ट्रंप पीछे हटने के मूड में नहीं है। US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने आज अपने दूसरे टर्म का पहला स्टेट ऑफ द यूनियन भाषण में अपनी इकोनॉमिक, ट्रेड और इमिग्रेशन पॉलिसी का जोरदार बचाव किया। उन्होंने कहा कि हम टैरिफ वसूलकर अमेरिकी जनता को इनकम टैक्स से मुक्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे समय बीतेगा, दूसरे देशों से लिए जाना वाला टैरिफ, इनकम टैक्स सिस्टम की जगह काफी हद तक ले लेंगे, जिससे मेरे प्यारे लोगों पर से एक बड़ा फाइनेंशियल बोझ कम हो जाएगा। हालांकि, जानकारों का कहना है कि यह पूरी तरह से संभव नहीं है। आइए समझने की कोशिश करते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के इस दावे में कितनी सच्चाई है? क्या है ट्रंप टैरिफ और 'टैक्स-फ्री' इकोनॉमी का क्या है पूरा गणित?
टैरिफ और ट्रंप की उलझती गुत्थी
ट्रंप ने टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले को “दुर्भाग्यपूर्ण” बतो हुए कहा कि उनका टैरिफ सिस्टम देश को बचा रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि यह पॉलिसी अमेरिका में काफी रेवेन्यू लाने का काम कर रही है और दूसरे देशों को “अमेरिका की कीमत पर कमाई करने” से रोक रही है। खास बात यह है कि उन्होंने यह बात सुप्रीम कोर्ट के जजों की मौजूदगी में कही जो भाषण में शामिल थे। उन्होंने कहा, “हमारा देश वापस आ गया है, पहले से कहीं ज्यादा बड़ा, बेहतर, अमीर और मजबूत।” “आपने अभी कुछ नहीं देखा है। हम और बेहतर, और बेहतर, और बेहतर करने जा रहे हैं। यह अमेरिका का गोल्डन एज है।” ट्रंप के दावे भले सुनने में अच्छे लगत हैं लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर हैं। टैरिफ के चलते अमेरिका में बेरोजगारी और महंगाई दोनों एक साथ बढ़ रही है।
इनकम टैक्स खत्म करने के सपने क्यों दिखा रहे ट्रंप?
आखिर, अमेरिकियों को ट्रंप इनकम टैक्स खत्म करने के सपने क्यों दिखा रहे हैं? आपको बता दें कि ट्रंप अमेरिका को उस दौर में वापस ले जाना चाहते हैं जब वहां कोई संघीय आयकर टैक्स (Federal Income Tax) नहीं था। आपको बता दें कि 1913 से पहले, अमेरिकी सरकार अपनी अधिकांश आय आयातित सामानों पर लगाए गए 'टैरिफ' से प्राप्त करती थी। ट्रंप का तर्क है कि अगर अमेरिका विदेशी सामानों पर भारी शुल्क लगाता है, तो देश को अपने नागरिकों की कमाई पर इनकम टैक्स लगाने की जरूरत नहीं होगी। लेकिन अब यह संभव नहीं है। ऐसा इसलिए कि 19वीं सदी के अंत में अमेरिका का सरकारी ढांचा छोटा था।कल्याणकारी योजनाएं सीमित थीं, रक्षा और सामाजिक सुरक्षा पर खर्च आज जितना भारी नहीं था। तब टैरिफ से सरकार चल जाती थी। अब ऐसा नहीं हो पाएगा।
इनकम टैक्स पूरी तरह से हटाना इसलिए संभव नहीं
आपको बता दें कि अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी है। अमेरिकी इकोनॉमी का एक बहुत बड़ा हिस्सा इनकम टैक्स से आता है। अमेरिका में 16 से 17 करोड़ लोग इनकम टैक्स भरते हैं। हालांकि, 'प्रोग्रेसिव टैक्स' सिस्टम के कारण, नीचे के लगभग 40% से 50% लोग शून्य या बहुत कम इनकम टैक्स देते हैं। अमेरिका का शीर्ष 1% अमीर लोग कुल आयकर का लगभग 45% हिस्सा देता है। यानी अमेरिकी खजाना काफी हद तक अमीरों और मध्यम वर्ग की कमाई पर निर्भर है।
जानकारों का कहना है कि अगर ट्रंप इनकम टैक्स खत्म करते हैं, तो उन्हें सालाना 2.5 खरब डॉलर की कमी को पूरा करना होगा। ऐसा इसलिए कि 2023-24 में अमेरिकी फेडरल सरकार ने कुल राजस्व लगभग 4.5-4.9 खरब डॉलर जुटाया। इसमें से इनकम टैक्स से करीब 2.2-2.5 खरब डॉलर प्राप्त हुआ। इसके अलावा पेरोल टैक्स, कॉर्पोरेट टैक्स, एक्साइज ड्यूटी आदि से भी टैक्स की वसूली हुई है।
Trump Masterplan
क्या टैरिफ से इस कमी को पूरा करना संभव है?
अमेरिका हर साल लगभग 3 खरब डॉलर (या उससे अधिक) का सामान आयात करता है। अगर औसतन 10% टैरिफ लगाया जाए, तो सैद्धांतिक रूप से अधिकतम 300 अरब डॉलर मिल सकते हैं। वहीं, 20% टैरिफ से 600 अरब डॉलर की आय हो सकती है, जो 2 खरब डॉलर के इनकम टैक्स की तुलना में बहुत कम है। इसका बुरा असर भी होगा। हाई टैरिफ से आयात घट सकते हैं और महंगाई बढ़ सकती है। इससे अमेरिका में मंदी आ सकती है।
क्या अमेरिका में 'टैक्स-फ्री' इकोनॉमी संभव है?
अमेरिका में पूरी तरह 'टैक्स-फ्री' इकोनॉमी लगभग असंभव है, क्योंकि सरकार को रक्षा, न्याय, इंफ्रास्ट्रक्चर, सामाजिक सुरक्षा जैसी सेवाओं के लिए स्थिर और बड़े पैसे की जरूरत होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाई टैरिफ लगाकर भी इनकम टैक्स की भरपाई करना असंभव है। अमेरिकी टैरिफ से अधिकतम 400 से 800 अरब डॉलर ही जुटाए जा सकते हैं, जबकि जरूरत 2500 अरब डॉलर की है। इसलिए इनकम टैक्स को पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता है।
