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क्यों IT और बैंकिंग स्टॉक्स को 'कबाड़' समझ बेच रहे FII ; समझें कैसे AI और वैल्यूएशन के मायाजाल में फंसा बाजार?

Nifty IT 23% का क्रैश हुआ। भारतीय में FIIs की हिस्सेदारी ऐतिहासिक निचले स्तर पर है। जानिए कैसे AI भारतीय IT कंपनियों के रेवेन्यू मॉडल को खत्म कर रहा है और पूरे शेयर बाजार का गणित बदल रहा है।

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आई स्टॉक्स पर एआई का साया
Authored by: Yateendra Lawaniya
Updated May 8, 2026, 16:27 IST

भारतीय शेयर बाजार 2026 में एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली ने सबसे पहले IT और बैंकिंग शेयरों को निशाना बनाया है। 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार से 2 लाख करोड़ रुपये के करीब बिकवाली की है। खासतौर पर IT, बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों को विदेशी निवेशकों ने कबाड के भाव बेचा है।

इसकी वजह से बाजार में यह धारणा बन रही है कि विदेशी निवेशक भारत को छोड़ रहे हैं, लेकिन असल कहानी इससे कहीं ज्यादा जटिल है। AI से जुड़ा डर, ऊंचा वैल्यूएशन, वैश्विक बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमतें और कमजोर रुपया, इन सबने मिलकर ऐसा माहौल बनाया है कि कई बड़े FII भारतीय लार्जकैप को “महंगा” और “कम रिटर्न वाला” मानकर बेच रहे हैं।

FII की बिकवाली असल में क्यों?

विदेशी निवेशकों की निकासी को केवल घबराहट कहना सही नहीं होगा। यह एक ऐसे पुनर्संतुलन है, जिसमें ग्लोबल फंड अब उन बाजारों की ओर झुक रहे हैं जहां AI ग्रोथ की कहानी ज्यादा ठोस दिख रही है। भारतीय बाजार, खासकर IT सेक्टर, इस समय AI की वजह से होने वाली कीमतों की गिरावट यानी “AI डिफ्लेशन” के डर से जूझ रहा है।

AI के व्यापक इस्तेमाल से कंपनियों की उत्पादकता तो बढ़ रही है, लेकिन यही दक्षता ग्राहकों को कम दाम की मांग करने का मौका दे रही है। नतीजा यह कि आय पर दबाव बन रहा है और मार्जिन के घटने का डर बढ़ गया है। कोटक सिक्योरिटीज के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि इस असर का आधारभूत अनुमान लगभग 3.5% है।

निवेशक श्रेणीनिफ्टी 500 में हिस्सेदारी (मार्च 2026)वार्षिक बदलाव
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII)17.1%-180 BPS
घरेलू संस्थागत निवेशक (DII)20.9%+170 BPS
रिटेल निवेशक12.7%वृद्धि
प्रमोटर49.4%स्थिर

IT पर AI डिफ्लेशन का असर

भारतीय IT कंपनियां लंबे समय तक इंसानी श्रम बेचने वाले मॉडल पर निर्भर रहीं। लेकिन जनरेटिव AI और ऑटोमेशन ने इस मॉडल की कमजोरी को उजागर कर दिया है। विदेशी निवेशक मान रहे हैं कि आने वाले समय में क्लासिक एप्लिकेशन डेवलपमेंट, मेंटेनेंस और सपोर्ट जैसे काम पहले की तरह भारी मानव संसाधन नहीं मांगेंगे।

इसी वजह से IT स्टॉक्स में तेज बिकवाली हुई है। 2026 की शुरुआत से Infosys और HCL Tech जैसे बड़े नाम 27 से 28 प्रतिशत तक टूट चुके हैं। Coforge, Tech Mahindra और TCS जैसी कंपनियों में भी FPI होल्डिंग में कमी देखी गई है। यह सिर्फ शेयर भाव की गिरावट नहीं, बल्कि उस बिजनेस मॉडल पर सवाल है जो दशकों तक भारतीय IT की ताकत माना जाता था।

बैंकिंग में वैल्यूएशन का गुब्बारा

बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं भारतीय बाजार का सबसे बड़ा और सबसे संवेदनशील हिस्सा हैं। जब FII निकलते हैं, तो इसका असर सबसे पहले इसी सेक्टर पर पड़ता है। मार्च 2026 में बैंकिंग क्षेत्र के मार्केट कैप में लगभग 9 लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई। इसकी बड़ी वजह यह है कि भारतीय बैंकों का वैल्यूएशन अभी भी ऐतिहासिक औसत और कई वैश्विक समकक्षों के मुकाबले ऊंचा है।

भारत का बफे रेश्यो 125 से 130 फीसदी के बीच है, जो ओवरवैल्यूएशन का संकेत देता है। इसके साथ ही, FII की बैंकिंग में हिस्सेदारी 13 से 15 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है और निफ्टी में उनकी हिस्सेदारी घटकर 24.1 प्रतिशत रह गई है। HDFC Bank, ICICI Bank और Axis Bank जैसे बड़े निजी बैंक बिकवाली के केंद्र में हैं।

वैश्विक आर्थिक संकेतक2026 की स्थितिभारतीय बाजार पर प्रभाव
अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड4.34% - 4.38%विदेशी पूंजी की निकासी
ब्रेंट क्रूड ऑयल> $100 प्रति बैरलमहंगाई और चालू खाता घाटे में वृद्धि
भारतीय रुपया (INR)₹92 - ₹94 प्रति USDविदेशी निवेशकों के रिटर्न में कमी
बफेट रेशियो (भारत)125% - 130%बाजार के ओवरवैल्यूड होने का संकेत

वैश्विक संकेतकों ने आग में घी डाला

यह दबाव केवल घरेलू नहीं है। अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 4.34 से 4.38 प्रतिशत के दायरे में बनी हुई है, जिससे फंड मैनेजरों के लिए उभरते बाजारों में जोखिम उठाना कम आकर्षक हो जाता है। ब्रेंट क्रूड के 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने से भारत के चालू खाते और महंगाई दोनों पर दबाव बढ़ा है। ऊपर से रुपया कमजोर होकर 95 प्रति डॉलर तक फिसल चुका है, जिससे विदेशी निवेशकों का डॉलर-आधारित रिटर्न और कम दिखने लगा है। इसी वजह से भारत के मुकाबले ताइवान, दक्षिण कोरिया और जापान जैसे एशियाई बाजार ज्यादा आकर्षक लग रहे हैं, क्योंकि वहां AI सप्लाई चेन से सीधा फायदा मिल रहा है। भारत की समस्या यह है कि वह अभी AI का उपयोगकर्ता ज्यादा है, निर्माता कम।

क्या घरेलू निवेशक भर पाएंगे खालीपन

इस पूरे दौर में एक बड़ा सहारा घरेलू निवेशक बने हैं। निफ्टी 500 में DII की हिस्सेदारी 20.9 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जबकि FII की हिस्सेदारी गिरकर 17.1 प्रतिशत रह गई है। SIP के जरिए हर महीने लगभग 29,000 करोड़ रुपये बाजार में आ रहे हैं, जो विदेशी बिकवाली के झटके को काफी हद तक सोख रहे हैं। इसके बावजूद सवाल यही है कि क्या घरेलू पैसा बाजार को गिरने से तो बचा सकता है, लेकिन क्या वह नई तेजी भी ला सकता है। जवाब फिलहाल आंशिक है। घरेलू निवेशक भरोसा बनाए हुए हैं, पर नई रैली के लिए विदेशी पूंजी की वापसी और ग्लोबल रिस्क सेंटिमेंट में सुधार जरूरी होगा।

FII IT STOCKS

FII IT STOCKS

आगे की दिशा क्या हो सकती है

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि भारतीय IT और बैंकिंग स्टॉक्स पूरी तरह दम तोड़ चुके हैं। अधिक सही निष्कर्ष यह होगा कि बाजार एक कड़े मूल्यांकन सुधार से गुजर रहा है, जो कंपनियां AI को तेजी से अपनाएंगी, लागत घटाएंगी और नए राजस्व मॉडल बनाएंगी, वे इस झटके से निकल भी सकती हैं। बैंकिंग में भी वही संस्थान बेहतर टिकेंगे जिनकी एसेट क्वालिटी, ग्रोथ और वैल्यूएशन में संतुलन रहेगा। निवेशकों के लिए यह समय डरने का नहीं, बल्कि चुनिंदा रहने का है। क्योंकि बाजार का मौजूदा “AI बनाम वैल्यूएशन” खेल सिर्फ गिरावट की कहानी नहीं है, बल्कि अगले नेतृत्व की तैयारी भी है।

डिस्क्लेमर: TimesNow Navbharat किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

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