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अमेरिका-भारत ट्रेड डील पर कब लगेगी मुहर? डेट आ गई! अब GDP और स्टॉक मार्केट दोनों भरेंगे उड़ान, समझें कैसे

India-US trade Deal: ट्रेड डील के बाद भारत की GDP ग्रोथ में कम से कम 0.50% से 0.80% की अतिरिक्त बढ़ोतरी संभव है। आर्थशास्त्रियों का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ के बाजवूद भारत बेहतर स्थिति में है। ग्लोबल सप्लाई चेन में चल रहा बदलाव, जो 2020 की कोविड महामारी और अब ट्रंप टैरिफ के मुकाबले टैरिफ रीअलाइनमेंट से और तेज हो गया है। इससे भारत को फायदा मिल रहा है।

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अमेरिका–भारत ट्रेड डील

India-US trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से अटकी ट्रेड डील कई चरण के वार्ता के बाद भी फाइनल नहीं हो पाई है। लेकिन अब अच्छी खबर आ रही है। चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर वी. अनंथा नागेश्वरन के अनुसार, भारत और अमेरिका ने अपने ज्यादातर ट्रेड मामलों को सुलझा लिया है। इसके बाद दोनों देश के बीच बाइलेटरल ट्रेड डील मार्च तक होने की संभावना बढ़ गई है। उनकी यह टिप्पणी दोनों तरफ से नई उम्मीद के बीच आई है, जिसमें US अधिकारियों ने माना है कि उन्हें भारत की ओर से अब तक का सबसे अच्छा ऑफर्स मिला है। इससे यह साफ है कि अब दोनों देश के बीच सबकुछ सही हो रहा है और जल्द ट्रेड डील की घोषणा हो सकती है। आइए समझने की कोशिश करते हैं कि इस ट्रेड डील होने से भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर मार्केट को कैसे बूस्ट मिलेगा?

इंडियन इकोनॉमी की रफ्तार होगी और तेज, जानें क्यों?

अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर 50% तक टैरिफ लगाए जाने से भारत के एक्सपोर्ट सेक्टर पर सीधा दबाव बढ़ गया है। सितंबर 2025 में US को भारत का एक्सपोर्ट 15% घटा। टेक्सटाइल, जेम्स-एंड-ज्वेलरी और लेदर जैसे पारंपरिक सेक्टर पर इसका सबसे ज्यादा असर नजर आ रहा है। इससे भारतीय निर्यातकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। सरकार ने निर्यातकों को राहत देने के लिए पैकेज समेत कई कदम उठाए हैं। घरेलू मांग बढ़ाने के लिए GST दरों में कमी की है। इससे घरेलू मांग में उछाल आया है। दूसरी तिमाही में भारतीय इकोनॉमी 8.5 प्रतिशत की दर से बढ़ी है। ऐसे में अगर अमेरिका से ट्रेड डील होता है तो भारतीय इकोनॉमी की रफ्तार और तेज होगी। इससे देश में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। ट्रेड डील के बाद भारत की GDP ग्रोथ में कम से कम 0.50% से 0.80% की अतिरिक्त बढ़ोतरी संभव है।

आर्थशास्त्रियों का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ के बाजवूद भारत बेहतर स्थिति में है। ग्लोबल सप्लाई चेन में चल रहा बदलाव, जो 2020 की कोविड महामारी और अब ट्रंप टैरिफ के मुकाबले टैरिफ रीअलाइनमेंट से और तेज हो गया है। यह भारत को ग्लोबल एक्सपोर्ट में अपना हिस्सा बढ़ाने का एक स्ट्रेटेजिक मौका दिया है। ये सारे फैक्टर्स भारतीय इकोनॉमी को मजबूती देने का काम करेंगे।

ट्रेड डील होने पर ये फायदे मिलेंगे

  1. निर्यात तेजी से बढ़ेगा: ट्रेड डील होने से भारतीय टेक्सटाइल, ज्वेलरी, इंजीनियरिंग आदि सेक्टरों को बढ़ावा मिलेगा। अमेरिका को होने वाले निर्यात में तेजी आएगी।
  2. मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा: भारत का लक्ष्य अगले 5 साल में अपनी ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हिस्सेदारी को 3% से बढ़ाकर 5% करने का है। US जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ ट्रेड डील इस दिशा में बड़ा कदम होगी।
  3. FDI में उछाल: टेक, एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर सेक्टर में अमेरिकी कंपनियों के निवेश में तेजी आएगी। इसका सीधा असर GDP पर होगा।
  4. सर्विस सेक्टर को बूस्ट: भारत का IT और कंसल्टेंसी सेक्टर पहले से ही अमेरिका पर निर्भर है। डील के बाद सर्विस एक्सपोर्ट की रफ्तार तेज होगी।

भारतीय स्टॉक मार्केट पर ट्रेड डील का असर

भारत पर US का 50 प्रतिशत टैरिफ इस साल भारतीय स्टॉक मार्केट में उतार-चढ़ाव के सबसे बड़े कारणों में से एक रहा है। जैसे-जैसे एक संभावित डील पास आ रही है, क्या इससे घरेलू इक्विटी मार्केट में ट्रेंड पलट सकता है? मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि अगर इंडिया-US ट्रेड होती है और टैरिफ को 15–16 प्रतिशत की रेंज में लाती है, तो इससे टेक्सटाइल, जेम्स और ज्वेलरी, और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज़ (EMS)। खासकर US को मोबाइल एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों को काफी राहत मिलेगी। इसलिए, ट्रेड डील के बाद इन सेक्टर में बड़ी रैली होने की संभावना है। हालांकि, बहुत कुछ एग्रीमेंट की डिटेल्स पर निर्भर करेगा। मार्केट इस बात पर करीब से नजर रखेगा कि भारत को कुछ मुद्दों पर समझौता करना पड़ा है या उसे नए फायदे मिले हैं।

उदाहरण के लिए, कुछ खास ट्रेड एरिया में छूट मिल सकती है, जिससे भारत की ट्रेड शर्तें कुछ पड़ोसी देशों की शर्तों के बराबर हो सकती हैं। अगर डील ज्यादा फायदेमंद होती है, तो यह मार्केट को पॉजिटिव रूप से सरप्राइज कर सकती है। लेकिन अगर भारत सिर्फ दूसरों के बराबर है, तो रिएक्शन कम हो सकता है। बहुत कुछ एग्रीमेंट की डिटेल्स पर निर्भर करेगा। मार्केट इस बात पर करीब से नजर रखेगा कि भारत को कुछ मुद्दों पर समझौता करना पड़ा है या उसे नए फायदे मिले हैं।

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता

शेयर बाजार क्यों भर सकता है उड़ान?

भारतीय शेयर बाजार हमेशा से भविष्य और अपेक्षाओं पर चलता है। जैसे ही ट्रेड डील की डेट सामने आई, बाजार के सेंटीमेंट में सकारात्मकता दिखने लगी है। इस डील से एक्सपोर्ट-ओरियंटेड कंपनियों जैसे टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, IT, फार्मा, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि कंपनियों को फायदा मिलेगा। इन सेक्टर की कंपनियों के शेयरों में तेजी आ सकती है।

ये भी फायदे मिलेंगे

बाजार में विदेशी फंड की वापसी: अमेरिका के साथ ट्रेड डील होने पर FDI का नया प्रवाह भारत की ओर मुड़ेगा। इससे विदेशी निवेशक बढ़ेगा।

रुपये में मजबूती लौटेगी: ट्रेड डील के बाद डॉलर के मुकाबले रुपये में स्थिरता आने की मजबूत उम्मीद है। यानी रुपये में गिरावट थमेगी और रिकवरी शुरू होगी। मजबूत रुपये का सीधा फायदा इंडियन इकोनॉमी और आम लोगों को होगा।

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