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यशवंत सिन्हा की सूझबूझ, वाजपेयी का विजन: जानें कैसे मिलेनियम बजट ने भारत को बनाया 'IT सुपरपावर'?

भारत के इतिहास में साल 2000 का बजट सिर्फ आंकड़ों और घोषणाओं का पुलिंदा नहीं था, बल्कि वही मोड़ था जहां से भारत की IT किस्मत बदलनी शुरू हुई। Millennium Budget के नाम से लोकप्रिय इस बजट ने भारतीय सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री, टेक्नोलॉजी और निवेश को ऐसी रफ्तार दी कि भारत कुछ ही सालों में दुनिया का IT हब बन गया। आखिर क्या था इस बजट में खास, और कैसे एक फैसले ने भारत को IT सुपरपावर बनाया, आइए डिटेल में जानते हैं?

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Budget 2026

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026, रविवार को केंद्रीय बजट पेश करने जा रही हैं। यह मोदी सरकार के कार्यकाल में उनका लगातार नौवां बजट होगा, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड है। बजट को लेकर तैयारियां तेज हैं। हर साल जब भी बजट पेश होने वाला होता है तो उससे जुड़े किस्से और बातें भी सामने आती हैं। भारत के बजट इतिहास पर नजर डालें तो देश का पहला बजट 7 अप्रैल 1860 को ब्रिटिश शासन के दौरान जेम्स विल्सन ने पेश किया था। आज़ाद भारत का पहला बजट 26 नवंबर 1947 को पेश हुआ था, जो एक अंतरिम बजट था और इसे तत्कालीन वित्त मंत्री आर. के. शनमुखम चेट्टी ने पेश किया था। वहीं, गणतंत्र भारत का पहला बजट 28 फरवरी 1950 को वित्त मंत्री जॉन मथाई द्वारा पेश किया गया था।

इसी ऐतिहासिक कड़ी में आज हम एक ऐसे बजट की बात कर रहे हैं, जिसने भारत के आईटी सेक्टर की तस्वीर ही बदल दी। यह बजट साल 2000 में पेश किया गया था और इसे Millennium Budget के नाम से जाना जाता है। इस बजट को भारत के आईटी सेक्टर में क्रांति लाने वाला माना जाता है। आइए आपको डिटेल में बताते हैं कि इस बजट ने कैसे भारत को IT सुपरपावर बना दिया।

किसकी थी सरकार?

साल 2000 में देश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी और प्रधानमंत्री थे अटल बिहारी वाजपेयी। इससे पहले 1996 में 13 दिन और 1998 से 1999 तक 13 महीने की अल्पकालिक सरकार के बाद, अटल बिहारी वाजपेयी को पहली बार पूरे पांच साल का कार्यकाल मिला। उनके इसी पूर्णकालीन कार्यकाल के दौरान देश का वह ऐतिहासिक बजट पेश किया गया, जिसने आगे चलकर भारत को ग्लोबल आईटी हब बनाने की नींव रखी। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार 22 मई 2004 तक चली।

कब पेश हुआ था ये बजट?

29 फरवरी 2000 को तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने संसद में बजट पेश किया। खास बात यह थी कि यह बजट लीप ईयर के दिन पेश हुआ और आगे चलकर इसे Millennium Budget कहा जाने लगा। इस बजट में आईटी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए कई बड़े और दूरदर्शी फैसले लिए गए। सरकार का मकसद भारत को एक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट हब के रूप में स्थापित करना था।

Millenium Budget

कैसे इस बजट ने बदली IT सेक्टर की तस्वीर?

इस बजट में आईटी इंडस्ट्री के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया गया। सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट्स को लेकर पहले जो इंसेंटिव्स दिए जाते थे, उन्हें धीरे-धीरे खत्म करने की योजना बनाई गई ताकि कंपनियां सरकारी सहारे पर नहीं, बल्कि अपनी क्षमता के दम पर आगे बढ़ें। इसके साथ ही कंप्यूटर, हार्डवेयर और एक्सेसरीज से जुड़ी करीब 21 वस्तुओं पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी में कटौती की गई, जिससे तकनीक सस्ती हुई और आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से विकसित हुआ।

सरकार का यह कदम भारतीय आईटी कंपनियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बेहद अहम साबित हुआ। जैसे-जैसे सरकारी प्रोत्साहन हटे, कंपनियों ने खुद को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया। इसका नतीजा यह हुआ कि भारत ने सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट के क्षेत्र में दुनिया में अपनी मजबूत पहचान बना ली। आगे चलकर टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो और एचसीएल जैसी कंपनियां ग्लोबल ब्रांड बन गईं और लाखों युवाओं को रोजगार मिला।

मिलेनियम बजट में लिए गए थे ये प्रमुख निर्णय

  1. सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) में भारी कटौती: कंप्यूटर और उसके एक्सेसरीज सहित 21 IT उत्पादों पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी कम कर दी गई थी। उदाहरण के लिए, कंप्यूटर और मदरबोर्ड पर शुल्क 20% से घटाकर 15% किया गया, जबकि माइक्रोप्रोसेसर, मेमोरी डिवाइस और CD-ROM जैसे कई उत्पादों पर शुल्क पूरी तरह से हटा दिया गया था।
  2. निर्यात प्रोत्साहन का चरणबद्ध रूप से खात्मा: पूर्व वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा सॉफ्टवेयर निर्यातकों को दिए गए विशेष प्रोत्साहन (इंसेंटिव्स) को धीरे-धीरे खत्म करने का फैसला किया गया। इसका उद्देश्य उद्योग को आत्मनिर्भर बनाना और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना था।
  3. प्रौद्योगिकी के प्रसार को बढ़ावा: कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर जैसे उत्पादों को सस्ता और सुलभ बनाकर पूरे देश में तकनीक के प्रसार को गति दी गई।

बजट के फैसले से IT सेक्टर को कैसे मिली उड़ान?

  • लागत में कमी आई: हार्डवेयर और एक्सेसरीज पर शुल्क कम होने से कंपनियों की लागत घटी, जिससे उनकी वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ी।
  • इनोवेशन का हुआ विस्तार: कम लागत और बढ़ी हुई पहुंच ने नई IT कंपनियों के उदय और मौजूदा कंपनियों के विस्तार में मदद मिली।
  • वैश्विक पहचान: सही नीतियों के सहारे, भारतीय IT कंपनियों ने दुनिया भर में अपनी पैठ बनानी शुरू की और भारत को एक विश्वसनीय सॉफ्टवेयर और सेवा निर्यातक के रूप में स्थापित किया।

अर्थव्यवस्था का बैकबोन बना सेक्टर

Millennium Budget के बाद भारत का आईटी सेक्टर सिर्फ एक उद्योग नहीं रहा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन गया। इस बजट ने न केवल निवेश बढ़ाया, बल्कि भारत को टेक्नोलॉजी के दम पर दुनिया के बड़े देशों की कतार में खड़ा कर दिया। आज भारत को आईटी सुपरपावर बनाने में इस बजट की भूमिका को कोई नकार नहीं सकता।

भारत IT सुपरपावर कैसे बना?

Millennium Budget के बाद भारत में IT क्षेत्र में कई बड़े बदलाव आए। पहला बदलाव यह था कि कंपनी लागत कम हुईं, जिससे IT कंपनियां सस्ते में बेहतर सेवाएं दे सकीं। दूसरा यह कि विदेशी निवेश बढ़ा और कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत में कार्य केंद्र खोलने लगीं। इसके अलावा वैश्विक “ऑउटसोर्सिंग” की डिमांड भी तेजी से बढ़ी, खासकर अमेरिका और यूरोप की कंपनियों ने भारत को अपनी सेवाएं देने के लिए चुना। नतीजतन, आज भारत दुनिया का एक बड़ा IT सुपरपावर बन चुका है और उसका IT उद्योग लगभग US$350 बिलियन (करीब ₹30 लाख करोड़) तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे यह देश की अर्थव्यवस्था में लगभग 10% का योगदान देता है।

भारत की टॉप IT कंपनियां कौन-सी हैं?

भारतीय IT इंडस्ट्री में कई बड़ी कंपनियां हैं जिन्होंने वैश्विक मंच पर नाम बनाया है। सबसे प्रमुख में शामिल हैं

  • Tata Consultancy Services (TCS) – सबसे बड़ी आईटी सेवाओं की कंपनी, जिसके पास सैकड़ों हजार कर्मचारी हैं और यह दुनिया के कई देशों में कार्य करती है।
  • Infosys – भारतीय IT का एक और बड़ा नाम, जो सॉफ्टवेयर और कंसल्टिंग सेवाएं प्रदान करता है।
  • Wipro – व्यापक तकनीकी सेवाओं और सोल्यूशन वाली कंपनी।
  • HCL Technologies – वैश्विक IT सेवाओं में एक बड़ी खिलाड़ी।
  • Tech Mahindra – भारतीय मल्टीनेशनल IT कंपनी, जो बड़े पैमाने पर आउटसोर्सिंग और तकनीकी सेवाएं देती है।
  • ये कंपनियां न सिर्फ भारत में बल्कि दुनियाभर में ग्राहकों के लिए डिजिटल सेवाएं, सॉफ्टवेयर समाधान और IT कंसल्टिंग जैसी सेवाएं देती हैं।
IT companies

IT कंपनियों का भारत में बोलबाला

भारत के IT सेक्टर ने वर्षों में इतना विकास किया है कि यह अब ग्लोबल सेवा नेटवर्क का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है। भारतीय IT कंपनियों ने दुनिया भर में अपने ऑफिस खोले हैं और बड़े बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। इसी वजह से आज भारत की IT कंपनियां ग्लोबल आउटसोर्सिंग, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा, और डेटा एनालिटिक्स जैसी आधुनिक सेवाओं में भी अग्रणी हो रही हैं। इसके अलावा भारत में बढ़ते निवेश और तकनीकी स्टार्टअप संस्कृति ने भी इस क्षेत्र को और मजबूत किया है, जिससे नई कंपनियां और उद्यम भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

IT सेक्टर रोजगार का बड़ा स्रोत

IT उद्योग न सिर्फ राजस्व और निर्यात के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि रोजगार के लिहाज से भी सबसे बड़ा सेक्टरों में से एक बन चुका है। भारत में IT और IT-enabled सेवाओं (ITeS) में लाखों लोगों को सीधे नौकरी मिली है। उदाहरण के लिए, IT और BPM सेक्टर अकेले ही करीब 5.4 मिलियन (54 लाख) कर्मचारियों को रोजगार देता है। यह संख्या सालों में बढ़ती जा रही है क्योंकि कंपनियां तकनीकी विशेषज्ञों, सॉफ्टवेयर डेवलपर्स और IT कंसल्टेंट्स को भर्ती कर रही हैं खासतौर से नई तकनीकों जैसे क्लाउड कंप्यूटिंग और AI में मांग के चलते। यह रोजगार सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है कई तकनीकी हब जैसे बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, पुणे और नोएडा भी तेजी से IT रोजगार के केंद्र बन रहे हैं।

2026 Budget.

निवेशकों की कमाई का भी बना जरिया

भारत का IT सेक्टर न सिर्फ सेवाएं देता है, बल्कि यह निवेशकों को भी बड़ी कमाई का अवसर देता है। दुनियाभर के निवेशक भारत के IT कंपनियों में पूंजी निवेश करते हैं, क्योंकि ये कंपनियां निर्यात में मजबूत हैं और भविष्य में विकास की क्षमता दिखाती हैं। वर्ष 2025 में IT एवं ITES क्षेत्र ने हज़ारों करोड़ रुपये के निजी इक्विटी निवेश को आकर्षित किया है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स जैसी कंपनियों को भारी निवेश मिला है। यह निवेश न सिर्फ नए व्यवसायों को उभारता है, बल्कि बेहतर तकनीक, नवाचार और वैश्विक विस्तार के लिए भारतीय कंपनियों को सक्षम बनाता है, जिससे निवेशकों की लाभ-क्षमता और बढ़ती है।

विदेशों में भारत के IT सेक्टर का बोलबाला

भारतीय IT कंपनियों ने अपने सॉफ्टवेयर और सेवाओं का निर्यात दुनिया भर में किया है। यह निर्यात भारत को विश्व भर में तकनीकी और IT सेवा एक्सपोर्ट हब के रूप में स्थापित करता है। रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय IT उद्योग का निर्यात लगातार बढ़ रहा है और यह लगभग US$350 बिलियन तक पहुंचने की ओर बढ़ रहा है। इस निर्यात ने भारत को वैश्विक तकनीकी मांग के केंद्र में ला दिया है, जिससे विदेशी आय और घरेलू आर्थिक स्थिति दोनों मजबूत हुई हैं।

आज जब हम देख रहे हैं कि अब IT केवल सेवाओं तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह डिजिटल नवाचार, AI, डेटा साइंस, क्लाउड सेवाओं और ग्लोबल Capability Centres (GCCs) जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है, तो यह साफ़ है कि भारत की IT क्रांति जारी रहेगी। इसके कारण भारत डिजिटल अर्थव्यवस्था का एक मजबूत खिलाड़ी बन चुका है और आने वाले वर्षों में यह और भी बड़े लक्ष्य हासिल करेगा जैसे और अधिक रोजगार, वैश्विक सेवा विस्तार, तकनीकी अनुसंधान एवं विकास, और तेज-तर्रार आर्थिक विकास।

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