हम सभी को लगता है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का मुख्य काम देश की अर्थव्यवस्था को संभालना और महंगाई को कंट्रोल में रखना है। इसके लिए आरबीआई समय-समय पर अपने तरीके से कदम उठाता है। जब भी महंगाई बेकाबू होती है तो आरबीआई रेपो रेट (Repo Rate) में बढ़ोतरी कर देता है। इससे मार्केट में पैसे की कमी होती है और महंगाई कंट्रोल में आ जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन सब से इतर आरबीआई हर साल लाखों करोड़ की कमाई भी करता है। इस साल आरबीआई की कुल ₹4.28 लाख करोड़ की कमाई हुई है।
इसी कमाई में से हाल ही में आरबीआई ने सरकार को ₹2.87 लाख करोड़ दिए हैं। इसके बाद बहुत सारे लोगों को समझ में नहीं आ रहा कि जब आरबीआई कमर्शियल बैंक की तरह काम नहीं करता तो फिर इतनी कमाई कहां से होती है? अगर आप भी इस सवाल का जवाब ढूंढ रहे हैं तो आइए समझते हैं कि आरबीआई की कमाई के पीछे की पूरी कहानी।
रुपये को सहारा देते-देते हुई बंपर कमाई
अमेरिकी टैरिफ, युद्ध और AI की तेजी के चलते पिछला साल बहुत उथल-पुथल भरा रहा है। इसके चलते विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। विदेशी निवेशकों की बिकवाली से रुपये में बड़ी गिरावट आई है। वहीं, दूसरी ओर सोना और चांदी महंगा होने से इनके आयात बिल रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गए। इसके कारण अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 10% गिर गया। रुपये को बचाने की RBI की कोशिशों का एक नतीजा यह निकला कि केंद्रीय बैंक के लिए आय का सबसे बड़ा जरिया बन गया।
RBI पहले से खरीदी गई विदेशी मुद्रा को बेचकर रुपये को मजबूती देता है। खरीदने की कीमत और बेचने की कीमत के बीच का अंतर शुद्ध मुनाफा होता है। उदाहरण के लिए, अगर एक डॉलर 75 रुपये में खरीदा गया और 95 रुपये में बेचा गया, तो यह 20 रुपये का मुनाफा है। कुल मिलाकर, RBI ने 2025-26 में सकल आधार पर 195 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा बेची। इसके परिणामस्वरूप, 'विदेशी मुद्रा लेन-देन से विनिमय लाभ' के रूप में 1.69 लाख करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई, जो 2024-25 की तुलना में 52% अधिक है।
बॉन्ड से 1.18 लाख करोड़ की कमाई
रुपये के बचाने के अलावा आरबीआई की दूसरी बड़ी कमाई बॉन्ड से हुई है। 2025-26 में, RBI नहीं चाहता था कि ब्याज दरें बढ़ें। इसलिए, उसे अपनी डॉलर बिक्री के असर को खत्म करने के लिए भारतीय बाजार में रुपए डालने पड़े। उसने ऐसा 9 लाख करोड़ रुपए के केंद्र सरकार के बॉन्ड खरीदकर किया। इन बॉन्डों, और पहले के बॉन्डों से पिछले साल RBI को 1.18 लाख करोड़ रुपए का ब्याज मिला।
विदेशी मुद्रा भंडार से भी कमाई
RBI अपनी विदेशी मुद्रा भंडार के हिस्से के तौर पर रखी गई विदेशी सिक्योरिटीज पर भी ब्याज कमाता है। 2025-26 में, यह ब्याज आय 11% बढ़कर 1.08 लाख करोड़ रुपये हो गई। इसे अपनी विदेशी जमाओं पर ब्याज के तौर पर 27,407 करोड़ रुपये भी मिले। बता दें कि आरबीआई अमेरिकी ट्रेजरी बिल, विदेशी सरकारी सिक्योरिटीज और टॉप रेटिंग वाले विदेशी केंद्रीय बैंकों में निवेश करता है। आरबीआई को अपने विदेशी निवेश पर डॉलर के रूप में अरबों रुपये का ब्याज मिला।
ओपन मार्केट ऑपरेशन्स से आय
आरबीआई के पास देश की केंद्र और राज्य सरकारों के बॉन्ड्स और सिक्योरिटीज का एक विशाल पोर्टफोलियो होता है। इन सरकारी कागजातों पर आरबीआई को सरकार से नियमित रूप से ब्याज मिलता है।
वित्त वर्ष 2025-26 में RBI की आय
| आय का स्रोत | 2024-25 (₹ करोड़) | 2025-26 (₹ करोड़) |
|---|---|---|
| रुपये में जारी सरकारी सिक्योरिटीज से ब्याज | 85,525 | 1,17,740 |
| विदेशी प्रतिभूतियों से ब्याज | 97,007 | 1,07,679 |
| विदेशी जमा पर ब्याज | 36,195 | 27,407 |
| तरलता संचालन पर ब्याज | -10,120 | -19,163 |
| विदेशी मुद्रा लेनदेन से विनिमय लाभ | 1,11,143 | 1,68,906 |
| कुल आय (Total Income) | 3,38,308 | 4,27,684 |
रेपो और रिवर्स रेपो से इनकम
जब कमर्शियल बैंकों को शॉर्ट-टर्म के लिए पैसों की जरूरत होती है, तो वे आरबीआई से कर्ज लेते हैं। इस कर्ज के बदले आरबीआई उनसे रेपो रेट वसूलता है। बैंकों को दिए गए इस कर्ज से आरबीआई को ब्याज के रूप में तगड़ी आय हुई।
सरकार को ₹2.87 लाख करोड़ कहां से मिले?
वित्त वर्ष 2025-26 में RBI की कुल आय ₹4.28 लाख करोड़ हुई। वहीं, नोट छपाई से लेकर दूसरे मद में ₹1.41 लाख करोड़ खर्च हुए। इस तरह ₹2.87 लाख करोड़ बची राशि रकम को RBI ने केंद्र सरकार को डिविडेंड के रूप में हस्तांतरित किया है।
सरकार को मिले ₹2.87 लाख करोड़
सरकार इस पैसे का क्या करेगी?
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि RBI से मिले डिविडेंड का उपयोग सरकार राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने, बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को गति देने और सामाजिक कल्याण योजनाओं को मजबूती प्रदान करने में कर सकती है। सबसे खास बात यह है कि इस अतिरिक्त आय के कारण सरकार को बाजार से कम उधारी लेनी पड़ेगी, जिससे देश पर कर्ज का बोझ कम होगा।
आम आदमी पर इसका क्या असर पड़ेगा?
आरबीआई की इस रिकॉर्ड तोड़ कमाई का सीधा फायदा आम लोगों को किसी नकद रूप या बैंक खाते में पैसे आने के तौर पर नहीं मिलता है, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से इसका बहुत बड़ा और सकारात्मक असर पड़ता है। इससे सरकार पर वित्तीय दबाव कम होता है, जिससे वह आम जनता से जुड़ी विकास योजनाओं पर खुलकर खर्च कर पाती है।
