Stock Market Crash Explained: बाजार क्यों टूट रहा है, गिरावट कब थमेगी और निवेशकों को क्या करना चाहिए?
Why share makret crash today in India (शेयर बाजार आज क्यों क्रैश हुआ, share market aaj crash) 12 January 2026 : भारतीय शेयर बाजार में गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है। निवेशकों को समझ में नहीं आ रहा कि वो क्या करें? 2025 में मिली निराशा के बाद 2026 से उम्मीद जगी थी लेकिन यह साल भी निवेशकों को शुरुआत से ही झटका दे रहा है। ऐसे में एक आम निवेशक को क्या करना चाहिए? आइए जानते हैं।
- Authored by: आलोक कुमार
- Updated Jan 12, 2026, 11:16 AM IST
Why share makret crash today in India (शेयर बाजार आज क्यों क्रैश हुआ, share market aaj crash) 12 January 2026 : भारतीय शेयर बाजार में गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को बाजार खुलते ही धड़ाम हो गया है। बीएसई सेंसेक्स 411.55 अंक टूटकर 83,164 अंक पर पहुंच गया है। वहीं एनएसई निफ्टी भी 115 अंक गिरकर 25,567 अंक पर आ गया है। दोनों अहम इंडेक्स ने अपना सपोर्ट तोड़ दिया है। इससे बाजार में और गिरावट आने की आशंका मार्केट एक्सपर्ट लगा रहे हैं। आपको बता दें कि पिछले 5 ट्रेडिंग सेशन में सेंसेक्स 2,192 अंक टूट गया है। निफ्टी की बात करें तो इस समान अवधि में 613 अंक लुढ़क गया है।
बाजार में बड़ी गिरावट आने से 2 जनवरी से लेकर आज तक 1,652,920 करोड़ रुपये डूब गए हैं। बताते चलें कि 2 जनवरी को बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,81,24,779 करोड़ रुपये था जो आज घटकर 4,64,71,858 करोड़ रुपये पहुंच गया है। इस तरह निवेशकों को भारी नुकसान हुआ है। अब निवेशकों के मन में यह सवाल है कि वो आगे क्यों? अगर आप भी निवेशक हैं तो आइए जानते हैं कि आपको क्या करना चाहिए?
इन 6 वजहों से शेयर बाजार टूट रहा?
1. अमेरिकी नए टैरिफ को लेकर डर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल खरीद को लेकर भारत पर 500% तक टैरिफ लगाने की धमकी दी है। निवेशक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अमेरिकी टैरिफ बढ़ सकते हैं। रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने 7 जनवरी को कहा था कि ट्रंप ने रूस प्रतिबंध बिल का समर्थन किया है, जिससे रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी टैरिफ कम से कम 500% तक बढ़ सकते हैं। इससे बााजर में बिकवाली हावी है।
2. Q3 नतीजों से पहले सावधानी
घरेलू स्तर पर, निवेशक कॉर्पोरेट कमाई की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं। IT दिग्गज TCS और HCL टेक सोमवार को अपनी कमाई की रिपोर्ट देंगे। कई तिमाहियों तक कमजोर कमाई के बाद, विशेषज्ञ Q3 से कमाई में सुधार की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि, अगर आंकड़े उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते हैं, तो यह बाजार के लिए बहुत बड़ा नकारात्मक होगा और विदेशी पूंजी के बहिर्वाह को तेज कर सकता है।
3. FII की लगातार बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) पिछले साल जुलाई से भारतीय शेयर बेच रहे हैं। जनवरी में 8 तारीख तक, उन्होंने कैश सेगमेंट में ₹8,000 करोड़ से अधिक के भारतीय शेयर बेचे हैं। 2025 में बाज़ार के मामूली रिटर्न के पीछे विदेशी पूंजी का बाहर जाना मुख्य कारण था। अगर यह ट्रेंड नहीं बदलता है, तो एक्सपर्ट्स को डर है कि 2026 में भी घरेलू बाजार का फायदा मामूली रह सकता है।
4. भारत-अमेरिका ट्रेड पर संकट
भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बनी अनिश्चितता भी बाजार में गिरावट का कारण बन रही है। इस उम्मीद के विपरीत कि भारत अमेरिका के साथ व्यापार समझौता करने वाले पहले देशों में से होगा, कई दौर की बातचीत के बावजूद दोनों देश समझौता करने में नाकाम रहे हैं। यह भी बाजार को नीचे धकेल रहा है।
5. रुपये में जारी गिरावट
बाजार में बिकवाली के पीछे रुपये की कमजोरी भी हम वजह है। डॉलर के मुकाबले रुपया तेजी से गिर रहा है। 2025 में बड़ी गिरावट के बाद 2026 में भी गिरावट जारी है। इससे विदेशी निवेशकों को नुकसान हो रहा है। वो अपना पैसा निकाल रहे हैं। इससे बाजार में गिरावट है।
6. दुनिया में बढ़ता युद्ध का संकट
अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर कब्जा और दूसरे देशों को धमकी देने से वैश्विक तनाव चरम पर है। इससे जहां एक ओर सोने और चांदी की कीमत बढ़ रही है, वहीं बाजार में गिरावट जारी है।
शेयर बाजार
स्टॉक मार्केट एक्सपर्ट का क्या है कहना?
चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट, आकाश शाह के अनुसारर, निफ्टी 50 पर दबाव बना हुआ है, जो नए बुलिश ट्रिगर्स की कमी को दर्शाता है। टेक्निकली, इंडेक्स को और गिरावट से बचने के लिए 25,500–25,600 सपोर्ट जोन को बनाए रखने की जरूरत है, जबकि शॉर्ट-टर्म मोमेंटम को स्थिर करने के लिए 25,800–25,850 से ऊपर लगातार ब्रेकआउट जरूरी है।
बैंक निफ्टी भी नेगेटिव रुझान के साथ कंसोलिडेट हो रहा है। तत्काल सपोर्ट 59,000 के पास दिख रहा है, और ब्रेकडाउन 58,900–58,800 की ओर रास्ता खोल सकता है। ऊपर की ओर, 59,500–59,600 एक मजबूत रेजिस्टेंस बैंड बना हुआ है। इंस्टीट्यूशनल मोर्चे पर, 9 जनवरी को FIIs लगभग ₹3,367 करोड़ के नेट सेलर बने रहे (लगातार चौथा सेशन), जबकि DIIs ने लगभग ₹3,701 करोड़ की नेट खरीदारी के साथ मजबूत सपोर्ट दिया। यानी अगर बाजार सपोर्ट तोड़ता है और बड़ी गिरावट आ सकती है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा कि भारतीय बाजार काफी कमजोर हो गया है, जिस पर भारत से जुड़े और ग्लोबल जियोपॉलिटिकल घटनाओं का असर पड़ा है। US-भारत ट्रेड डील को लेकर संशय, US एडमिनिस्ट्रेशन की अजीबो गरीब टिप्पणियां बाजार पर बुरा असर डाल रही है। वेनेजुएला में जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट, ईरान में संकट और ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की धमकियों ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। इससे इंडिया वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया VIX में तेजी आई है, जो आगे बड़ी वोलैटिलिटी का संकेत दे रहा है।
शुक्रवार को US सुप्रीम कोर्ट से ट्रंप टैरिफ पर आने वाला फैसला नहीं आया, यह कब होगा, इस पर कोई क्लैरिटी नहीं है। फिर भी यह कभी भी हो सकता है, इसलिए इन्वेस्टर्स को इस मोर्चे पर होने वाले डेवलपमेंट पर नजर रखनी होगी। इसलिए Q3 के नतीजे और टेक कंपनियों और बैंकिंग और RIL जैसी बड़ी कंपनियों के मैनेजमेंट की कमेंट्री शॉर्ट टर्म में मार्केट ट्रेंड को प्रभावित करेगी।
एक आम निवेशक क्या करें?
मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि निवेशकों को डर या घबराहट में बिकवाली करने से बचना चाहिए। अगर बाजार को लेकर लॉन्ग टर्म व्यू है तो घबराने की जरूरत नहीं है। अच्छे स्टॉक के साथ बने रहे। हां, अभी जल्दबाजी में कोई नया निवेश बिल्कुल नहीं करें। यह आपको नुकसान दे सकता है। जब तक हालात बेहतर नहीं होते हैं, बाजार को वेट एंड वॉच करें। अगर सिप के जरिये निवेश करते हैं तो टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। अपना सिप जारी रखें। सिप बंद बिल्कुल भी नहीं करें। ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो शेयर बाजार की गिरावट के बाद लंबी अवधि में रिकवरी और नए उच्च स्तर भी आए हैं। कई पुराने निवेशक मानते हैं कि गिरावट के समय धैर्य और अनुशासित निवेश लाभकारी अवसर दे सकता है।
