फिलहाल देश में बिहार मूल के करीब 500 IAS सेवा में है। इसके अलावा लाखों श्रमिक देश के हर कोने और हर बड़ी परियोजना को अपने पसीने से सींचते मिल जाएंगे। यूं तो बिहार की धरती का गौरवशाली इतिहास है, जहां बुद्ध से लेकर, चाणक्य और चंद्रगुप्त तक हुए हैं। लेकिन, Bihar सिर्फ अतीत को नहीं ताक रहा है। बल्कि, ग्लाेबल बिजनेस पावर हाउसेज बनाकर भविष्य को भी आकार दे रहा है।
जानिए पटना, छपरा, जहानाबाद और भागलपुर से निकले उद्यमियों ने कैसे खनन, फार्मा, टेक और एग्रीटेक जैसे सेक्टर्स में अरबों डॉलर के बिजनेस खड़े किए हैं। यह पांच कंपनियां सिर्फ बिजनेस की कहानी नहीं हैं, बल्कि बिहार की बदलती पहचान का संकेत हैं। यह आज तब और ज्यादा प्रासंगिक है, जब बिहार की सत्ता में एक बड़ा बदलाव हुआ है और Bihar BJP के नेता सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) ने एक युवा मुख्यमंत्री के तौर पर बिहार की कमान संभाली है।
5 लाख करोड़ से ज्यादा मार्केट कैप
बिहार से जुड़े इन पांच बड़े कारोबारी नामों की कुल वैल्यू पर नजर डालें तो तस्वीर काफी मजबूत दिखती है। Vedanta Limited का मार्केट कैप करीब ₹2.8 लाख करोड़ है, जबकि Alkem Laboratories लगभग ₹55–60 हजार करोड़ के दायरे में है। वहीं Nutanix की वैल्यू करीब ₹80 हजार करोड़ से ₹1 लाख करोड़ के बीच है। इसके अलावा Tiger Analytics और DeHaat जैसी कंपनियां मिलकर करीब ₹15–20 हजार करोड़ की वैल्यू जोड़ती हैं। इस तरह कुल मिलाकर इन पांचों कंपनियों का संयुक्त मार्केट कैप/वैल्यू करीब ₹4.5 लाख करोड़ से ₹5 लाख करोड़ के आसपास बैठता है, जिसमें सबसे बड़ा योगदान अकेले वेदांता का है।
| कंपनी | फाउंडर | बिहार कनेक्शन | सेक्टर | ग्लोबल मौजूदगी |
|---|---|---|---|---|
| Vedanta | अनिल अग्रवाल | पटना | माइनिंग & मेटल्स | UK, Africa, Australia समेत कई देश |
| Alkem Labs | संप्रदा सिंह | जहानाबाद | फार्मा | 40+ देश |
| Nutanix | धीरज पांडेय | पटना | क्लाउड & IT | ग्लोबल एंटरप्राइज मार्केट |
| Tiger Analytics | महेश कुमार | भागलपुर | AI & डेटा एनालिटिक्स | 5 महाद्वीप |
| DeHaat | शशांक कुमार | छपरा | एग्रीटेक | भारत + स्केलेबल मॉडल |
वेदांता: पटना से लंदन स्टॉक एक्सचेंज तक
अनिल अग्रवाल की कहानी बिहार की उद्यमशीलता का सबसे बड़ा उदाहरण है। पटना से निकलकर उन्होंने स्क्रैप बिजनेस से शुरुआत की और धीरे-धीरे Vedanta को ग्लोबल माइनिंग दिग्गज बना दिया। 2003 में लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टिंग के साथ कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल की। BALCO, Hindustan Zinc और Cairn India जैसे बड़े अधिग्रहणों ने इसे संसाधन सेक्टर का पावरहाउस बना दिया।
Alkem Laboratories: जहानाबाद से फार्मा साम्राज्य
संप्रदा सिंह ने एक छोटी दवा दुकान से शुरुआत कर Alkem Laboratories को भारत की बड़ी फार्मा कंपनियों में शामिल कर दिया। आज कंपनी 40 से ज्यादा देशों में मौजूद है, 21 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं और हजारों करोड़ का कारोबार करती है। ‘Taxim’ जैसे ब्रांड ने भारतीय फार्मा बाजार में नया इतिहास रचा।
Nutanix: पटना के धीरज पांडेय का सिलिकॉन वैली कमाल
धीरज पांडेय ने Nutanix के जरिए एंटरप्राइज क्लाउड कंप्युटिंग में क्रांति ला दी। हाइपर-कन्वर्ज्ड इंफ्रास्ट्रक्चर (HCI) मॉडल के जरिए कंपनी ने IT सिस्टम को सरल बनाया। 2016 में NASDAQ लिस्टिंग के बाद कंपनी अरबों डॉलर वैल्यू तक पहुंच गई और आज भी वैश्विक टेक इंडस्ट्री में बड़ा नाम है।
Tiger Analytics: AI में बिहार का ग्लोबल पावर
भागलपुर से जुड़े महेश कुमार ने Tiger Analytics को डेटा और AI का ग्लोबल लीडर बनाया। कंपनी 5 महाद्वीपों में मौजूद है और Fortune 1000 कंपनियों को सेवाएं देती है। खास बात यह है कि कंपनी बिहार में AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी विकसित कर रही है, जिससे राज्य में टेक इकोसिस्टम मजबूत हो रहा है।
DeHaat: बिहार से निकला एग्रीटेक यूनिकॉर्न मॉडल
छपरा के शशांक कुमार ने DeHaat की शुरुआत किसानों की समस्याओं को हल करने के लिए की। आज यह प्लेटफॉर्म 10 लाख से ज्यादा किसानों को सेवाएं दे रहा है और बीज से लेकर बाजार तक एंड-टू-एंड समाधान देता है। एग्रीटेक में यह भारत के सबसे तेजी से बढ़ते मॉडल्स में शामिल है।
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बिहार की नई पहचान: “ब्रेन ड्रेन” से “ब्रेन गेन”
बिहार का औद्योगिक इतिहास चुनौतियों से भरा रहा, खासकर 2000 में झारखंड अलग होने के बाद। लेकिन संसाधनों की कमी ने यहां के युवाओं को “बौद्धिक पूंजी” में बदल दिया। आज वही प्रतिभा वैश्विक कंपनियां बना रही है और धीरे-धीरे राज्य में निवेश और स्टार्टअप इकोसिस्टम भी लौट रहा है।
