Explainer: 2008 का मार्केट क्रैश प्रेडिक्ट करने वाले माइकल बरी ने क्यों कहा, 'वेनेजुएला के झटके को समझ नहीं पा रहा बाजार'
2008 की ग्लोबल मंदी से पहले ही खतरे की घंटी बजाने वाले निवेशक माइकल बरी का मानना है कि वेनेजुएला को लेकर अमेरिका की हालिया कार्रवाई को बाजार सही तरीके से समझ ही नहीं पा रहा है। बरी के मुताबिक, यह सिर्फ एक राजनीतिक या क्षेत्रीय घटना नहीं, बल्कि ग्लोबल पावर, तेल बाजार और जियोपॉलिटिक्स में बड़ा बदलाव है, जिसका असर मिड और लॉन्ग टर्म में दिखेगा। शांत बाजार रिएक्शन को बरी इसी वजह से सबसे बड़ा खतरा मानते हैं।
- Authored by: यतींद्र लवानिया
- Updated Jan 7, 2026, 11:13 AM IST
USA-Venezuela के मामले को हर कोई अपने नजरिये से समझने और समझाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका ने जहां इसे ड्रग्स, अपराध और अवैध शरणार्थियों के मुद्दे को आधार पर बनाकर दुनिया के सामने पेश किया। लेकिन, पूरी दुनिया ने इसे अमेरिका की तरफ से डॉलर के वर्चस्व को कायम रखने के लिए किया गया शक्ति प्रदर्शन समझा है। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि इस घटना का दुनियाभर के शेयर बाजारों पर खास असर नहीं हुआ। अमेरिकी बाजार के ज्यादातर बेंचमार्क इंडेक्स इस बदलाव से खुश हैं, जाहिर तौर पर यह एनर्जी सेक्टर पर अमेरिकी दखल और वर्चस्व को पॉजिटिव संकेत की तरह है, जिसका फायदा अमेरिकी कंपनियों को मिलना है।
वहीं, यूरोप, भारत और चीन सहित तमाम एशियाई बाजारों में भी इसका कोई व्यापक निगेटिव असर नहीं दिखा है। बल्कि, Venezuela Share Market तो पिछले दो दिन से जबरदस्त रैली मोड में है। Venezuela के शेयर बाजार को बेंचमार्क IBC Index पिछले दो दिन में करीब 90% की उड़ान भर चुका है। इस इंडेक्स में वेनेजुएला की 15 सबसे बड़ी कंपनियां शामिल हैं।
दुनिया के ज्यादातर एनर्जी मार्केट एनालिस्ट भी इसे ग्लोबल ऑयल सप्लाई के लिहाज से एक पॉजिटिव संकेत मान रहे हैं। क्योंकि, वेनेजुएला के तेल पर अमेरिकी कब्जे का मतलब होगा कि अब यह तेल सहज ढंग से अंतरराष्ट्रीय बाजार में आएगा, जिससे सप्लाई में स्थिरता आएगी। SBI Research की एक रिपोर्ट में तो यहां तक अनुमान जताया गया है कि इस साल जून तक क्रूड के दाम 50 डॉलर प्रति बैरल तक गिर सकते हैं और कीमतों का यह बदलाव स्थायी होगा।
बहरहाल, 2008 की ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस से पहले ही अलार्म बजाने वाले मशहूर निवेशक माइकल बरी (Michael Burry) इन आकलनों से दूर एक अलग एंगल पर बात करते दिख रहे हैं। बरी का मानना है कि वेनेजुएला पर अमेरिका की हालिया कार्रवाई को ग्लोबल मार्केट्स बेहद हल्के में ले रहे हैं। बरी के मुताबिक, यह कोई तात्कालिक खबर नहीं, बल्कि मिड और लॉन्ग टर्म में ग्लोबल पावर, तेल बाजार और जियोपॉलिटिक्स को बदल देने वाला झटका है, जिसे अभी सही तरह से प्राइस नहीं किया गया है।
बाजार की शांति खतरा क्यों?
वेनेजुएला घटनाक्रम के बाद भी कच्चे तेल की कीमतों में मामूली हलचल दिखी और अमेरिकी शेयर बाजार मजबूत खुले। माइकल बरी कहते हैं कि यही “जम्हाई लेता बाजार” असली समस्या है। निवेशक तुरंत असर देखने के आदी हैं, जबकि इस घटना का प्रभाव धीरे-धीरे, परत-दर-परत सामने आएगा।
‘पावर मूव’ देर से आएगा समझ
वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े सिद्ध तेल भंडार वाला देश है। सालों के प्रतिबंध और कुप्रबंधन ने उसके उत्पादन को कमजोर किया। बरी के मुताबिक, अमेरिका द्वारा वहां नियंत्रण स्थापित करना यह संकेत देता है कि वॉशिंगटन अब ऊर्जा संसाधनों को सीधे रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। राष्ट्रपति Donald Trump का यह कहना कि 'फिलहाल वेनेजुएला को अमेरिका चलाएगा' और राष्ट्रपति Nicolas Maduro की गिरफ्तारी, इस बदलाव को और स्पष्ट करती है।
चीन के लिए बड़ी चेतावनी
माइकल बरी का कहना है कि यह घटनाक्रम चीन के लिए एक साफ चेतावनी है। चीन ने पिछले डेढ़ दशक में वेनेजुएला में बड़े पैमाने पर निवेश किया है, जिनका आधार भविष्य के तेल उत्पादन पर टिका था। बरी के मुताबिक, अब वही तेल अमेरिकी प्रभाव में आ गया है। यही वजह है कि बरी मानते हैं कि चीन से जुड़े एसेट्स और शेयरों में जियोपॉलिटिकल रिस्क अभी पूरी तरह प्राइस-इन नहीं हुआ है। तनाव बढ़ने की स्थिति में चीनी शेयरों में उतार-चढ़ाव तेज हो सकता है।
फायदे में होंगी ये अमेरिकी कंपनियां
माइकल बरी के आकलन के मुताबिक, वेनेजुएला के जर्जर तेल सेक्टर को दोबारा खड़ा करने के लिए बड़े पैमाने पर टेक्नोलॉजी और सर्विस की जरूरत होगी। इसका सीधा फायदा अमेरिकी ऑयल-सर्विस कंपनियों को मिल सकता है, जिनमें Halliburton, Schlumberger और Baker Hughes शामिल हैं।
रूस की ताकत होगी कमजोर
अगर वेनेजुएला का तेल अमेरिकी निगरानी में वैश्विक बाजार में लौटता है, तो सप्लाई साइड मजबूत होगी। बरी मानते हैं कि इससे रूस की ऊर्जा-आधारित जियोपॉलिटिकल पकड़ कमजोर पड़ सकती है। उन्होंने लिखा कि अमेरिका ने “कुछ ही पलों में” वह कर दिखाया, जो रूस सालों में नहीं कर पाया।
भारत पर क्या संभावित असर
भारत के लिए सीधा झटका सीमित है, क्योंकि वेनेजुएला से तेल आयात पहले ही बेहद कम रहा है। लेकिन अगर ग्लोबल सप्लाई बढ़ती है तो कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है, जिससे भारत के इंपोर्ट बिल और महंगाई पर राहत मिल सकती है। साथ ही, अमेरिका-चीन तनाव बढ़ने की स्थिति में भारत को अपनी ऊर्जा रणनीति और जियोपॉलिटिकल संतुलन पर नजर रखनी होगी।
माइकल बरी का असली संदेश
माइकल बरी का कहना है कि दुनिया के ज्यादातर शेयर बाजार वेनेजुएला को एक रीजनल पॉलिटिकल इवेंट की तरह देख रहे हैं, जबकि असल में यह एनर्जी और ग्लोबल पावर बैलेंस का बड़ा अहम मोड़ है। इतिहास बताता है कि सबसे बड़ी गलत प्राइसिंग ऐसे ही शांत दौर में होती है। फिलहाल, एनर्जी मार्केट का गेम पूरी तरह बदल चुका है।
देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (Hindi News) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। बिज़नेस (Business News) अपडेट और आज का सोने का भाव (Gold Rate Today), आज की चांदी का रेट (Silver Rate Today) की ताजा समाचार के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से।