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Explained: ये न होते तो भारत कभी न देखता सुपरपावर बनने का सपना, ऐसे बनाया न्यू इंडिया

Tata Group founder Jamsetji Tata 187th birth Anniversary: देश आज टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी टाटा की 187वीं जयंती मना रहा है। 3 मार्च 1839 को नवसारी में जन्मे जमशेदजी ने भारत के औद्योगिक विकास की मजबूत नींव रखी। वे सफल उद्योगपति, दूरदर्शी चिंतक और समाजसेवी थे, जिनके सपनों और प्रयासों ने भारत को औद्योगिक राष्ट्र बनने की दिशा में नई पहचान दिलाई। जिसकी वजह से भारत आज सुपरपावर बनने जा रहा है।

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Jamsetji Tata की 187वीं जयंती: भारत के औद्योगिक युग के महान शिल्पी
Updated Mar 3, 2026, 12:03 IST

Tata Group founder Jamsetji Tata 187th birth Anniversary: टाटा ग्रुप के संस्थापक जमशेदजी टाटा की 187वीं जयंती मनाई जा रही है। 3 मार्च 1839 को गुजरात के नवसारी नगर में जन्मे जमशेदजी ने भारत के औद्योगिक विकास की ऐसी नींव रखी, जिस पर आज का आधुनिक भारत यानी न्यू इंडिया खड़ा है। वे न सिर्फ एक सफल उद्योगपति थे, बल्कि दूरदर्शी विचारक और समाजसेवी भी थे। उनके सपनों ने भारत को औद्योगिक राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ाया। जिसकी बदौलत आज हम 2047 तक विकसित भारत बनने का सपना देख रहे हैं।

साधारण परिवार से असाधारण शुरुआत

जमशेदजी टाटा, नुसरवानजी टाटा के पहले पुत्र थे। उनका परिवार कई पीढ़ियों से पारसी पुजारियों का रहा था, लेकिन उनके पिता नुसरवानजी ने परंपरा से हटकर बिजनेस में अपना भाग्य अजमाया। यही निर्णय कारगर साबित हुआ और आगे चलकर टाटा परिवार की पहचान बना। बचपन में जमशेदजी ने नवसारी में परवरिश पाई। जब वे 14 वर्ष के हुए तो वे अपने पिता के साथ मुंबई आ गए। मुंबई में उन्हें Elphinstone College में दाखिला दिलाया गया। उन्होंने 1858 में ‘ग्रीन स्कॉलर’ के रूप में अपनी पढ़ाई पूरी की, जो उस समय स्नातक के बराबर माना जाता था। कॉलेज की पढ़ाई ने उनके अंदर शिक्षा के प्रति गहरा सम्मान और पढ़ने का शौक पैदा किया। यही कारण था कि आगे चलकर उन्होंने शिक्षा को देश के विकास का सबसे बड़ा साधन माना।

बिजनेस की दुनिया में पहला कदम

पढ़ाई पूरी करने के बाद जमशेदजी ने करीब 9 वर्षों तक अपने पिता के साथ बिजनेस का अनुभव प्राप्त किया। 1868 में 29 वर्ष की आयु में उन्होंने 21,000 रुपये की पूंजी के साथ अपनी खुद की ट्रेडिंग कंपनी शुरू की। यह कदम उनके आत्मविश्वास और दूरदर्शिता का प्रमाण था। इसके बाद बिजनेस के सिलसिले में वे इंग्लैंड गए, जहां उन्होंने कपड़ा उद्योग के बारे में विस्तार से जानकारी हासिल की। वहां की आधुनिक मशीनों और तकनीकों ने उन्हें बहुत प्रभावित किया। भारत लौटकर उन्होंने 1869 में मुंबई के चिंचपोकली इलाके में एक बंद पड़ी तेल मिल को खरीदा। उन्होंने इसका नाम एलेक्जेंड्रा मिल रखा और उसे कपड़ा मिल में बदल दिया। दो साल के भीतर ही उन्होंने इस मिल को अच्छा मुनाफा कमाकर बेच दिया। यह उनकी व्यावसायिक समझ और मैनेजटमें क्षमता का शानदार उदाहरण था।

इस्पात उद्योग का सपना

जमशेदजी का सबसे बड़ा सपना भारत में वर्ल्ड क्लास इस्पात कारखाना स्थापित करना था। यह विचार उन्हें तब आया जब वे मैनचेस्टर में नई मशीनें देखने गए थे। वहां उन्होंने प्रसिद्ध विचारक Thomas Carlyle का एक स्पीच सुनी। उस स्पीच से प्रेरित होकर उन्होंने समझा कि किसी भी देश की असली ताकत उसके इस्पात उद्योग में होती है। 1880 के दशक की शुरुआत तक उन्होंने ठान लिया कि भारत में ऐसा इस्पात प्लांट बनेगा, जो दुनिया के सर्वश्रेष्ठ प्लांट की बराबरी करेगा। हालांकि यह सपना उनके जीवनकाल में पूरा नहीं हो सका, लेकिन बाद में उनके प्रयासों और योजनाओं के आधार पर टाटा स्टील की स्थापना हुई, जिसने भारत को औद्योगिक रूप से मजबूत बनाया।

जमशेदजी टाटा के चार बड़े सपने

जमशेदजी टाटा के जीवन के चार मुख्य लक्ष्य थे, एक आयरन और स्टील कंपनी की स्थापना, एक विश्वस्तरीय शिक्षण संस्थान, एक अनोखा होटल और एक जलविद्युत प्लांट। वे मानते थे कि इन चार क्षेत्रों में विकास से देश आत्मनिर्भर और सशक्त बनेगा। उनके जीवनकाल में केवल एक सपना साकार हो पाया, एक भव्य और आधुनिक होटल का निर्माण किया गया। 3 दिसंबर 1903 को मुंबई के कोलाबा समुद्र तट पर Taj Mahal Palace मुंबई का उद्घाटन हुआ। उस समय यह भारत का पहला ऐसा होटल था, जहां बिजली की सुविधा उपलब्ध थी। यह होटल भारतीय आतिथ्य और आधुनिकता का प्रतीक बना।

शिक्षा और समाज सेवा के प्रति समर्पण

जमशेदजी टाटा का मानना था कि किसी भी देश की उन्नति के लिए शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने तकनीकी शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं बनाई। उनके प्रयासों से आगे चलकर देश में उच्च शिक्षा और शोध संस्थानों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ। वे केवल उद्योगपति नहीं थे, बल्कि समाज के प्रति गहरी जिम्मेदारी निभाने वाले व्यक्ति थे। उन्होंने अपने उद्योगों के जरिये हजारों लोगों को रोजगार दिया और देश के आर्थिक विकास में अहम योगदान दिया।

भारत के औद्योगिक युग के अग्रदूत

जमशेदजी टाटा को भारत के औद्योगिक युग का अग्रदूत कहा जाता है। उन्होंने ऐसे समय में बड़े उद्योगों का सपना देखा, जब भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था और संसाधनों की भारी कमी थी। उनकी दूरदृष्टि, साहस और मेहनत ने भारतीय उद्योग जगत की दिशा बदल दी। आज उनकी 187वीं जयंती पर देश उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि बड़े सपने और मजबूत इरादे किसी भी राष्ट्र की तकदीर बदल सकते हैं। जमशेदजी टाटा का नाम भारतीय इतिहास में हमेशा प्रेरणा के स्रोत के रूप में याद किया जाएगा।

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