घर खरीदना बेहतर या रेंट पर रहना? सालों पुरानी बहस का सही जवाब जानें, इसके बाद कोई कन्फ्यूजन नहीं बचेगा
Buyig vs Renting home: घर खरीदना या किराए पर रहना? इस सवाल से हम सभी का सामना कभी न कभी हुआ होगा। बहुत सारे लोग इस बात को लेकर कन्फ्यूज रहते हैं कि उनको क्या करना चाहिए? आज हम इसका जवाब दे रहे हैं। इसके बाद आप आसानी से फैसला लें पाएंगे।
- Authored by: आलोक कुमार
- Updated Dec 14, 2025, 11:22 AM IST
Buyig vs Renting home: प्रॉपर्टी की कीमत तेजी से बढ़ी है। इसके बाद यह बहस और तेज हो गई है कि घर खरीदने की बजाय किराये पर रहना बेहतर है। आप भी इन दिनों देखें होंगे कि कई फाइनेंशियल इन्फ्लुएंसर लोगों को सलाह दे रहे हैं कि घर खरीदने से बेहतर किराये पर रहना है? वो होम लोन की EMI की जगह म्यूचुअल फंड में SIP करने की सलाह देते दिखाई देते हैं। लेकिन क्या यह सही है? बिल्कुल नहीं! आखिर क्यों? आइए आपको समझाते हैं।
हर साल कम से कम 10% रेंट बढ़ता है-
अगर आप आर्थिक रूप से सक्षम हैं तो हमेशा घर खरीदना एक बेहतर विकल्प और फायदे का सौदा होगा। इसके पीछे सिंपल गणित है कि समय के साथ होम लोन ईएमआई घटती है और फ्लैट का रेंट बढ़ता चला जाता है। नोएडा एक्सटेंशन में रहने वाले मुकेश कुमार झा बताते हैं कि 2020 में वो जिस 2बीएचके फ्लैट का किराया 10 हजार रुपये दे रहे थे, अब बढ़कर 20 हजार के करीब हो गया है। यानी 5 साल में डबल किराया हो गया है। मकान मालिक कम से कम 10% रेंट में इजाफा हर साल करते हैं। अगर आप मकान मालिक की बात नहीं मानते तो वो फ्लैट खाली करने को कहते हैं। ये हाल सिर्फ नोएडा एक्सटेंशन में नहीं है। देश के किसी भी शहर में जाएंगे तो किराया तेजी से बढ़ा है। इससे लोग परेशान हैं। गुरुग्राम या बेंगलुरु में किराया लाखों रुपये में पहुंच गया है।
समय के साथ EMI घटती चली जाती है-
दिग्गज रियल एस्टेट एक्सपर्ट और अंतरिक्ष इंडिया के सीएमडी राकेश यादव बताते हैं कि होम लोन लेकर घर खरीदना हमेशा फायदे का सौदा है। आपकी ईएमआई समय के साथ घटती है, कभी बढ़ती नहीं। वहीं अगले 20 या 25 साल तक ईएमआई में कोई इजाफा नहीं होता है। लोन की रकम कम होने के साथ आपकी ईएमआई कम होती चली जाती है। इसके उलट रेंट में हर साल इजाफा होता है। इतना ही नहीं, समय के साथ आपकी प्रॉपर्टी की कीमत भी बढ़ती है। इसलिए अगर आप 20 साल का कैलकुलशन निकालेंगे कि आपने कितना रेंट दिया और कितनी ईएमआई। साथ ही आपकी प्रॉपर्टी की कीमत कितनी बढ़ गई तो आप देखेंगे कि घर खरीदना आपको फायदे का सौदा रहेगा।
इसलिए मेरा कहना है कि आप अपनी इनकम के अनुसार छोटे साइट का ही फ्लैट खरीदें लेकिन यह काम नौकरी शुरू करने के साथ कर लें। अगर आप ऐसा करेंगे तो बाद में वह बड़ी पूंजी हो जाएगी। उसे बेचकर आप आसानी से बड़ा घर खरीद पाएंगे। लेकिन बहुत सारे लोग यह नहीं करते। वो बड़े घर की चाह में छोटा घर भी नहीं खरीद पाते हैं। यह गलती आप नहीं करें। अपनी इनकम के अनुसार, डेवलप हो रहे एरिया में घर जरूर खरीद लें। एक बार हमेशा याद रखें कि घर खरीदने से पहले वो हमेशा महंगा लगता है। जब आप घर खरीद लेते हैं तो वो सस्ती लगने लगती है।
एक उदाहरण से समझें
मान लेते हैं कि मोहन कुमार ने 60 लाख में 2बीएचके फ्लैट खरीदा है। उन्होंने डाउन पेमंट करने के बाद 45 लाख का होम लोन लिया, जिसकी ईएमआई 41 रुपये मंथली अभी आ रही है। वहीं दूसरी ओर सोहन यादव एक 2बीएचके फ्लैट किसी अच्छे एरिया में 35000 रुपये के रेंट पर ले रखा है। अब आगे कैलकुलेशन देखते हैं।
| पैरामीटर | घर (EMI) | किराया (सालाना 10% बढ़ोतरी शामिल नहीं) |
|---|
| मासिक खर्च | ₹41,000 | ₹35,000 |
| 20 साल का कुल खर्च | ₹41,000 × 12 × 20 = ₹98.4 लाख | ₹35,000 × 12 × 20 = ₹84 लाख |
| प्रॉपर्टी की कीमत | ₹50 लाख (2015) → ₹80 लाख (2025) | 0 |
| इनकम टैक्स छूट | लगभग ₹3.5 लाख/साल (80C + 24b) | 0 |
| नेट लाभ/सुरक्षा | संपत्ति + कर लाभ | केवल खर्च, कोई संपत्ति नहीं |
कब रेंट पर रहना बेहतर है?
रियल एस्टेट एक्सपर्ट के अनुसार, अगर आप करियर के शुरुआती दौर में हैं, नौकरी के चलते बार-बार शहर बदलना होगा या अभी डाउन पेमेंट के लिए पैसे नहीं है तो रेंट पर रहना बेहतर हो सकता है। ऐसे व्यक्ति जिनका जॉब अनस्टेबल है, उन्हें मकान खरीदने से बचना चाहिए। उनके लिए किराये का मकान ही बेहतर है। हां, जब आप किसी शहर में सेट होने की सोचे तो घर खरीदना फायदे का सौदा होगा।
घर खरीदना या रेंट पर रहना फायदेमंद?
घर खरीदने के 4 बड़े फायदे
- प्रॉपर्टी की कीमत में वृद्धि का फायदा: उदाहरण के लिए, दिल्ली‑एनसीआर या मुंबई जैसी महानगरों में, 10 साल पहले खरीदा गया फ्लैट आज कम से कम 50–80% तक महंगा हो चुका है।
- स्थिर मंथली भुगतान (EMI vs Rent): घर खरीदते पर होम लोन की EMI भरते हैं। शुरू में यह रेंट के बराबर या थोड़ा ज्यादा लग सकता है, लेकिन समय के साथ आपका EMI स्थिर रहता है, जबकि रेंट लगातार बढ़ता है।
- टैक्स छूट का लाभ: घर खरीदने पर धारा 80C के तहत होम लोन की प्रिंसिपल राशि पर टैक्स कटौती (₹1.5 लाख तक) और धारा 24(b) के तहत होम लोन के इंटरेस्ट पर टैक्स कटौती (₹2 लाख तक) की छूट मिलती है।
- भावनात्मक और मानसिक सुरक्षा: घर सिर्फ एक निवेश नहीं, बल्कि मानसिक सुरक्षा और स्थायित्व भी देता है।
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