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भारतीय परिवारों के पास देश की GDP से ज्यादा सोना, क्यों है यह संकट का ‘गोल्डन सेफ्टी नेट’? समझें आंकड़ों में छिपी बड़ी तस्वीर

भारत कभी सोने की चिड़ियां कहा जाता था। इसी सोने की चिड़िया को लूटने के लिए मुसलमान राजाओं और पश्चिमी देशों द्वारा कई बार आक्रमण किया गया और लूटा गया। लेकिन सही मायने में आज भी भारत सोने की चिड़िया है। यह भारतीय के पास घरों में रखे हजारों टन सोने के कारण है।

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भारतीय परिवारों के पास सोने का विशाल भंडार

सोना रोज नया रिकॉर्ड बना रहा है। आज MCX पर सोने का भाव 1,47,745 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गया है। पिछले एक साल में सोने की कीमत में करीब 85% की तेजी आई है। वहीं 2 साल की अवधि में 131% का उछाल आया है। सोने में यह तेजी दुनियाभर के देशों की ओर से लगातार की जा रही खरीदारी के कारण है। बदलते वैश्विक हालात में अमेरिकी डॉलर की जगह सोने की मांग बढ़ी है। सोना एक ऐसी वैश्विक करेंसी है जिसका इस्तेमाल ट्रेड से लेकर लोन लेने में आसानी से किया जा सकता है। आम लोगों के लिए तो सोना ऑल-इन-वन इंश्योरेंस है जो उनके हर संकट में साथी है।

कोरोना महामारी के वक्त जब लोगों की नौकरियां छूट गई, कारोबार ठप पड़ गए है तो सोने ने सहारा दिया। लाखों की संख्या में लोगों ने गोल्ड लोन लेकर अपना खर्च चलाया। शायद, यही कारण है कि भारतीयों में सोने के प्रति आकर्षण सदियों से है। आज हम भारत की उसी ताकत के बारे में बता रहे हैं जो करोड़ों भारतीय परिवारों के घरों में बंद है। कैसे घरों में पड़ा सोना, भारत के लिए ‘गोल्डन सेफ्टी नेट’ के तौर पर काम करता है। आइए इस सुरक्षा कवच की पूरी कहानी आपको समझाते हैं।

भारतीय परिवारों के पास 25,000–30,000 टन सोना

विश्व गोल्ड काउंसिल (WGC) और मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्टों के अनुसार भारतीय परिवारों के पास लगभग 25,000 से 34,600 टन सोना जमा है, जो दुनिया में निजी तौर पर रखे गए सोने के सबसे बड़े भंडारों में से एक है। मौजूदा कीमतों पर इसकी कुल कीमत लगभग ₹441 लाख करोड़ बैठती है। यानी घरों रखे सोने की कीमत भारत की कुल जीडीपी से अधिक है। इससे साफ है कि भारत में घरों की संपत्ति में सोना सबसे अहम हिस्सों में से एक है। यही वजह है कि सोना आज भी भारतीय संस्कृति, बचत और निवेश में केंद्रीय भूमिका निभाता है।

सोना क्यों है खास?

  1. भारतीय परिवारों के पास लगभग 25,000 से 30,000 टन सोना है, जो दुनिया में किसी भी देश के केंद्रीय बैंक के भंडार से अधिक है। अगर 30,000 टन सोने की कीमत (आज के रेट पर) पर देखें तो यह ₹441 लाख करोड़ हुई।
  2. सोना भू-राजनीतिक जोखिम, महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता के समय एक सुरक्षित संपत्ति के रूप में कार्य करता है।
  3. संकट के समय लोग सोना बेचने के बजाय गिरवी रखकर लोन लेना पसंद करते हैं। यह दर्शाता है कि इसे अंतिम सहारे के तौर पर रखा जाता है।

वेल्थ क्रिएशन में सबसे आगे सोना

साल 2011 से 2025 के बीच भारत ने बहुत बड़ी मात्रा में सोने का आयात (इंपोर्ट) किया। शुरुआत में इस आयात की वजह से देश के व्यापार घाटे (ट्रेड डेफिसिट) पर दबाव पड़ा, लेकिन आज उन गोल्ड होल्डिंग्स की डॉलर में कीमत बहुत जबरदस्त तरीके से बढ़ गई है। मौजूदा कीमतों (करीब 4,711.50 डॉलर प्रति औंस) पर है। यह इस अवधि में आयात किए गए सोने की कीमत में 200% की बढ़ोतरी है। इससे सोने में निवेश करने वाले निवेशकों को जबरदस्त रिटर्न मिला है।

सोने की कीमत में हुआ यह इजाफा भारत के वर्तमान विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) से भी अधिक है। यह दिखाता है कि सोना, किसी की दौलत को सुरक्षित रखने और बढ़ाने का कितना बड़ा जरिया है। 2011 के बाद से भारत द्वारा आयात किए गए सोने की मौजूदा कुल कीमत करीब 1.6 ट्रिलियन डॉलर (1.6 लाख करोड़ डॉलर) तक पहुंच चुकी है। सिर्फ 2024 में जो सोना 52 बिलियन डॉलर में खरीदा गया था, उसकी कीमत अब बढ़कर 108 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गई है।

यह साफ तौर पर बताता है कि सोना लंबे समय तक दौलत बनाने की जबरदस्त क्षमता रखता है। हैरानी की बात यह है कि उस दौर में कई बाजार विशेषज्ञ सोने की खरीद से फॉरेक्स रिजर्व और ट्रेड डेफिसिट पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंतित थे, लेकिन वे यह नहीं समझ पाए कि यह सोना आगे चलकर इतनी बड़ी वेल्थ क्रिएशन करेगा।

Household Gold

घरों में सोना

संकट में ‘गोल्डन सेफ्टी नेट’ कैसे?

भारत के पास सोने का इतना बड़ा भंडार है जो भारतीय परिवारों और संस्थानों के लिए आर्थिक सुरक्षा की एक मजबूत दीवार की तरह काम करता है। इसे ऐसे समझते हैं कि अगर वैश्विक मंदी, बैंकिंग संकट या बाजार गिरावट जैसी स्थितियां आती हैं तो लोग अपने जमा सोने को गिरवी रखकर आसानी से लोन ले सकते हैं।

GDP के संदर्भ में मोटा सुरक्षा कवच

जब एक संपत्ति का मूल्य लगभग GDP के बराबर हो जाता है, तो इसका अर्थ यह होता है कि आम लोगों की कुल बचत और संपत्ति पारंपरिक वित्तीय रिजर्व्स से कहीं अधिक है। अगर बैंकिंग प्रणाली या निवेश बाजार अस्थिर हो जाए तो यह एक तरह से आर्थिक बैकअप प्लान का काम करता है।

भारतीय घरों में जमा करोड़ों टन सोना सिर्फ एक पारंपरिक निवेश साधन नहीं है। यह एक आर्थिक सुरक्षा ढाल है, जिसका मूल्य कई ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। यह सोना न सिर्फ घरेलू संपत्ति का बड़ा हिस्सा है, बल्कि संकट के समय में आर्थिक बैकअप की भूमिका भी निभा सकता है। इसका मूल्य भारत की GDP के करीब या उसके आसपास है, जो वैश्विक स्तर पर भी एक अनूठी संपत्ति स्थिति को दर्शाता है।

भारत की ताकत उसके अंदर

पहली नजर में, भारत एक अमीर देश नहीं लग सकता है, लेकिन यह छिपा हुआ सोने का खजाना एक अलग कहानी बताता है। जहां सेंट्रल बैंक के पास सिर्फ 880 टन सोना है, वहीं भारत के लोगों के पास कुल मिलाकर करीब 30,000 टन सोना है, जो देश के भविष्य के लिए एक बहुत बड़ी संपत्ति है। वहीं, 180 से ज्यादा देशों के सेंट्रल बैंकों के पास कुल मिलाकर लगभग 46,000 टन सोना है। इस लिस्ट में अमेरिका 8,000 टन के साथ सबसे ऊपर है, उसके बाद जर्मनी 3,300 टन के साथ, और इटली और फ्रांस दोनों के पास 2,400 टन सोना है। रूस, चीन, स्विट्जरलैंड, भारत, जापान और नीदरलैंड टॉप दस देशों में शामिल हैं। हालांकि किसी भी सेंट्रल बैंक के पास भारतीय घरों में रखे सोने की तुलना में बहुत कम सोना है।

महिलाओं के दिलों पर हमेशा गोल्ड का ही राज

अर्थ भारत इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स आईएफएससी एलएलपी के मैनेजिंग पार्टनर, सचिन सावरिकर कहते हैं कि भारतीय महिलाओं के दिलों पर हमेशा से सोने (गोल्ड) का ही राज रहा है। सोना सिर्फ गहने के तौर पर पहनने या सामाजिक हैसियत दिखाने का साधन नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा एसेट क्लास है, जिसकी कीमत समय के साथ घटती नहीं, जिस तरह से महंगी कार या नया आईफोन मॉडल की कीमत समय के साथ कम होती है। इसी वजह से सोने ने भारतीय परिवारों की संपत्ति बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है।

2025 के बाद 2026 में भी जबरदस्त प्रदर्शन की उम्मीद

2025 में सोने ने जबरदस्त प्रदर्शन किया। इसकी बड़ी वजहें रहीं जियो-पॉलिटिकल टेंशन, बढ़ती महंगाई को लेकर चिंता और केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी। भारतीय निवेशकों के लिए यह साल खास तौर पर फायदेमंद रहा, क्योंकि सोने की कीमतों में तेज उछाल आया और एक बार फिर यह साबित हुआ कि सोना सुरक्षित निवेश और दौलत बचाने का भरोसेमंद जरिया है। ग्लोबल स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता ने सोने को सपोर्ट दिया, वहीं भारत में त्योहारों, शादियों और निवेश की लगातार मांग ने इसकी तेजी को बनाए रखा। 2026 की शुरुआत से सोने का भविष्य अच्छा दिख रहा है।

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