GDP
वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया में तेजी से बढ़ रही है। रियल जीडीपी ग्रोथ के मामले में भारत, चीन, इंडोनेशिया, जापान, फ्रांस, जर्मनी जैसे देशों से आगे हैं। अब मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार 4,000 अरब अमेरिकी डॉलर के आंकड़े को पार कर जाएगा। उन्होंने कहा कि भूराजनीति में ‘बहुत ज़्यादा उतार-चढ़ाव’ के साथ, वैश्विक व्यवस्था में भारत की जगह बनाए रखने के लिए आर्थिक वृद्धि बहुत जरूरी है।
भारत अभी करीब 3,900 अरब डॉलर के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के साथ दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। नागेश्वरन ने मंगलवार को आईवीसीए ग्रीन रिटर्न्स समिट-2025 को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मार्च, 2025 के अंत में 3,900 अरब डॉलर थी और चालू वित्त वर्ष में यह पहले ही 4,000 अरब डॉलर के आंकड़े को पार करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि इसलिए अर्थव्यवस्था को हरित बनाने के लिए हमें ऊर्जा बदलाव, पर्यावरण या जलवायु परिवर्तन या जलवायु उतार-चढ़ाव से निपटना होगा। इसीलिए हम एक देश के रूप में 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था के 6.5 प्रतिशत और अगले वित्त वर्ष 2026-27 में 6.7 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान व्यक्त किया है। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि कर कटौती और मौद्रिक नीति में ढील से उपभोग आधारित वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा। भारत का वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) चालू वित्त वर्ष की अप्रैल से जून अवधि में पांच तिमाहियों में सबसे तेज 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) के जीडीपी वृद्धि अनुमानों के आधिकारिक आंकड़े 28 नवंबर को जारी होने वाले हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है जो गत वित्त वर्ष 2024-25 की 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर से बेहतर है।