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India-US ट्रेड डील Explained: भारत में कौन-कौन से अमेरिकी प्रोडक्ट होंगे सस्ते? निर्यातकों को कितना लाभ

India-US trade dea: भारत और अमेरिका के बीच अब सबकुछ ठीक हो गया है। दोनों देशों ने अन्तरिम ट्रेड डील पर मुहर लगा दी है। इससे एक ओर भारतीय निर्यातकों को अमेरिका में बड़ा बाजार मिलेगा। वहीं, दूसरी ओर कई भारतीय उपभोक्ताओं को कम कीमत में अब अमेरिकी सामान मिलेंगे।

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भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील
Updated Feb 7, 2026, 08:45 IST

India-US trade deal: भारत और अमेरिका के बीच आखिरकार सबकुछ ठीक हो गया है। दोनों देशों के बीच लंबी बातचीत के बाद ट्रेड डील पर मुहर लग गई है। इसकी आधिकारिक घोषणा शुक्रवार को की गई। इसके तहत अमेरिका ने भारत पर लगाए हुए 50% टैरिफ को घटाकर 18% कर दिया है। वहीं, भारत भी इस डील के अंतर्गत अमेरिकी सामान पर टैक्स घटाएगा। इतना ही नहीं, दोनों देशों ने एनर्जी सेक्टर में अपने संबंधों को मजबूत करने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने का भी ऐलान किया है। इस ट्रेड डील के बाद साफ हो गया है कि बहुत सारे अमेरिकी सामान भारत में सस्ते होंगे। वहीं, भारतीय निर्यातकों को अमेरिका में पकड़ मजबूत होगी। आइए समझने की कोशिश करते हैं कि इस ट्रेड डील से कौन-कौन अमेरिकी सामान भारत में सस्ते होंगे और भारतीय निर्यातकों को अब अमेरिका में क्या फायदा मिलेगा?

भारत-अमेरिका ट्रेड डील के अहम बिंदु

भारत और अमेरिका के बीच हुए ट्रेड डील खास व्यापार प्रतिबद्धताएं प्रदान करता है। इस ट्रेड डील के तहत भारत पांच सालों में 500 अरब डॉलर का अमेरिकी सामान खरीदने पर सहमत हुआ है, जिसमें तेल, गैस, कोकिंग कोयला, विमान और विमान के पुर्जे, कीमती धातुएं, और AI और अन्य डेटा सेंटर एप्लीकेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट जैसे टेक्नोलॉजी उत्पाद शामिल हैं। भारत अमेरिका के कई तरह के इंडस्ट्रियल और एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट्स पर टैरिफ कम करेगा या खत्म कर देगा, जिसमें सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन, लाल ज्वार, ट्री नट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स शामिल हैं। बयान के अनुसार, दोनों देश सहमत फ्रेमवर्क को लागू करने के लिए तेज़ी से आगे बढ़ेंगे और अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करेंगे, जिसका लक्ष्य सहमत रोडमैप के अनुसार एक व्यापक और आपसी फ़ायदे वाला BTA पूरा करना है।

अब भारतीय निर्यातकों को 18% टैरिफ देना होगा

अमेरिका ने ट्रेड डील के तहत 50% टैरिफ को घटाकर 18% कर दिया है। यानी भारतीय निर्यातकों को अब अमेरिका में सामान बेचने के लिए 18% टैरिफ देना होगा जिसमें टेक्सटाइल, कपड़े, चमड़ा, जूते, प्लास्टिक, ऑर्गेनिक केमिकल, होम डेकोर, कारीगरी का सामान और कुछ मशीनरी शामिल हैं। भारत को कुछ एयरक्राफ्ट और एयरक्राफ्ट पार्ट्स पर भी टैरिफ में राहत मिलेगी, साथ ही ऑटो पार्ट्स इंपोर्ट के लिए कम टैरिफ कोटा भी मिलेगा। जेनेरिक फार्मास्यूटिकल्स और उनके इंग्रीडिएंट्स के नतीजे अमेरिका की चल रही टैरिफ जांच के आधार पर तय किए जाएंगे।

कौन-कौन से अमेरिकी सामान सस्ते होंगे

  • इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई-टेक प्रोडक्ट्स जैसे लैपटॉप, बादाम, अखरोट,सोयाबीन तेल, शराब, सेब और प्रोसेस्ड फूड, मोबाइल फोन और गैजेट्स
  • सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट, इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रॉनिक्स और मेडिकल डिवाइसेज
  • क्रूड ऑयल और LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस)
  • एयरक्राफ्ट पार्ट्स, डिफेंस टेक्नोलॉजी
  • पॉलीथीन, पॉलीप्रोपीलीन, पीवीसी जैसे प्लास्टिक पॉलिमर।

भारतीय निर्यातकों को अब होंगे ये फायदे

भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिका सबसे बड़ा बाजार है। हर साल भारतीय निर्यातक अमेरिका को 30 खरब डॉलर से अधिक का निर्यात करते हैं। अब टैरिफ 18% होने से इन सेक्टर के निर्यातकों को सबसे अधिक फायदा मिलेगा।

कपड़ा और परिधान: इस सेक्टर के निर्यातकों को सबसे अधिक फायदा मिलेगा। अमेरिका भारत के कुल कपड़ा निर्यात का 28% है। 18% का नया शुल्क बांग्लादेश पर लगने वाले 20% शुल्क से भी कम है, जिससे आर्डर फिर से भारत लौटने की उम्मीद है।

रत्न और आभूषण: भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिका इस क्षेत्र का सबसे बड़ा बाजार है। टैरिफ कम होने से अमेरिकी खुदरा विक्रेताओं की (इन्वेंट्री) लागत घटेगी और भारतीय हीरे के आभूषण कारोबारियों को फायदा मिलेगा।

सी फूड और चमड़ा: भारत से बड़े फैमाने पर अमेरिका में सी फूड और झींगा का निर्यात होता है। अमेरिकी टैरिफ बढ़ने से इस सेक्टर के निर्यातकों को बड़ा नुकसान हो रहा था। अब टैरिफ घटने से समुद्री उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

यहां नहीं मिली राहत

अमेरिका से ट्रेड डील जरूर हो गया है लेनिक अमेरिकी व्यापार विस्तार अधिनियम की धारा 232 के तहत स्टील, एल्युमीनियम और तांबे जैसे उत्पादों पर 50% का उच्च टैरिफ अभी भी लागू रहेगा। ये क्षेत्र भारत के कुल निर्यात का एक बड़ा हिस्सा हैं और उन्हें इस सौदे से तत्काल राहत नहीं मिलेगी। हालांकि, एक्सपर्ट का कहना है कि यह ट्रेड डील भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। इससे अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यात, विशेष रूप से श्रम प्रधान उद्योगों जैसे कपड़ा और आभूषण की प्रतिस्पर्धात्मकता में तत्काल फायदा मिलेगा। साथ ही, भारतीय उपभोक्ताओं को अमेरिकी सामान कम कीमत पर मिल सकेंगे।

India-US Trade Deal

India-US Trade Deal

इंडियन इकोनॉमी की रफ्तार होगी तेजी

अमेरिका ट्रेड डील से अब भारतीय उत्पादों की अमेरिकी बाजार तक बेहतर पहुंच होगी। कम टैरिफ, आसान अप्रूवल और तेज कस्टम क्लियरेंस से निर्यातकों को फायदा मिलेगा। इससे भारत के सबसे बड़े IT और सर्विस सेक्टर को बूस्ट मिलेगा। IT सर्विसेज देने वाली कंपनियों को हाल के दिनों में परेशानी बढ़ गई थी। अब इस डील के बाद उनको अमेरिका में काम करना आसान होगा। इतना ही मैन्युफैक्चरिंग एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिलेगा जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो कंपोनेंट्स, फार्मा और टेक्सटाइल कंपनियों को फायदा मिलेगा। छोटे और मझोले निर्यातकों के लिए यह डील राहत लेकर आया है। उनके लिए लॉजिस्टिक्स आसान होगा और अमेरिकी मार्केट एक्सेस करना बेहतर होगा। इस डील के बाद ऑर्डर साइज बढ़ने की संभावना है।

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