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Hormuz Mystery Decoded: होर्मुज को अमेरिका क्यों नहीं जीत पाया, ईरान ने कैसे बनाया सबसे बड़ा हथियार?

होर्मूज जलडमरूमध्य जिसकी चौड़ाई महज 33 किलोमीटर है लेकिन यह US की नाक में दम किए हुए है। युद्धपोत, पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान और सबसे आधुनिक तकनीक होने के बावजूद अमेरिका इस पर कब्जा नहीं कर पाया है।

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होर्मूज जलडमरूमध्य
Authored by: Alok Kumar
Updated Apr 21, 2026, 10:24 IST

Hormuz Mystery Decoded: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग शुरू हुए दो महीने होने वाले हैं। इस बीच 2 हफ्ते का सीजफायर का ऐलान भी हुआ, जो 22 अप्रैल को खत्म हो रहा है। हालांकि, सीजफायर के बीच ही अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है। इसके चलते ईरान ने एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही को रोक दिया है। ईरान ने अमेरिकी नाकेबंदी के विरोध में ऐसा किया है। इससे कच्चे तेल की कीमत में उछाल आया है। कच्चे तेल की आग से पूरी दुनिया झुलस रही है।

दूसरी ओर, अमेरिका तमाम कोशिशों और नाकेबंदी के बावजूद होर्मुज को खोल नहीं पाया है। आखिर, होर्मूज में ऐसा क्या है जिसे अमेरिका जैसा सुपरपावर इस छोटे से समुद्री मार्ग पर कब्जा नहीं कर पा रहा है? दूसरी ओर कैसे ईरान इस युद्ध में होर्मूज को अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। आइए समझते हैं कि अमेरिका के लिए होर्मूज कैसे तिलिस्म बना हुआ है और पेंटागन चाह कर भी क्यों कुछ नहीं कर पा रहा है?

होर्मुज का चक्रव्यूह: भूगोल बना Iran का 'अजेय' हथियार

1. संकरा और उथला रास्ता: समुद्र में गहरे पानी का रास्ता इतना संकरा (सिर्फ 2-2 मील की दो गलियां) और उथला है कि विशाल जहाजों के पास बचने के लिए कोई जगह नहीं बचती। वे यहां 'सिटिंग डक' यानी आसान निशाना बन जाते हैं।

2. मजबूरी की कतार: शांति के समय भी यहां जहाजों की लंबी कतार लगी रहती है। एक साथ झुंड में खड़े ये जहाज दुश्मन के लिए हमला करना बेहद आसान बना देते हैं।

3. समुद्री सुरंगों (Mines) का खौफ: उथला पानी होने के कारण ईरान यहां आसानी से 'सी-माइन्स' बिछा देता है। इसके डर से जहाजों को मुख्य रास्ता छोड़कर ईरान के बताए वैकल्पिक रास्तों (जैसे लारक द्वीप) से गुजरना पड़ता है, जहां ईरान उनसे वसूली और जांच करता है।

4. प्राकृतिक छिपने की जगह: ईरान की ऊबड़-खाबड़ तटरेखा (Coastline) छोटी हमलावर नावों को छिपने के लिए सुरक्षित ठिकाने देती है, जहां से वे अचानक हमला कर गायब हो सकती हैं।

5. ऊंचाई का फायदा: ईरान के ऊंचे तटीय इलाके उसे पूरे समुद्र पर निगरानी रखने और सटीक मिसाइलें दागने के लिए बेहतरीन लोकेशन देते हैं।

6. द्वीपों का रणनीतिक उपयोग: होर्मुज के मुहाने पर स्थित छोटे द्वीप ईरान के लिए 'अदृश्य मिसाइल अड्डों' की तरह काम करते हैं।

7. बंदर अब्बास का नियंत्रण: इस प्रमुख शहर की नजदीकी के कारण ईरान की सेना महज कुछ ही मिनटों के भीतर पूरे समुद्री ट्रैफिक को ठप करने की ताकत रखती है।

ईरान ने बिना किसी बड़े खर्च के, सिर्फ अपने भौगोलिक स्थिति के दम पर दुनिया की सबसे ताकतवर सेनाओं को यहां बेबस कर रखा है।

अमेरिकी सेना के हाथ अभी तक क्यों खाली?

युद्ध शुरू होने से लेकर अमेरिका ने ईरान पर जमकर बमबारी की है लेकिन ईरान हार नहीं माना है। इसकी वजह ईरान की तैयारी है। अमेरिका के पास 13,000 करोड़ रुपये का एक 'डिस्ट्रॉयर' जहाज जरूर है, लेकिन ईरान के पास 10 लाख रुपये की 1,000 'मच्छर नावें' (Fast Attack Crafts) हैं। ईरान की रणनीति 'आमने-सामने की जंग' की है ही नहीं। वह 'असिमेट्रिक वॉरफेयर' (असमान युद्ध) लड़ता है। अगर एक जहाज पर 100 छोटी, तेज और बारूद से भरी नावें एक साथ अलग-अलग दिशाओं से हमला करें, तो दुनिया का सबसे एडवांस रडार सिस्टम भी 'कंफ्यूज' हो जाता है। इतना ही नहीं, ईरान ने अपने मिशाल से भी अमेरिका को हैरत में डाला है।

ईरान के सामने ट्रंप क्यों हैं मजबूर?

समुद्र में चलने वाले मालवाहक जहाज आमतौर पर विशाल होते हैं और धीमी गति से चलते हैं। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इन जहाजों में खतरे का पता लगाने की क्षमता लगभग न के बराबर है। इसलिए इन्हें निशाना बनाना आसान होता है। हाल ही में ईरान ने भारतीय जहाजों पर फायरिंग की थी और जहाजों को होर्मुज पार किए लौटना पड़ा था। ईरान की कम लागत वाले ड्रोन और माइंस से जहाजों को धमकाने की क्षमता ट्रंप के लिए निराशा का कारण बनी हुई है, जिन्होंने पिछले महीने स्वीकार किया था कि चाहे उन्हें कितनी भी बुरी तरह से हराया जाए ऐसे हमले जारी रहेंगे।

अमेरिका को जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

अमेरिका द्वारा नाकाबंदी की घोषणा के बाद, ईरान ने कहा कि अगर उसके बंदरगाहों को खतरा हुआ तो वह जवाबी कार्रवाई करेगा, जिससे पहले से ही सीमा पार करने में हिचकिचा रही जहाज कंपनियों के लिए तनाव और बढ़ गया है। साथ ही, तेहरान की टोल प्रणाली ने एक नया कानूनी जोखिम पैदा कर दिया है, जो जहाज़ सुरक्षित मार्ग के लिए रिवोल्यूशनरी गार्ड को भुगतान करते हैं। जलडमरूमध्य की स्थिति को लेकर अनिश्चितता के बीच, जहाज ऑपरेटर प्रतीक्षा कर रहे हैं। अभी करीब 800 से अधिक जहाज खाड़ी में फंसे हुए थे।

Iran vs US Hormuz Chokepoint Decoded

Iran vs US Hormuz Chokepoint Decoded

जहाज कंपनियों में भरोसा बहाल करना जरूरी

विश्लेषकों का कहना है कि यातायात को सामान्य स्थिति में लाने के लिए, शिपिंग क्षेत्र को इस बात का भरोसा होना जरूरी है कि ईरान रास्ते में गुजर रहे जहाजों पर हमला नहीं करेगा। लेकिन यह भरोसा एक नाज़ुक संतुलन पर निर्भर करता है। ईरान के पास अमेरिका से मुकाबला करने के लिए होर्मूज आखिरी दांव बचा है।

अमेरिका के साथ छह हफ्तों से चल रहे इस जंग के दौरान, ईरान ने बारूदी सुरंगें बिछाकर और अपने इलाके की भौगोलिक कमजोरियों का फायदा उठाकर, इस जलडमरूमध्य में लगभग सारी आवाजाही रोक दी है। अमेरिकी नाकेबंदी के बावजूद भी, ये ईरान को इस बात पर अपना दबदबा बनाए रखने में मदद करते हैं कि कौन वहां से गुजरेगा और कितने जोखिम पर।

Kpler के डेटा के अनुसार, युद्धविराम के बाद से औसतन हर दिन केवल नौ जहाज ही इस जलडमरूमध्य से गुज़रे हैं, जबकि युद्ध से पहले 130 से ज्यादा जहाजों का आवागमन होता था। अमेरिका से युद्ध से पहले, होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल प्रवाह का लगभग 20 प्रतिशत यानी लगभग 20 मिलियन बैरल तेल प्रतिदिन और वैश्विक द्रवीकृत प्राकृतिक गैस व्यापार का 20 प्रतिशत गुजरता था। यह फारस खाड़ी से बाहर निकलने का एकमात्र समुद्री मार्ग है, जो इसे एक अत्यंत महत्वपूर्ण 'चोक पॉइंट' (अवरोधक बिंदु) बनाता है।

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