Times Now Navbharat
live-tv
Premium

युद्ध के दौर में बढ़ने की जगह घट रहा सोने का भाव, क्यों काम नहीं आ रहा किताबी ज्ञान?

आमतौर पर गोल्ड और सिल्वर जैसे मेटल निवेश के लिए सेफ हेवन माने जाते हैं। जब वैश्विक स्तर पर अस्थिरता और अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक गोल्ड और सिल्वर जैसे एसेट्स में निवेश करते हैं। लेकिन, फिलहाल यह धारणा पूरी तरह ध्वस्त होती दिख रही है।

Image
युद्ध के दौरान भी नहीं बढ़ रहे गोल्ड सिल्वर का भाव
Authored by: Yateendra Lawaniya
Updated Apr 2, 2026, 17:10 IST

वैश्विक युद्ध जैसे हालात में जहां निवेशक आमतौर पर सोने-चांदी की तरफ भागते हैं, इस बार तस्वीर उलटी दिख रही है। बढ़ते तनाव के बावजूद इन ‘सेफ हेवन’ एसेट्स में तेज गिरावट ने बाजार को चौंका दिया है और निवेशकों के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर सोना भी सुरक्षित क्यों नहीं रहा। निप्पॉन इंडिया गोल्ड ETF करीब 18% गिरा है, जबकि सिल्वर ETF में 27% की गिरावट आई। वहीं तुलना में सेंसेक्स केवल 9% टूटा।

इंडिकेटरLTPबदलाव% बदलावहाईलोओपनपिछला बंद
Dollar Index100.23+0.58+0.58%100.2699.4599.5699.65
USD/INR93.10-1.68-1.77%93.6792.8293.5394.78
Gold (₹/10g)*71,500+350+0.49%71,80070,95071,10071,150

जनवरी के पीक से सोना करीब 22% और चांदी 44% तक गिर चुकी है। यह संकेत देता है कि बाजार में पारंपरिक “सेफ हेवन” का व्यवहार इस बार बदल गया है। वैश्विक तनाव और युद्ध के बीच जहां आमतौर पर सोना-चांदी सुरक्षित निवेश माने जाते हैं, वहीं इस बार तस्वीर उलट दिख रही है। ईरान-इजरायल-US तनाव बढ़ने के बावजूद इन धातुओं में तेज गिरावट आई है। आंकड़े बताते हैं कि हालिया दौर में सोना-चांदी ने इक्विटी से भी खराब प्रदर्शन किया है।

मैक्रो फैक्टर ने बिगाड़ा खेल

इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह भू-राजनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक है। युद्ध के चलते तेल की कीमतें बढ़ीं, जिससे महंगाई का डर बढ़ा। इसके बाद बाजार ने ब्याज दर कटौती की उम्मीदें कम कर दीं। नतीजा यह हुआ कि US बॉन्ड यील्ड बढ़ गई और डॉलर मजबूत हो गया। जब 10 साल के अमेरिकी बॉन्ड 4-5% तक रिटर्न देने लगते हैं, तो निवेशक बिना जोखिम के ब्याज कमाने वाले एसेट्स की तरफ शिफ्ट हो जाते हैं। ऐसे में सोना-चांदी जैसे non-yielding assets आकर्षण खो देते हैं।

मुनाफावसूली का असर

गिरावट का एक बड़ा कारण मार्केट में लिक्विडिटी की कमी भी है। जब बाजार में तनाव बढ़ता है, तो निवेशक मार्जिन कॉल पूरा करने के लिए मुनाफे वाले एसेट्स बेचते हैं। सोना-चांदी में पहले से बनी पोजीशन भी इसी वजह से अनवाइंड हुई। यानी डर के माहौल में भी ये एसेट बिके, क्योंकि निवेशकों को नकदी की जरूरत थी।

धातु1 साल का हाईतारीख (लगभग)1 साल का लोतारीख (लगभग)मौजूदा भाव (2 अप्रैल 2026)
सोना (24K, ₹/10 ग्राम)₹1,93,096जनवरी 2026₹1,01,1072025₹1,48,970
चांदी (₹/किलो)₹4,39,337जनवरी 2026₹1,09,7642025₹2,50,000

गोल्ड-सिल्वर रेश्यो का संकेत

2025 में गोल्ड-सिल्वर रेशियो करीब 100 से गिरकर 44 तक आ गया था। आमतौर पर 40-50 के स्तर पर पहुंचने के बाद यह सेक्टर कूलिंग फेज में जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक अभी बाजार उसी मीन रिवर्सन फेज से गुजर रहा है, जहां कीमतें अपने औसत स्तर की ओर लौटती हैं।

फेजसमयगोल्ड (₹/10g)सिल्वर (₹/kg)गोल्ड-सिल्वर रेश्यो*संकेत
रेश्यो हाई (सिल्वर सस्ता)शुरुआत 2025~₹60,000–65,000~₹60,000–70,000~90–100सिल्वर अंडरवैल्यूड, रैली की शुरुआत
रेश्यो गिरावट (सिल्वर आउटपरफॉर्म)2025 मिड–एंडगोल्ड steadyसिल्वर तेज~60–70सिल्वर में तेज पैसा, हाई बीटा मूव
रेश्यो लो (पीक जोन)जनवरी 2026~₹1.8–1.9 लाख~₹4.0–4.4 लाख~40–45ओवरहीटिंग, करेक्शन का संकेत
रेश्यो रिकवरी (करेक्शन फेज)मार्च–अप्रैल 2026~₹1.45 लाख~₹2.3–2.5 लाख~55–65कूलिंग फेज, गोल्ड मजबूत

क्या खत्म हो गया सेफ हेवन स्टेटस?

सोना लंबी अवधि में अभी भी इक्विटी से कम कोरिलेटेड रहता है और पोर्टफोलियो को स्थिरता देता है। लेकिन अत्यधिक तनाव के समय यह संबंध टूट सकता है, जैसा अभी दिख रहा है। इस बार सोना-चांदी की गिरावट यह दिखाती है कि बाजार केवल डर से नहीं, बल्कि मैक्रोइकॉनॉमिक फैक्टर्स से चलता है। युद्ध का असर जरूर है, लेकिन असली दिशा तय कर रहे हैं ब्याज दर, डॉलर और लिक्विडिटी। ऐसे में निवेशकों के लिए सबसे अहम है अनुशासन और लंबी अवधि का नजरिया।

निवेशकों के लिए क्या है रणनीति

मौजूदा गिरावट को विशेषज्ञ “रियलिटी चेक” मान रहे हैं, न कि ट्रेंड रिवर्सल। सलाह यह है कि निवेशक घबराएं नहीं और एसेट एलोकेशन बनाए रखें। गोल्ड में SIP जारी रखना बेहतर माना जा रहा है, जबकि सिल्वर को ज्यादा टैक्टिकल कॉल के रूप में देखा जा रहा है। स्टैगर्ड तरीके से निवेश बढ़ाने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि लंबी अवधि में सोना अभी भी पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन का अहम हिस्सा बना रहेगा।

डिस्क्लेमर: TimesNow Hindi किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

End of Article