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Explained: क्यों फीकी पड़ रही सोने-चांदी की चमक? क्या आने वाली है बड़ी गिरावट?

गोल्ड एक्सपर्ट का मानना ​​है कि सोने और चांदी में शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन लंबे समय के नजरिए के लिए कोई संकट नहीं है।

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सोना हो रहा सस्ता
Authored by: Alok Kumar
Updated Jun 14, 2026, 16:08 IST

आमतौर पर जब भी दुनिया में डर या अनिश्चितता बढ़ती है तो सोने (Gold) और चांदी (Silver) के दाम बढ़ते हैं। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा है। दुनिया में डर और तनाव बना हुआ है लेकिन सोने और चांदी की कीमतें नीचे आ रही हैं। पिछले एक महीने में सोना करीब ₹12,000 यानी करीब 7.4% सस्ता हो गया है। वहीं, चांदी प्रति किलोग्राम ₹20,668 यानी करीब 7.8% टूटकर ₹2,44,718 प्रति किलोग्राम पर आ गई है। अगर रिकॉर्ड हाई से देखें तो 2026 की शुरुआत में सोना 1,83,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था, जबकि चांदी की कीमत बढ़कर 4,18,000 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। अब बाजार में सोने का भाव 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत 2.44 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के करीब पहुंच गई है। अगर रिकॉर्ड भाव से देखें तो सोना करीब 33 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 1.74 लाख रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हो चुकी है। आखिर ऐसा क्यों हुआ? क्या सोने और चांदी की रैली खत्म हो गई है? क्या दोनों कीमती धातु में आने वाली है बड़ी गिरावट? आइए आपके सभी सवालों के जवाब देते हैं।

सोने-चांदी की कीमतेंक्यों रिकॉर्ड हाई पर पहुंची थी?

  1. सोने की कीमत में ऐतिहासिक उछाल की वजह दुनिया भर में सुरक्षित निवेश के तौर पर इनकी भारी मांग और केंद्रीय बैंकों द्वारा की गई खरीदारी थी।
  2. चांदी की कीमत कम प्रोडक्शन के बीच बढ़ी औद्योगिक मांग और निवेश के कारण रिकॉर्ड हाई पर पहुंची थी।

सोना और चांदी क्यों गिर रहे हैं?

  • निवेशकों की ओर से मुनाफावसूली: जबरदस्त तेजी के बाद निवेशक मुनाफा वसूल रहे हैं। पिछले एक साल में सोने और चांदी ने शानदार रिटर्न दिया है, जिससे कई निवेशकों ने अपना मुनाफा निकाल रहे हैं।
  • मजबूत डॉलर और ग्लोबल बाजार का मूड: आमतौर पर सोना और चांदी अमेरिकी डॉलर के उलट दिशा में चलते हैं। हाल के हफ्तों में, ग्लोबल मॉनेटरी पॉलिसी और आर्थिक आंकड़ों को लेकर उम्मीदों ने डॉलर को मजबूत किया है, जिससे कीमती धातुएं कम आकर्षक हो गई हैं। मजबूत डॉलर की वजह से दूसरी करेंसी का इस्तेमाल करने वाले खरीदारों के लिए सोना और चांदी महंगे हो जाते हैं, जिससे मांग कम हो सकती है।
  • तेल की बढ़ती कीमतें: तेल की बढ़ती कीमतें ने बाजार में नई अनिश्चितता पैदा की है। कच्चे तेल की कीमतें $91-93 प्रति बैरल के दायरे में बनी हुई हैं। तेल की ऊंची कीमतों से महंगाई की चिंता बढ़ती है और भारत जैसे देशों के लिए आयात की लागत भी बढ़ जाती है। नतीजतन, ट्रेडर ज्यादा सतर्क हो गए हैं, जिससे कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है।
  • केंद्रीय बैंकों की ओर से खरीदारी पर ब्रेक: पिछले दो सालों से सोने की कीमतों को रिकॉर्ड ऊंचाई पर बनाए रखने में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की आक्रामक खरीदारी का सबसे बड़ा योगदान था। पीपल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लगातार अपने विदेशी मुद्रा भंडार को डॉलर से हटाकर सोने में शिफ्ट कर रहे थे। लेकिन अब उन्होंने सोने की खरीदारी कम कर दी है।
क्या सोने में तेजी खत्म?

क्या सोने में तेजी खत्म?

अभी और सस्ता होगा सोना-चांदी

कमोडिटी मार्केट के दिग्गज एक्सपर्ट और केडिया कमोडिटीज के एमडी अजय केडिया (Ajay Kedia) के मुताबिक, आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है। इसके पीछे वो कई वजह गिनाते हैं। उनके अनुसार, इतिहास खुद को दोहरा सकता है। मौजूदा वैश्विक हालात वैसे ही बन रहे हैं जैसे साल 2008 के ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस (और साल 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के शुरुआती दौर में देखे गए थे। मौजूदा समय में कच्चे तेल की कीमत जल्द कम होने की उम्मीद नहीं है। इससे ग्लोबल मार्केट में सुस्ती (Slowdown) आएगी। उनके अनुसार, इतिहास गवाह है कि जब भी ऐसी आर्थिक सुस्ती या संकट की शुरुआत होती है, तो लिक्विडिटी (कैश) की कमी के कारण शुरुआती दौर में सोने और चांदी में तेजी के बजाय गिरावट दर्ज की जाती है। अभी भी बाजार में ठीक वैसी ही स्थिति बन रही है। इसलिए दोनों कीमती धातु में गिरावट आ सकती है।

कितना सस्ता हो सकता है सोना और चांदी?

सोना (Gold) गिरकर ₹1.40 लाख से ₹1.45 लाख प्रति 10 ग्राम तक आ सकता है।

चांदी (Silver) टूटकर ₹2.20 लाख से ₹2.25 लाख प्रति किलोग्राम के स्तर तक आ सकती है।

अजय केडिया का मानना है कि अगर अगस्त-सितंबर तक अगर सोने और चांदी गिरकर इस लेवल पर पहुंच जाता है तो यह लंबी अवधि के निवेशकों के लिए खरीदारी का सबसे सुनहरा मौका हो सकता है।

निवेशक अभी क्या करें?

घबराहट में बिकवाली से बचें: तेज रैली के बाद शॉर्ट-टर्म करेक्शन आम बात है। निवेशकों को कीमतों में रोज होने वाले उतार-चढ़ाव के आधार पर भावुक फैसले लेने से बचना चाहिए।

एसेट एलोकेशन की समीक्षा करें: अगर हालिया बढ़त के कारण पोर्टफोलियो में सोने और चांदी का हिस्सा काफी बढ़ गया है, तो निवेशक अपने वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम लेने की क्षमता के अनुसार अपने निवेश को रीबैलेंस करने पर विचार कर सकते हैं।

लंबी अवधि में टेंशन नहीं: जिन निवेशकों ने लंबी अवधि के लिए सोना खरीदा है, उनके लिए मौजूदा गिरावट चिंता का विषय नहीं है। पोर्टफोलियो में 5% से 15% तक सोने का आवंटन विविधीकरण के लिए उपयोगी माना जाता है। एकमुश्त निवेश की बजाय SIP या चरणबद्ध खरीदारी बेहतर रणनीति हो सकती है।

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