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Explained: IPO में कमाते कौन? निवेशकों को मामूली रिटर्न, मर्चेंट बैंकर की करोड़ों में कमाई, समझें पूरा खेल

कंपनियों के रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस के अनुसार, Lenskart, ग्रो, फिजिक्सवाला और Pine Labs ने अपने आईपीओ को मैनेज करने के लिए मर्चेंट बैंकर को शुल्क के रूप में 474 करोड़ रुपये दिए। मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि IPO के इस पूरे खेल के मर्चेट बैंकर अनसुने विजेता होते हैं।

आईपीओ का खेल

आईपीओ का खेल

भारतीय शेयर बाजार में सुस्ती है। 11 महीने बीतने वाला है लेकिन मार्केट एक रेंज में ट्रेड कर रहा है। इससे निवेशकों को मामूली या निगेटिव रिटर्न मिला है। वहीं, दूसरी ओर IPO की रेस थमने का नाम नहीं ले रही है। प्राइमरी मार्केट में एक के बाद एक आईपीओ आ रहा है। आईपीओ आने से पहले ग्रे मार्केट में मिलने वाले रिटर्न को लेकर गजब का हाइप क्रिएट किया जा रहा है। हालांकि, हकीकत इससे कोसों दूर हैं। बता दें कि इस साल मेनबोर्ड सेगमेंट में अबतक 93 IPO आए हैं, जिनमें से 51 मुनाफे में और 35 लॉस में रहे हैं। यानी इन आईपीओ में पैसा लगाने वाले निवेशकों को नुकसान हुआ है। बहुत सारे आईपीओ में निवेशकों को औने-पौने रिटर्न भी मिले हैं। वहीं, दूसरी ओर आईपीओ की इस रेस में मर्चेंट बैंकरों की तगड़ी कमाई हो रही है।

कंपनियों के रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस के अनुसार, सिर्फ चार आईपीओ— Lenskart, ग्रो, फिजिक्सवाला और Pine Labs ने अपने आईपीओ को मैनेज करने के लिए मर्चेंट बैंकर को शुल्क के रूप में 474 करोड़ रुपये दिए। यानी मर्चेंट बैंकर की तगड़ी कमाई हुई। मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि आईपीओ के इस पूरे खेल के मर्चेट बैंकर अनसुने विजेता होते हैं। आखिर, क्या करते हैं ये मर्चेंट बैंकर? कंपनियां क्यों इतना मोटा भुगतान करती हैं? आइए जानते हैं अंदर की सारी बातें।

कौन होते हैं मर्चेंट बैंकर?

मर्चेंट बैंकर सेबी के साथ पंजीकृत स्वतंत्र वित्तीय संस्थान होते हैं। वे कंपनियों को उनके आईपीओ में शुरू से अंत तक सहायता प्रदान करते हैं। इन्हें लीड मैनेजर या बुक-रनिंग लीड मैनेजर (बीआरएलएम) भी कहा जाता है। एक आईपीओ में एक या एक से अधिक लीड मैनेजर हो सकते हैं। एक मर्चेंट बैंकर किसी कंपनी की पूरी आईपीओ प्रक्रिया में सहायता करता है, जिसमें कंपनी की जांच-पड़ताल से लेकर यह निर्धारित करना शामिल है कि क्या कंपनी आईपीओ के लिए पात्र है, एक्सचेंजों में आईपीओ के लिए आवेदन करने, प्रॉस्पेक्टस तैयार करने, आईपीओ विज्ञापन, रोड शो, मार्केटिंग और लिस्टिंग के बाद की प्रक्रिया शामिल है।

IPO लाने में मर्चेंट बैंकर की क्या होती है भूमिका?

किसी भी IPO में लीड मैनेजर (मर्चेंट बैंकर) की भूमिका दो हिस्सों में बंटी होती है: प्री–इश्यू जिम्मेदारियां और पोस्ट–इश्यू जिम्मेदारियां।

प्री–इश्यू (IPO लॉन्च से पहले) में मर्चेंट बैंकर की जिम्मेदारियां

1. ड्यू डिलिजेंस

कंपनी से जुड़े सभी दस्तावेजों, वित्तीय आंकड़ों और कानूनी जानकारियों की जांच करना और उनकी सत्यता सुनिश्चित करना।

2. कंपनी की पात्रता जांचना

स्टॉक एक्सचेंज और SEBI के नियमों के अनुसार कंपनी IPO लाने के योग्य है या नहीं, इसका मूल्यांकन करना।

3. अंडरराइटिंग एग्रीमेंट

अगर मर्चेंट बैंकर अंडरराइटर की भूमिका निभा रहा है, तो उसके लिए जरूरी एग्रीमेंट तैयार करना।

4. IPO फीस तय करना

IPO से संबंधित सभी सेवाओं के लिए लगने वाली फीस (मैनेजमेंट फीस, अंडरराइटिंग फीस आदि) तय करना।

5. इश्यू की संरचना तय करना

IPO का साइज, प्राइस बैंड, शेयरों की संख्या और ऑफर स्ट्रक्चर तैयार करना।

6. ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस (DRHP) तैयार करना

कंपनी की पूरी जानकारी वाला Draft Red Herring Prospectus (DRHP) तैयार करना।

7. IPO आवेदन फॉर्म तैयार करना

IPO के आवेदन से जुड़ी सभी औपचारिकताओं और दस्तावेजों को पूरा करना।

8. DRHP और IPO आवेदन SEBI व स्टॉक एक्सचेंज को जमा करना

DRHP को SEBI और IPO आवेदन BSE/NSE को सौंपना।

9. रोडशो और मार्केटिंग

निवेशकों को आकर्षित करने के लिए रोडशो, प्रेस कॉन्फ्रेंस, विज्ञापन और प्रचार–प्रसार अभियान चलाना।

10. RHP (Red Herring Prospectus) तैयार करना

अंतिम प्रॉस्पेक्टस तैयार करना और उसे SEBI और स्टॉक एक्सचेंज में जमा करना।

11. SEBI से मिले ऑब्ज़र्वेशन का समाधान

SEBI द्वारा DRHP या RHP पर उठाए गए सवालों, कमियों या सुझावों का समाधान करना।

पोस्ट–इश्यू (IPO के बाद) में मर्चेंट बैंकर की जिम्मेदारियां

1. पोस्ट-इश्यू मॉनिटरिंग रिपोर्ट जमा करना

IPO पूरा होने के बाद SEBI और स्टॉक एक्सचेंज को मॉनिटरिंग रिपोर्ट प्रस्तुत करना।

2. अलॉटमेंट प्रक्रिया में सहयोग करना

शेयरों के आवंटन (Allotment) से संबंधित सभी प्रक्रियाओं में कंपनी और रजिस्ट्रार की मदद करना।

3. पोस्ट-इश्यू विज्ञापन जारी करना

ओवर–सब्सक्रिप्शन के आंकड़े

अलॉटमेंट का आधार (Basis of Allotment)

कितनी आवेदन प्राप्त हुईं

रिफंड ऑर्डर कब भेजे गए

लिस्टिंग एप्लिकेशन कब फाइल हुई

4. प्रमाणपत्र और दस्तावेज जमा करना

ट्रू कॉपी रिफंड ऑर्डर, अंडरराइटिंग कमीशन रिकॉर्ड, डिस्पैच रिपोर्ट, आवश्यक प्रमाणपत्र और सहायक दस्तावेज

5. पोस्ट–इश्यू सिक्योरिटीज प्रमोशन

IPO के बाद भी शेयरों और कंपनी की जानकारी का सही तरीके से प्रचार करना ताकि निवेशक जागरूक रहें।

मर्चेंट बैंकर क्यों वसूलते हैं मोटी फीस?

कोई भी कंपनी जब IPO लाने की तैयारी शुरू करती है तो उसे एक एक्सपर्ट टीम की जरूरत होती है। इसके लिए वो मर्चेंट बैंकर को हायर करती है। इसलिए मर्चेंट बैंकर प्रोजेक्ट साइज के हिसाब से फीस वसूलते हैं, जो करोड़ों में होती है। मर्चेंट बैंकर, मैनेजमेंट फीस, अंडरराइटिंग फीस, मार्केटिंग फीस, रोडशो खर्च, लीगल और एडवाइजरी फीस और डॉक्यूमेंटेशन खर्च के लिए मोटा फीस वसूलते हैं। एक बड़े IPO में लीड मैनेजर अकेले 100–150 करोड़ तक की कमाई आसानी से कर लेते हैं।

आईपीओ का सच
आईपीओ का सच

निवेशक उठाते हैं सबसे ज्यादा जोखिम?

आईपीओ में अगर कोई सबसे ज्यादा जोखिम उठता है तो वह निवेशक होता है। वह अपनी गाढ़ी कमाई लगाता है। अगर लिस्टिंग गेन मिल गई तो बल्ले-बल्ले नहीं तो नुकसान की भरपाई करने वाला कोई नहीं। वहीं,मर्चेंट बैंकर का लगभग कोई जोखिम नहीं होता है। उनकी फीस तय होती है और IPO सफल हो या फेल-मर्चेंट बैंकर को पैसे मिलते ही मिलते हैं। कंपनी भी आईपीओ के जरिये अपनी पूंजी जुटाती है।

आप निवेशक हैं तो क्या करें?

मार्केट एक्सपर्ट का मनना है कि निवेशक को हमेशा समझदारी से फैसला लेना चाहिए। उसे RHP को ध्यान से पढ़ना चाहिए। निवेश से पहले कंपनी की वैल्यूएशन की जांच करना चाहिए। इसके अलावा सिर्फ लिस्टिंग गेन के चक्कर में न पड़ें। असली कामयाबी उन निवेशकों को मिलती है जो अच्छे बिजनेस मॉडल वाली कंपनियों में लंबे समय तक निवेश करके रहते हैं।

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आलोक कुमार
आलोक कुमार Author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभ... और देखें

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