Explained: जनवरी में अबतक ₹58,000 महंगी हुई चांदी, आज का भाव 2.88 लाख, क्या ये बुलबुला तो नहीं? समझें पूरी कहानी
चांदी की कीमत हर नए दिन के साथ रिकॉर्ड बना रही है। 2025 में जबरदस्त तेजी के बाद अब नए साल में भी बेतहाशा तेजी जारी है। चांदी में यह तेजी जियोपॉलिटिकल टेंशन और इंडस्ट्रियल डिमांड के कारण है। हालांकि, अब निवेशकों को समझ में नहीं आ रहा है कि वो क्या करें? अगर आप भी इस सवाल का जवाब ढूंढ रहे हैं तो चिंता करने की जरूरत नहीं है। हम आपको इसका विस्तार से जवाब दे रहे हैं।
- Authored by: आलोक कुमार
- Updated Jan 14, 2026, 11:09 AM IST
चांदी की कीमत रॉकेट की रफ्तार से बढ़ रही है। 2025 में 150% की जबरदस्त तेजी के बाद 2026 के सिर्फ14 दिन में चांदी की कीमत में करीब 55,000 रुपये की बढ़ोतरी हो गई है। आपको बता दें कि 1 जनवरी को MCX Silver पर चांदी की कीमत 2,29,150 रुपये प्रति किलोग्राम थी। वह आज यानी 14 जनवरी को बढ़कर 287,990 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड पर पहुंच गई है। इस तरह चांदी की कीमत में 58,840 रुपये की बेतहाशा वृद्धि देखी गई है। हालांकि, कई एक्सपर्ट अभी चांदी के भाव में और बड़ी तेजी की बात कर रहे हैं। मशहूर लेखक और निवेशक रॉबर्ट कियोसाकी का कहना है कि चांदी का भाव वर्ल्ड मार्केट 100 डॉलर के पार जा सकता है। अभी यह 90 डॉलर के ऑल टाइम हाई पर ट्रेड कर रहा है। आखिर, सिल्वर के भाव में इतनी तेजी क्यों है? कहीं ये बुलबुला तो नहीं? अगर आप निवेश हैं तो क्या करें? आइए सभी सवालों के जवाब देते हैं।
नए साल में बुलेट ट्रेन की रफ्तार से बढ़ी चांदी की कीमत
| तारीख | कीमत (₹ प्रति किलो) |
|---|
| 14 जनवरी 2026 | ₹2,87,990 |
| 13 जनवरी 2026 | ₹2,63,032 |
| 12 जनवरी 2026 | ₹2,56,776 |
| 9 जनवरी 2026 | ₹2,39,994 |
| 8 जनवरी 2026 | ₹2,35,826 |
| 7 जनवरी 2026 | ₹2,48,000 |
| 6 जनवरी 2026 | ₹2,43,150 |
| 5 जनवरी 2026 | ₹2,37,063 |
| 2 जनवरी 2026 | ₹2,34,550 |
| 1 जनवरी 2026 | ₹2,29,150 |
चांदी में कीमत इतनी तजी से क्यों बढ़ रही?
चांदी की मौजूदा तेजी के पीछे सिर्फ एक नहीं, बल्कि कई बड़े कारण हैं:
1. इंडस्ट्रियल डिमांड में जबरदस्त उछाल
चांदी अब सिर्फ गहनों या निवेश तक सीमित नहीं रही। चांदी का इस्तेमाल सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), 5G, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स आदि में बड़े पैमाने पर हो रहा है। इन सभी सेक्टर्स में चांदी की खपत तेजी से बढ़ रही है। ग्रीन एनर्जी पर ग्लोबल फोकस ने चांदी को “फ्यूचर मेटल” बना दिया है।
2. ग्लोबल सप्लाई का दबाव
दुनिया की सबसे बड़ी चांदी खदानें मेक्सिको, पेरू, बोलीविया जैसे देशों में हैं। कई माइंस में प्रोडक्शन स्लो हैं। वहीं पर्यावरण नियम सख्त होने से माइनिंग कॉस्ट बढ़ी है। इसके चलते सप्लाई कम हुई है और डिमांड तेजी से बढ़ी है।
3. कमजोर रुपया और ग्लोबल अनिश्चितता
अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट ने भी चांदी की कीमत बढ़ाने में योगदान दिया है। वैश्विक अनिश्चितता में कीमती धातुओं को सुरक्षित निवेश माना जाता है, जिससे चांदी को भी सपोर्ट मिला।
चांदी में उछाल
क्या यह एक बुलबुला है?
कमोडिटी एक्सपर्ट का कहना है कि अभी पक्के तौर पर चांदी की इस तेजी को 'बुलबुला' नहीं कहा जा सकता, क्योंकि यह तेजी डिमांड और सप्लाई गैप के कारण है। दुनिया में जितनी सिल्वर की मांग है, उसके अनुरूप सप्लाई नहीं हो रही है। सिल्वर की वैश्विक उद्योगिक मांग, खदान आपूर्ति से लगातार अधिक रही है। इससे चांदी की कीमत लगातार बढ़ रही है। भारत में रुपये की कमजोरी से आयातित चांदी की कीमत ज्यादा बढ़ रही है।
आप निवेशकों हैं तो क्या करें?
सिल्वर की कीमत रिकॉर्ड हाई पर पहुंच चुकी है। इसलिए कभी भी बड़ा करेक्शन आने की आशंका है। यह भी संभव है कि कीमत यहां से और बढ़े लेकिन पक्के तौर पर यह कहना मुश्किल है। इसलिए अगर चांदी में निवेश करना है तो सिल्वर ईटीएफ में SIP करें। यह एक बेस्ट विकल्प है अभी के सयम में। हमेशा लॉन्ग टर्म को सोचकर निवेश करें। एकमुश्त निवेश से बिल्कुल बचें।
