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Explained: बिहार चुनाव में NDA की बंपर जीत का शेयर बाजार और भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर? समझें पूरा विश्लेषण

बिहार की अर्थव्यवस्था अभी भी पिछड़ी है। प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत का आधा, लेकिन एनडीए के जीत से 'विकसित बिहार' का सपना साकार हो सकता है। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इंफ्रा पुश, स्किल डेवलपमेंट, एग्री रिफॉर्म्स, टूरिज्म और एमएसएमई को बूस्ट करने को लेकर कदम बढ़ाएगी।

बिहार चुनाव का असर

बिहार चुनाव का असर

बिहार विधानसभा चुनाव में NDA को 202 सीटों पर बंपर जीत मिली है। पटना के गांधी मैदान में 20 नवंबर को नई सरकार का सपथ ग्रहरण समारोह है। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस जीत के बड़े मायने हैं। राज्य में एनडीए की वापसी का पॉजिटिव इम्पैक्ट स्टॉक मार्केट और इंडियन इकोनॉमी पर देखने को मिलेगा।

वरिष्ठ मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा ने कहा कि बिहार में एनडीए को मिली बंपर जीत के कई मायने हैं। एनडीए की राज्य में एक बार फिर सत्ता में वापसी हुई है। इससे केंद्र और राज्य दोनों को नीतिगत निरंतरता और स्थिरता मिलेगी। यह भातीय शेयर मार्केट और इकोनॉमी का मजबूती देने का काम करेगा। ऐसा इसलिए कि बिहार एक महत्वपूर्ण राज्य है। केंद्र और राज्य में एनडीए की सरकार होने से दोनों सरकारों के बीच काम को लेकर सामंजस्य होगा। यह बिहार में विकास की रफ्तार तेज करने और प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने में योगदान देगा। इसका असर राज्य के जीडीपी पर होगा। राज्य की जीडीपी बढ़ने से भारत की इकोनॉमी को मजबूती मिलेगी।

चुनाव परिणाम कैसे डालता है असर?

आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, किसी चुनाव परिणाम का असर अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर दो तरह से पड़ता है। 1. सेंटिमेंटल इम्पैक्ट: यानी निवेशकों का भरोसा बढ़ता या घटना?। 2.पॉलिसी इम्पैक्ट: यानी सरकार किन नीतियों पर काम करेगी—टैक्स, निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर, इंडस्ट्री आदि। बिहार में एनडीए की वापसी से ये दोनों फैक्टर पॉजिटिव असर डालेंगे। राज्य चुनावों का असर निवेश या केंद्र से जुड़े फैसलों को प्रभावित करते हों, जैसे—एयरपोर्ट, औद्योगिक कॉरिडोर या बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान। कई विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार का यह नतीजा स्थिरता बढ़ाएगा। यानी माहौल सकारात्मक होगा और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।

शेयर बाजार को क्या होगा फायदा?

यह पूछे जाने पर कि शेयर बाजार को क्या फायदा होगा, अजय बग्गा ने कहा कि हमने अतीत में नितेश कुमार के तेवर बदलते देखे हैं। इसलिए कई बार बाजारों को झटका लगता है, लेकिन इस तरह के अभूतपूर्व जनादेश के बाद पाला बदलना मुश्किल होगा। अपनी विरासत के अंतिम वर्षों में, मुझे नहीं लगता कि वह ऐसा करेंगे। इसलिए बाजार इस पॉजिटिव घनाक्रम मान रहा है। इतना ही नहीं, अगर बिहार के नतीजे एनडीए के पक्ष में नहीं होते, तो इससे केंद्रीय गठबंधन कमजोर हो जाता। मुझे लगता है कि यह जोखिम काफी कम हो गया है। यह न सिर्फ भारतीय शेयर बाजार बल्कि इंडियन इकोनॉमी के लिए अच्छी खरब है। केंद्र सरकार को अपने सुधारों को बढ़ाने में मदद मिलेगी जो इंडियन इकोनॉमी की रफ्तार तेज करेगी।

भारतीय इकोनॉमी को कैसे मिलेगा फायदा

एक्सपर्ट का कहना है कि बिहार में औद्योगीकरण की बहुत जरूरत है। बिहार में स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करने की जरूरत है। बिहार में 13-14 करोड़ लोग रहते हैं और इसका भारत की अर्थव्यवस्था पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है। बिहार में प्रति व्यक्ति आय सबसे कम लगभग 69,000 रुपये है। आने वाले समय में यहां कोई भी सुधार भारत की जीडीपी बड़ी होगी। इसलिए उम्मीद है कि अब औद्योगीकरण पर कुछ ध्यान दिया जाएगा और लोगों को कृषि से हटाकर ज्यादा उत्पादक रोजगारों की ओर ले जाया जाएगा और उन्हें वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जोड़ा जाएगा।

पीएम नेरेंद्र मोदी
पीएम नेरेंद्र मोदी (X handle of PM Modi)

  • इन क्षेत्रों में बढ़ सकती है तेजी
  • बिहार चुनाव में एनडीए की बंपर जीत का फायदा निकट भविष्य में उन क्षेत्रों को होगा जो आमतौर पर नीतिगत निरंतरता से लाभान्वित होते हैं। मार्केट के जानकारों का कहना है कि रिटेल, हाउसिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, मीडिया, हेल्थ सर्विस और सार्वजनिक सेवाओं को राज्य में स्थिर प्रशासनिक माहौल और निर्बाध पूंजीगत व्यय गति से लाभ मिल सकता है। आदित्य विजन, वी2 रिटेल और हिंदुस्तान मीडिया वेंचर्स जैसे नाम बिहार से जुड़े हैं। पटना में मुख्यालय वाली और सुरक्षा प्रदान करने वाली एसआईएस ने हाल ही में संस्थागत और सरकारी सेक्टर में मांग देखी है और भविष्य में वृद्धि के प्रति आश्वस्त है। आशियाना हाउसिंग, रेफेक्स इंडस्ट्रीज और जीना सीखो लाइफकेयर का भी राज्य में निवेश है और वे बेहतर क्षेत्रीय विकास गतिविधियों की गति का लाभ उठाने की उम्मीद कर रहे हैं।

    लॉन्ग-टर्म इम्पैक्ट: बिहार से भारत तक असर

    बिहार की अर्थव्यवस्था अभी भी पिछड़ी है। प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत का आधा, लेकिन एनडीए के जीत से 'विकसित बिहार' का सपना साकार हो सकता है। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इंफ्रा पुश – 50,000 किमी नई सड़कें, स्किल डेवलपमेंट, एग्री रिफॉर्म्स, टूरिज्म और एमएसएमई को बूस्ट करने को लेकर कदम बढ़ा सकती है। वहीं, 2026 बजट में बिहार को स्पेशल पैकेज मिल सकता है। लॉन्ग-टर्म में (2030 तक), बिहार का जीडीपी डबल हो सकता है, अगर प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे हुए। भारत की अर्थव्यवस्था, जो 3.7 ट्रिलियन डॉलर की है, को ईस्टर्न स्टेट्स से बूस्ट चाहिए। बिहार इसमें लीड लेगा।

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    आलोक कुमार
    आलोक कुमार Author

    आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभ... और देखें

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