Banking Fraud: आज के डिजिटल दौर में डिजिटल पेमेंट का तरीका आसान होने के कारण हर दूसरे व्यक्ति को भाता है। लेकिन जैसे-जैसे डिजिटल पेमेंट के तरीके विकसित हो रहे हैं वैसे-वैसे धोखाधड़ी के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। इसी कड़ी में भारतीय रिजर्व बैंक की कोशिश है कि ग्राहक सुरक्षा से जुड़े नियम भी समय के साथ अपडेट होते रहें। आरबीआई की ओर से 6 मार्च 2026 को एक ड्राफ्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनमें 2017 में बनाए गए उस स्ट्रक्चर की समीक्षा की गई है, जो अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन में ग्राहकों की जिम्मेदारी को सीमित करने से जुड़ा था। प्रस्तावित बदलावों के तहत इस व्यवस्था का दायरा केवल अनधिकृत ट्रांजैक्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे और व्यापक बनाया जाएगा। इसके अलावा बैंकों से अपेक्षा की गई है कि वे ग्राहकों की शिकायतों का तेजी से निपटारा करें। साथ ही छोटे मूल्य के धोखाधड़ी वाले इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन के मामलों में एक वर्ष के भीतर मुआवजा देने की व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई है।
कितने नुकसान पर मिलेगा मुआवजा
ड्राफ्ट फ्रेमवर्क के अनुसार, ठगी के शिकार व्यक्ति को धोखाधड़ी वाले इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन के मामले में 50,000 रुपए तक के नुकसान पर मुआवजा मिल सकता है।
Electronic Banking Fraud
मुआवजे की सीमा की बात करें तो यह कुल नुकसान का 85 प्रतिशत या अधिकतम 25,000 रुपए जो भी कम होगी। हालांकि, यह मुआवजा जीवन में केवल एक बार ही लिया जा सकता है। अगर खाता संयुक्त (Joint Account) है तो उसमें से केवल एक ही खाता धारक इस मुआवजे का दावा कर सकता है। साथ ही, जो व्यक्ति संयुक्त खाते में यह दावा कर चुका है, वह बाद में अपने व्यक्तिगत खाते के लिए दोबारा इस मुआवजे का दावा नहीं कर सकेगा।
ग्राहक को करनी होगी शिकायत
यह भी ध्यान रखने वाली बात है कि हर धोखाधड़ी के मामले में यह मुआवजा अपने आप नहीं मिलेगा। सबसे पहले बैंक को अपनी आंतरिक नीति के अनुसार यह संतुष्ट होना होगा कि ग्राहक का दावा वास्तव में सही और ईमानदार है। इसके अलावा ग्राहक को उस संदिग्ध लेनदेन की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल या हेल्पलाइन 1930 पर और अपने बैंक में ट्रांजैक्शन के पांच कैलेंडर दिनों के भीतर दर्ज करवानी होगी।
अधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन भी शामिल
ड्राफ्ट दिशा-निर्देशों में इस फ्रेमवर्क के दायरे को बढ़ाते हुए धोखाधड़ी वाले इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजैक्शन को भी शामिल किया गया है, जिनमें कुछ ऐसे लेनदेन भी आते हैं जो तकनीकी रूप से अधिकृत (Authorised) होते हैं। यानी अब ये नियम केवल अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजैक्शन तक सीमित नहीं रहेंगे।
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किसी अधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन का मतलब उस ट्रांजैक्शन से है, जो ग्राहक स्वयं करता है या किसी पहले से अधिकृत तीसरे पक्ष द्वारा किया जाता है। यह ट्रांजैक्शन स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन, मैनडेट, OTP, पासवर्ड, कार्ड डिटेल या बैंक द्वारा दिए गए किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक ऑथेंटिकेशन तरीके का इस्तेमाल कर किया जा सकता है। ड्राफ्ट में कहा गया है कि कुछ ऐसे अधिकृत लेनदेन जो धोखाधड़ी का शिकार होते हैं, वे भी इस सुरक्षा फ्रेमवर्क के दायरे में आएंगे।
ड्राफ्ट में इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजैक्शन की परिभाषा को Payment and Settlement Systems Act में दी गई इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर की परिभाषा से जोड़ा गया है। इसमें खास तौर पर कार्ड-नॉट-प्रेजेंट और कार्ड-प्रेजेंट दोनों तरह के ट्रांजैक्शन को शामिल किया गया है। इसके अलावा इस फ्रेमवर्क के तहत अलग-अलग कैटेगरी में रिपोर्टिंग और समीक्षा की व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई है। इनमें कार्ड प्रेजेंट ट्रांजैक्शन, कार्ड नॉट प्रेजेंट ट्रांजैक्शन, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और एटीएम ट्रांजैक्शन जैसे सभी प्रमुख डिजिटल पेमेंट सिस्टम शामिल होंगे।
बैंकों की जिम्मेदारी भी होगी अहम
ड्राफ्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार बैंकों को ग्राहकों के लिए 24x7 शिकायत दर्ज करवाने की सुविधा उपलब्ध करवानी होगी। इसके लिए कई तरह के रिपोर्टिंग चैनल दिए जाएंगे, जैसे फोन बैंकिंग, SMS, ई-मेल, IVR सिस्टम, डेडिकेटेड टोल-फ्री हेल्पलाइन और होम ब्रांच के माध्यम से शिकायत दर्ज करने की व्यवस्था। इन सुविधाओं का इस्तेमाल ग्राहक धोखाधड़ी वाले इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजैक्शन की रिपोर्ट करने या कार्ड जैसे पेमेंट इंस्ट्रूमेंट के खोने या चोरी होने की जानकारी देने के लिए कर सकेंगे। इसके अलावा बैंकों को एक अलर्ट सिस्टम भी तैयार करना होगा। ट्रांजैक्शन से जुड़े SMS अलर्ट में ऐसा नंबर देना होगा जिस पर ग्राहक तुरंत आपत्ति दर्ज करवाने के लिए SMS भेज सके। साथ ही बैंक की वेबसाइट के होमपेज पर भी सीधा रिपोर्टिंग लिंक उपलब्ध करवाना होगा।
पैसे कटने पर तुरंत मिलेगा एसएमएस अलर्ट
ड्राफ्ट के अनुसार, बैंक उन ग्राहकों से मोबाइल नंबर और ई-मेल पता मांगेंगे जो इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग सुविधाओं का इस्तेमाल करते हैं (ATM कैश विड्रॉल को छोड़कर)। इसके बाद 500 रुपए से अधिक के सभी इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन पर तुरंत SMS अलर्ट भेजा जाएगा।
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इसके साथ ही, अगर ग्राहक ने ई-मेल पता दिया है तो सभी ट्रांजैक्शन पर ई-मेल अलर्ट भी भेजना होगा। ये SMS और ई-मेल अलर्ट अन्य अलर्ट तरीकों का विकल्प नहीं हैं, बल्कि इन्हें इन-ऐप अलर्ट या पुश नोटिफिकेशन के अलावा अतिरिक्त सुरक्षा उपाय के रूप में भेजा जाएगा।
अलर्ट की यह व्यवस्था सिर्फ संदेहास्पद धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजैक्शन पर लागू होगी। इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन में कार्ड-प्रेजेंट और कार्ड-नॉट-प्रेजेंट दोनों शामिल हैं, इसलिए यह अलर्ट सभी डिजिटल भुगतान माध्यमों पर लागू होगा।
