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दिल्ली AI समिट 2026: क्यों बना भारत मेजबान, टेक लीडर बनने की राह में कितना बड़ा कदम और दुनिया पर क्या पड़ेगा असर?

Delhi AI Impact Summit 2026 News: AI Impact समिट 2026 सिर्फ तकनीकी विशेषज्ञों का कोई साधारण जमावड़ा नहीं है, बल्कि यह इस बात का ऐलान है कि भारत अब तकनीक की दुनिया में सिर्फ एक 'फॉलोअर' नहीं, बल्कि एक 'लीडर' बनने के लिए तैयार है। इसमें 100 से अधिक देशों के हजारों विशेषज्ञ और डेलीगेट्स हिस्सा ले रहे हैं। खास बात यह है कि करीब 15-20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष और 50 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मंत्री दिल्ली पहुंच रहे हैं।

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AI Impact Summit
Updated Feb 16, 2026, 11:58 IST

Delhi AI Impact Summit 2026 News: आज पूरी दुनिया की नजरें भारत की राजधानी दिल्ली पर टिकी हैं, जहां 'दिल्ली AI समिट 2026' का भव्य आयोजन हो रहा है। यह सिर्फ तकनीकी विशेषज्ञों का कोई साधारण जमावड़ा नहीं है, बल्कि यह इस बात का ऐलान है कि भारत अब तकनीक की दुनिया में सिर्फ एक 'फॉलोअर' नहीं, बल्कि एक 'लीडर' बनने के लिए तैयार है। Artificial Intelligence के इस दौर में भारत का मेजबान बनना यह दर्शाता है कि वैश्विक मंच पर भारत की डिजिटल शक्ति को अब नकारा नहीं जा सकता। इस समिट के जरिए भारत न केवल अपनी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन कर रहा है, बल्कि दुनिया के सामने एक 'सॉवरेन AI' (Sovereign AI) का मॉडल भी पेश कर रहा है।

भारत को क्यों चुना गया मेजबान?

भारत का इस शिखर सम्मेलन के लिए मेजबान चुना जाना कोई इत्तेफाक नहीं है। इसके पीछे भारत का विशाल डेटा बेस और दुनिया का सबसे बड़ा युवा टैलेंट पूल है। दुनिया भर की टेक कंपनियां जानती हैं कि AI को 'ट्रेन' करने के लिए जिस विविधतापूर्ण डेटा की जरूरत है, वह भारत के पास भरपूर मात्रा में उपलब्ध है। साथ ही, भारत ने 'इंडिया स्टैक' (UPI, आधार, डिजिलॉकर) के जरिए यह साबित कर दिया है कि वह बड़े स्तर पर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को सफलतापूर्वक लागू कर सकता है। वैश्विक समुदाय भारत को एक ऐसे देश के रूप में देखता है जो तकनीक और नैतिकता (Ethics) के बीच संतुलन बना सकता है, जिससे AI को विनाशकारी होने से रोका जा सके।

टेक लीडर बनने की राह में कितना बड़ा कदम?

यह समिट भारत के 'टेक-लीडर' बनने के सपने को हकीकत में बदलने की दिशा में एक मील का पत्थर है। अब तक भारत को मुख्य रूप से एक 'सर्विस सेंटर' या सॉफ्टवेयर बैक-ऑफिस के रूप में जाना जाता था, लेकिन AI समिट के बाद भारत की छवि 'इनोवेशन हब' के रूप में उभरेगी। इस समिट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह ग्लोबल टेक दिग्गजों (जैसे NVIDIA, Microsoft, Google और OpenAI) को भारतीय स्टार्टअप्स के साथ सीधे जुड़ने का मंच दे रहा है। भारत का लक्ष्य अपनी खुद की AI चिप्स बनाना और अपनी भाषाओं (जैसे हिंदी, तमिल, बंगाली) में बड़े भाषाई मॉडल (LLM) विकसित करना है। यह आत्मनिर्भरता भारत को अमेरिका और चीन के प्रभुत्व वाले इस क्षेत्र में एक तीसरी बड़ी शक्ति के रूप में स्थापित करेगी।

यह समिट दुनिया का सबसे बड़ा टेक मंच बन गया है। इसमें 100 से अधिक देशों के हजारों विशेषज्ञ और डेलीगेट्स हिस्सा ले रहे हैं। खास बात यह है कि करीब 15-20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष और 50 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मंत्री दिल्ली पहुंच रहे हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी इस समिट की शोभा बढ़ाएंगे। इनके साथ ही दुनिया की टॉप टेक कंपनियों के सीईओ भी भारत की मेजबानी का हिस्सा बनेंगे।

AI Impact Summit

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कौन-कौन से टेक दिग्गज आ रहे हैं?

दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों के प्रमुख इस वक्त दिल्ली में होंगे ग्लोबल लीडर्स की बात करें तो गूगल के सुंदर पिचाई, माइक्रोसॉफ्ट के सत्य नडेला, ओपनएआई (ChatGPT) के सैम ऑल्टमैन और एनवीडिया के जेनसेन हुआंग। अन्य दिग्गजों में बिल गेट्स, डीपमाइंड के डेमिस हसाबिस और एंथ्रोपिक के डारियो एमोदेई जैसे 40 से अधिक टेक कंपनियों के प्रमुख। भारतीय उद्योगपति मुकेश अंबानी, नंदन नीलेकणी और एन. चंद्रशेखरन भी भारतीय ताकत का प्रतिनिधित्व करेंगे।

AI के क्षेत्र में भारत की क्या उपलब्धियां हैं?

  • 2026 तक भारत सिर्फ AI का इस्तेमाल करने वाला देश नहीं, बल्कि इसे बनाने वाला 'पावर हाउस' बन गया है
  • वर्ल्ड रैंकिंग: स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के अनुसार, भारत AI स्किल और हायरिंग (भर्तियों) में दुनिया में पहले स्थान पर है। ओवरऑल AI विकास में हम तीसरे नंबर पर हैं और कंपनियों द्वारा AI के इस्तेमाल में अमेरिका के बाद भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर है।
  • सरकारी निवेश: केंद्र सरकार ने 'इंडिया एआई मिशन' के लिए ₹10,300 करोड़ से ज्यादा का बजट दिया है।
  • सस्ता इंफ्रास्ट्रक्चर: भारत ने 38,000 GPUs का विशाल नेटवर्क तैयार किया है, जिसे स्टार्टअप्स को मात्र ₹65 प्रति घंटे की सस्ती दर पर दिया जा रहा है।
  • AIKosh: यह एक नेशनल रिसोर्स है जहाँ 7,500 से अधिक डेटासेट और 273 एआई मॉडल सबके इस्तेमाल के लिए उपलब्ध हैं।
  • भाषिणी: यह भारत का सबसे सफल मिशन है, जो 22 भारतीय भाषाओं में रीयल-टाइम अनुवाद करता है। इसकी मदद से सरकारी सुविधाएं अब लोगों को उनकी अपनी भाषा में मिल रही हैं।
  • भारतजेन (BharatGen): जून 2025 में लॉन्च हुआ यह दुनिया का पहला सरकारी 'मल्टीमॉडल लार्ज लैंग्वेज मॉडल' है, जिसे खास तौर पर भारतीय संस्कृति और भाषाओं के लिए बनाया गया है।
  • किसान ई-मित्र: यह एक जादुई वॉयस बॉट है जो 11 भाषाओं में किसानों की मदद करता है। अब तक यह 95 लाख से ज्यादा सवालों के जवाब दे चुका है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी ऐसे कई AI टूल्स ने कमाल किया है।

भारतीय अर्थव्यवस्था और बिजनेस को क्या होगा फायदा?

बिजनेस के नजरिए से देखें तो यह समिट निवेश के नए द्वार खोल रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि AI के सही इस्तेमाल से भारत की जीडीपी में 2035 तक लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर का इजाफा हो सकता है। कृषि से लेकर स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा तक, हर क्षेत्र में AI आधारित समाधानों से लागत कम होगी और उत्पादकता बढ़ेगी। उदाहरण के तौर पर, भारतीय किसान AI के जरिए मौसम और मिट्टी की सटीक जानकारी पा सकेंगे, जिससे फसल की बर्बादी कम होगी। वहीं, एडटेक और हेल्थटेक स्टार्टअप्स के लिए यह एक ऐसा बाजार तैयार कर रहा है जिसकी मांग पूरी दुनिया में होगी।

दुनिया पर क्या पड़ेगा इसका असर?

दिल्ली AI समिट का असर केवल भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा। दुनिया के लिए भारत एक 'AI डेमोक्रेसी' का उदाहरण पेश कर रहा है। जहाँ एक तरफ चीन में AI पर कड़ा सरकारी नियंत्रण है और अमेरिका में यह पूरी तरह निजी कंपनियों के हाथ में है, वहीं भारत 'AI for All' (सबके लिए AI) का नारा दे रहा है। भारत एक ऐसा ग्लोबल फ्रेमवर्क बनाने की वकालत कर रहा है जहां AI का इस्तेमाल केवल अमीरों के लिए न हो, बल्कि विकासशील देशों की गरीबी और स्वास्थ्य समस्याओं को सुलझाने के लिए भी किया जाए। दुनिया भर के देश अब भारत की ओर देख रहे हैं कि कैसे 'डीपफेक' और डेटा चोरी जैसे खतरों से निपटने के लिए एक सुरक्षित और पारदर्शी कानून बनाया जाए।

हालांकि राह इतनी आसान भी नहीं है। AI के बढ़ने के साथ-साथ नौकरियों के जाने का डर और साइबर सुरक्षा की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। दिल्ली समिट में इन मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हो रही है। सरकार का जोर 'री-स्किलिंग' पर है, ताकि युवाओं को AI से डरने के बजाय उसे एक औजार की तरह इस्तेमाल करना सिखाया जा सके। यह समिट इस बात का गवाह है कि भारत अब तकनीक के नियम बनाने वालों की मेज पर बैठ चुका है।

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