तमाम मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि 1993 में मलेशिया के एक 10 साल के बच्चे ने डोमेन नेम एआई डॉट कॉम (AI.COM) को महज 300 रुपये में खरीदा और अब 70 मिलियन डॉलर यानी करीब 630 करोड़ रुपये में बेचकर अरबपति बन गया है। लेकिन, असल में ये रिपोर्ट्स आधी हकीकत आधा फसाना हैं। क्योंकि, यह तो सच है कि AI डॉट कॉम डोमेन 70 मिलियन डॉलर में बिका है। लेकिन, जिस मलेशियन लड़के की कहानी इसमें जोड़ी जा रही है, उसमें फर्जीवाड़ा है। इसका पर्दाफाश उस डोमेन ब्रोकर ने किया है, जिसने यह डील कराई है।
Truth of Ai dot com
दावों से अलग क्या है पूरी कहानी?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI आज टेक दुनिया का सबसे चर्चित सेक्टर बन चुका है। इसी बीच AI.com डोमेन की करीब 70 मिलियन डॉलर यानी 60 करोड़ रुपये में हुई बिक्री ने वैश्विक टेक और निवेश जगत का ध्यान खींचा। सोशल मीडिया और कई रिपोर्ट्स में इसे एक ऐसे सौदे के तौर पर पेश किया गया जिसमें किसी ने वर्षों पहले मामूली कीमत पर डोमेन खरीदी और अब अचानक अरबों का फायदा कमा लिया। लेकिन जब इस डील के पीछे की कहानी सामने आई, तो पता चला कि मामला इतना सीधा और ‘लकी’ नहीं था। दरअसल, यह सौदा कई वर्षों की रणनीति, सही समय पर निवेश और भविष्य की टेक दिशा को समझने का परिणाम है। डोमेन ब्रोकरेज इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने अब इस डील की अंदरूनी कहानी सामने रखी है, जिससे साफ होता है कि यह महज किस्मत नहीं बल्कि सोची-समझी कारोबारी रणनीति थी।
वायरल कहानी कैसे बनी?
AI.com की बिक्री के बाद कई मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट में यह दावा तेजी से फैल गया कि डोमेन वर्षों पहले करीब 100 डॉलर या कुछ सौ रुपये में रजिस्टर की गई थी और अब अचानक 70 मिलियन डॉलर में बिक गई। इससे यह धारणा बनी कि मालिक को बिना ज्यादा मेहनत के भारी मुनाफा मिल गया। लेकिन यह कहानी आधी सच्चाई पर आधारित थी। डोमेन लंबे समय तक अलग-अलग मालिकों और निवेशकों के पास रही और इसकी बिक्री कई चरणों में हुई। बीच के वर्षों में इसे रणनीतिक रूप से बाजार में उतारा गया और बड़े खरीदारों से संपर्क साधा गया।
Fake News (1)
क्या हैं डील के प्रमुख तथ्य?
- किसने बेचा : AI.com डोमेन का आखिरी सौदा पिछले साल मलेशियाई टेक्नोक्रैट अरसयान इस्माइल ने डोमेन ब्रोकरेज फर्म Saw.com के जरिये किया। सॉ डॉट कॉम के फाउंडर जेफ्री गैब्रियल ने यह सौदा कराया और वही 2019 में इस डोमेन को मार्केट में लेकर आए। बाद में डोमेन की दूसरी बिक्री भी पेशेवर डोमेन ब्रोकर्स के जरिए पूरी हुई।
- किसने खरीदा : AI.com की आखिरी डील में क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म Crypto.com के को-फाउंडर और CEO Kris Marszalek ने इसे खरीदा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने इस डोमेन को भविष्य के AI प्लेटफॉर्म और AI एजेंट सर्विस लॉन्च करने की रणनीति के तहत अपने कंट्रोल में लिया।
- कब हुई डील : AI.com डोमेन को लेकर बातचीत कई वर्षों से चल रही थी, लेकिन मौजूदा हाई-प्रोफाइल डील अप्रैल 2025 में हुई, जब AI सेक्टर में जबरदस्त उछाल आ चुका था और कंपनियां AI ब्रांडिंग पर तेजी से निवेश कर रही थीं। इसी समय सौदे को अंतिम रूप दिया गया।
- कितने में हुई डील : डील कराने वाले सॉ डॉट कॉम के फाउंडर गैब्रियल के मुताबिक AI.com डोमेन की डील 70 मिलियन डॉलर यानी करीब 580 से 600 करोड़ रुपये में हुई। यह रकम पूरी तरह क्रिप्टोकरेंसी में चुकाई गई और इसे अब तक सार्वजनिक रूप से सामने आई सबसे बड़ी डोमेन नेम बिक्री में गिना जा रहा है।
2019 में शुरू हुई असली मार्केटिंग
डोमेन ब्रोकरेज से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, AI.com को 2019 में गंभीरता से बाजार में पेश किया गया। उस समय AI टेक्नोलॉजी आज की तरह मुख्यधारा में नहीं आई थी। ChatGPT और जनरेटिव AI टूल्स का दौर शुरू भी नहीं हुआ था। इसके बावजूद डोमेन को संभावित खरीदारों तक पहुंचाने के लिए व्यापक रणनीति अपनाई गई। AI कंपनियों, वेंचर कैपिटल फंड्स और टेक स्टार्टअप्स से सीधे संपर्क किया गया। कई इंडस्ट्री कॉन्फ्रेंस में संभावित खरीदारों से मुलाकात की गई और यह समझाया गया कि इतनी मजबूत डोमेन का भविष्य में कितना बड़ा महत्व हो सकता है। उस दौर में कई कंपनियों ने इस प्रस्ताव को नजरअंदाज भी किया, क्योंकि तब AI को लेकर आज जैसी व्यावसायिक स्पष्टता नहीं थी। फिर भी अंततः एक खरीदार ने डोमेन की भविष्य की कीमत को समझते हुए इसे खरीदा।
क्यों फर्जी है 10 साल के लड़के वाली कहानी
मलेशियाई टेक्नोक्रेट ने यह डोमेन साल 2021 में करीब 11 मिलियन डॉलर में फ्यूचर मीडिया आर्किटेक्ट्स (FMA) से खरीदा, जिसकी पुष्टि डोमेन रजिस्ट्री के टेक्निकल डाटा से होती है। उस समय भी यह डील सॉ डॉट कॉम ने कराई थी। हालांकि, यह सच है कि डोमेन AI.com को सबसे पहले मई 1993 में रजिस्टर्ड किया गया था। लेकिन, उस समय इसे किसने रजिस्टर किया और कहां रजिस्टर किया ये डिटेल्स फिलहाल सामने नहीं आई हैं।
क्यों खास होते हैं ऐसे डोमेन?
टेक इंडस्ट्री में प्रीमियम डोमेन नाम सिर्फ वेबसाइट का पता नहीं होते, बल्कि वे खुद एक ब्रांड बन जाते हैं। AI.com जैसी डोमेन किसी भी कंपनी को तुरंत भरोसेमंद और सेक्टर लीडर के तौर पर पेश कर सकती है। जब कोई यूजर सीधे AI.com टाइप करता है, तो उसे लगता है कि वह इस सेक्टर की प्रमुख कंपनी तक पहुंच रहा है। इससे मार्केटिंग लागत कम होती है और ब्रांड की पहचान मजबूत होती है। साथ ही प्रतिस्पर्धी कंपनियों के लिए वैसा ही नाम हासिल करना लगभग असंभव हो जाता है। यही वजह है कि बड़ी टेक कंपनियां डिजिटल रियल एस्टेट यानी प्रीमियम डोमेन को लंबी अवधि के रणनीतिक निवेश के रूप में देखती हैं।
