Budget Glossary: जानिए, बजट में  उपयोग होने वाले वो 10 महत्वपूर्ण शब्द, जो आपके लिए रखते हैं विशेष मायने

Common Budget Terms & definitions: बजट का इतिहास कई दशकों पुराना है। भारतीय इतिहास में अगर बजट के बारे में चर्चा होती है तो कई शब्द ऐसे होते हैं जिनके बार में लोगों को जानकारी ना के बराबर होती है।

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बजट में उपयोग होने इन10 शब्दों का आपके लिए है विशेष महत्व  |  तस्वीर साभार: BCCL

मुख्य बातें

  • आर्थिक सुस्ती के मद्देनजर सबकी नजरें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के दूसरे आम बजट पर
  • सरकार की वित्त संबंधी सबसे व्यापक रिपोर्ट होती है केंद्रीय बजट, राजस्व जुटाने और अन्य गतिविधियों के लिए तैयार होती है रूपरेखा
  • बजट संबंधी 10 उन शब्दावलियों से रूबरू करा रहे हैं, जिन्हें आपको जरूर जानना चाहिए

नई दिल्ली: अब से कुछ ही दिनों बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना दूसरा बजट पेश करने वाली हैं। सारी नजरें वित्त मंत्री पर टिकी हुईं। 2020 का बजट कैसा होगा यह तो पेश करने के बाद ही पता चलेगा लेकिन बजट के बारे में कई ऐसी शब्दावलियां या तथ्य हैं जिनसे शायद आप भी अनजान होंगे। तो ऐसे ही 10 शब्दावलियों के बारे में हम आपको रुबरु करा रहे हैं जिन्हें जानना आपके लिए भी बेहद जरूरी है-

वार्षिक वित्तीय रिपोर्ट (Annual Financial Statement)
जिस आम बजट को लेकर सभी लोगों को ब्रेसब्री से इंतजार है उसके बारे में कई ऐसी चीजें हैं जिससे लोग वाकिफ नहीं हैं। वार्षिक वित्तीय रिपोर्ट बजट का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है। संविधान की धारा 112 में में साफ कहा गया है कि सरकार हर साल संसद के समक्ष अपने सालाना खर्चे (आय-व्यय) का पूरा विवरण पेश करेगी जिसे वार्षिक वित्तीय विवरण कहा जाता है। यह दस्तावेज तीन भागों में बंटा होता है- समेकित निधि, आकस्मिक निधि और सार्वजनिक खाता। इनमें से प्रत्येक के लिए, केंद्र सरकार को राजस्व और व्यय का एक लेखा-जोखा प्रस्तुत करना आवश्यक है।

भारत की संचित निधि (Consolidated Fund)
संचित निधि सभी सरकारी खातों में से सबसे महत्वपूर्ण है। सरकार को मिलने वाले सभी राजस्व, बाजार से लिए गए ऋण और स्वीकृत ऋणों पर जो ब्याज मिलता है वह संचित निधि में जमा होता है। यह भारत की सर्वाधिक बडी निधि है जो कि संसद के अधीन रखी गयी है कोई भी धन इसमे बिना संसद की पूर्व स्वीकृति के निकाला/जमा या भारित नहीं किया जा सकता है।

भारत की आकस्मिक निधि (Contingency Fund)
इसका उल्लेख अनुच्छेद- 267 में किया गया है। यह निधि राष्ट्रपति या कार्यपालिका या सरकार के अधीन होती है अर्थात इस निधि से पैसा निकालने के लिए संसद की इजाजत की जरूरत नहीं होती है। अनवेशित व्यय करने के प्रयोजन के लिए कार्यपालिका इस निधियों से अग्रिम धन दे सकती है

सार्वजनिक खाता (Public Account) 
सार्वजनिक खाता की स्थापना संविधान के अनुच्छेद 266 (1) के तहत की गई हैं। इसमें लेनदेन में शामिल वह राशि आती है जहाँ सरकार एक बैंकर की तरह कार्य करती है। उदाहरण के लिए भविष्य निधि जमा या अल्प बचत जमा। इसमें व्यय के लिए सरकार की अनुमति की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि मूल रूप से ये जनता द्वारा जमा किये जाते हैं।

राजस्व बजट (Revenue Budget)
राजस्व बजट वह होता है जिसमें सरकार की राजस्व प्राप्तियों के अलावा उसका व्यय भी शामिल होता है। राजस्व प्राप्तियों को कर तथा गैर-कर राजस्व में बांटा गया है। कर राजस्व में आयकर, कॉर्पोरेट कर, उत्पाद, सीमा शुल्क, सेवा और अन्य कर होते हैं जिन्हें सरकार द्वारा लगाया जाता है जबकि गैर-कर राजस्व में कर्ज पर ब्याज, निवेश पर लाभांश शामिल हैं। 

कटौती प्रस्ताव (Cut Motion)
कटौती प्रस्ताव बजट प्रक्रिया का ही भाग है। यह वो हथियार है है जो लोकसभा सदस्य कार्यपालिका पर नियंत्रण हेतु उपयोग लाते हैं ये अनुदानों मे कटौती कर सकते हैं।

राजकोषीय घाटा (Fiscal deficit)
जब सरकार कुल कमाई से अधिक खर्च होने पर कुछ समय के लिए कर्ज लेती है और बाजार से सरकार की कुल कमाई और खर्च के अंतर को राजकोषीय घाटा कहा जाता है। यानि सरकार की कुल आय और व्यय में अंतर को राजकोषीय घाटा कहा जाता है।

वित्त विधेयक (Finance Bill)
वित्त विधेयक केंद्रीय बजट प्रस्तुत करने के तुरंत बाद पेश किया जाता है। इसमें बजट में प्रस्तावित करों के प्रभाव, उन्मूलन, परिवर्तन या विनियमन के बारे में सभी जानकारी होती है। वित्त विधेयक में आगामी वित्तीय वर्ष में किसी नए प्रकार के कर लगाने या कर में संशोधन आदि से संबंधित विषय शामिल होते हैं।

राजस्व घाटा (Revenue Deficit)
राजस्व प्राप्तियों और राजस्व व्यय के बीच के अतंर को राजस्व घाटा कहा जाता है। यह घाटा वर्तमान व्यय पर सरकार की वर्तमान आय में कमी से होता है। 

वोट ऑन अकाउंट (Vote on Account)
चुनावी साल में जब सरकार पूर्ण बजट पेश करने के बजाय कुछ महीनों का खर्च चलाने के लिए वोट ऑन अकाउंट पेश करती है। इसे लेखानुदान मांग, अंतरिम बजट कहा जाता है। संविधान के अनुच्छेद 116 में इसका प्रावधान है। इस बजट में सरकार कोई नीतिगत फैसला नहीं लेती है।

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