बजट 2020: यहां जानें कैसे तैयार किया जाता है खाता बही

बजट 2020 का इंतजार हर किसी को है। यहां पर यह जानना जरूरी है कि यह शब्द कहां से आया और किस तरह से इसे दस्तावेजी शक्ल दी जाती है।

बजट 2020: यहां जानें कैसे तैयार किया जाता है खाता बही
फरवरी में पेश किया जाएगा बजट 2020 

नई दिल्ली। बजट का इंतजार आम लोग हों या खास हर किसी को रहता है। 2020 का बजट फरवरी के महीने में पेश किया जाएगा। लेकिन बजट तैयार किए जाने की प्रक्रिया की शुरुआत महीनों पहले शुरू हो जाती है। बजट बनाते समय देश के अलग अलग सेक्टर्स और संगठनों की राय ली जाती है ताकि हर किसी संगठन की उम्मीद और आकांक्षा के बारे में जानकारी मिल सके। 

फ्रेंच शब्दकोष से निकला बजट
बजट(Bougette ) शब्द का जिक्र फ्रेंच शब्दकोश में मिलता है, इसका अर्थ चमड़े का छोटा थैला होता है। इसी से बजट शब्द बना। इस शब्द का पहली बार 1803 में फ्रांस में इस्तेमाल किया गया। इंग्लैंड में इस शब्द को जादू के पिटारे के तौर पर भी किया जाता था। लेकिन धीरे धीरे वहां इसका अर्थ बदल गया। 

सरकारी दस्तावेज होता है बजट
बजट एक सरकारी दस्तावेज होता है। जिसमें सरकार अपनी कमाई और खर्च का ब्यौरा देती है। इसमें पिछले साल के खर्च का हिसाब होता है और इसके साथ ही आने वाले बजट में कमाई का अनुमान लगाया जाता है। सरकार यह बताती है कि किस मद पर वो कितना खर्च करेगी। इसके साथ ही योजनाओं का जिक्र भी किया जाता है। बजट पारित कराने के लिए सरकार को संसद की मंजूरी की जरूरत पड़ती है। अगर सरकार बजट से ज्यादा खर्च करती है तो संशोधित खाता बही भी पेश करना पड़ता है। फरवरी के महीने में बजट पेश किया जाता है। अगर किसी राज्य में चुनाव प्रस्तावित होता है तो मौजूदा सरकार पूरे वर्ष के लिए बजट नहीं पेश करती है। 

सितंबर से बजट बनाने की कवायद होती है शुरू
हर वर्ष आने वाले वित्तीय साल के लिए बजट बनाने की प्रक्रिया सितंबर के महीने से ही शुरू हो जाती है। इसके लिए केंद्र सरकार की तरफ से सभी मंत्रालयों विभागों को सर्कुलर के जरिए खर्च संबंधी जरूरतों की जानकारी ली जाती है। इसके बाद वित्त मंत्रालय अलग अलग समूहों के साथ विस्तृत विचार विमर्श करता है। इसमें उद्योग संगठन, ट्रेड यूनियन, किसान समूह और व्यापार मंडल होते हैं। इसके साथ ही सीबीडीटी, सीबीईसी के अध्यक्षों के साथ बैठक होती है। टैक्स से जुड़े जितने भी सुझाव आते हैं उन्हें रिसर्च टीम को भेज दिया जाता है।

जनवरी के आखिरी सात से 10 दिन होते हैं अहम
जनवरी के आखिरी सात से 10 दिनों के भीतर बजट कॉपियों की छपाई शुरू की जाती है। खास बात ये है कि छपाई की प्रक्रिया वित्त मंत्रालय में ही होती है और उस दौरान छपाई प्रक्रिया से जुड़े किसी भी सदस्य को बाहर जाने की अनुमति नहीं होती है, यही नहीं अधिकारी और कर्मचारी अपने परिवार से भी बात नहीं कर सकते हैं। बजट तैयार करने वालों पर खुफिया विभाग की निगरानी होती है ताकि कोई भी सूचना बाहर न जा सके। बजट पेश करने से पहले राष्ट्रपति की मंजूरी ली जाती है और तय दिन को सुबह 11 बजे वित्त मंत्री लोकसभा में बजट पेश करते हैं। 

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