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Explainer: बजट 2026 से एजुकेशन सेक्टर को क्या हैं उम्मीदें?

Budget 2026 Expectations: आम बजट 2026-27 आने में अब चंद दिन बचे हैं। एजुकेशन सेक्टर की निगाहें भी सरकार पर टिकी हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि बजट में इनोवेशन, रिसर्च और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। इससे भारत को वैश्विक ज्ञान और इनोवेशन हब बनाने में मदद मिलेगी।

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शिक्षा क्षेत्र को बजट से उम्मीदें (तस्वीर-istock)

Budget 2026 Expectations: आम बजट 2026-27 पेश होने में अब काफी कम समय बचा है। ऐसे में देश के अलग-अलग सेक्टरों की तरह शिक्षा जगत की निगाहें भी सरकार पर टिकी हुई हैं। शिक्षा विशेषज्ञों, शिक्षण संस्थानों और एजुकेशन पॉलिसी से जुड़े जानकारों का मानना है कि आने वाला बजट भारत को ग्लोबल नॉलेज हब और इनोवेशन हब बनाने की दिशा में एक अहम भूमिका निभा सकता है। इसके लिए शिक्षा पर सरकारी खर्च बढ़ाने, रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने तथा उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की जरुरत पर जोर दिया जाए।

भारत को ग्लोबल नॉलेज हब बनाने पर हो फोकस

शिक्षा से जुड़े जानकारों के अनुसार भारत की युवा आबादी देश की सबसे बड़ी ताकत है। अगर इस जनसांख्यिकी लाभ को सही दिशा दी जाए तो भारत आने वाले वर्षों में दुनिया का सबसे बड़ा नॉलेज और इनोवेशन सेंटर बन सकता है। इसके लिए जरूरी है कि शिक्षा नीति में ऐसे कदम उठाए जाएं, जो छात्रों को केवल डिग्री तक सीमित न रखें बल्कि उन्हें रिसर्च, क्रिएटिव थिंकिंग और समस्या समाधान के लिए तैयार करें। जानकारों का मानना है कि बजट 2026-27 में सरकार को इसी सोच के साथ शिक्षा क्षेत्र के लिए बड़े ऐलान करने चाहिए।

आईआईटी और आईआईएम में सीटें बढ़ाने की मांग

न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए विशेषज्ञों ने आईआईटी और आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में सीटों की संख्या बढ़ाने की मांग की है। मौजूदा समय में इन संस्थानों में प्रवेश के लिए छात्रों के बीच भारी प्रतिस्पर्धा है, लेकिन सीमित सीटों के कारण कई प्रतिभाशाली छात्र अवसर से वंचित रह जाते हैं। जानकारों का कहना है कि अगर सरकार इन संस्थानों की क्षमता बढ़ाने का ऐलान करती है, तो इससे ज्यादा छात्रों को विश्वस्तरीय शिक्षा मिल सकेगी और देश को कुशल मानव संसाधन तैयार करने में मदद मिलेगी।

शैक्षणिक इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने की जरुरत

केवल सीटें बढ़ाना ही काफी नहीं है, बल्कि शिक्षा के इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाना भी उतना ही जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि देश की कई यूनिवर्सिटीज और कॉलेज अभी भी पुराने संसाधनों के सहारे चल रहे हैं। स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी, एडवांस्ड रिसर्च लैब और आधुनिक तकनीक से लैस कैंपस अब समय की मांग बन चुके हैं। ऐसे में बजट में शैक्षणिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए अलग से फंड आवंटन किया जाना चाहिए।

सीएसआर फंड से शिक्षा को मिल सकता है बड़ा सहारा

शिक्षा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए एक अहम सुझाव यह भी दिया जा रहा है कि कंपनियों के सीएसआर (कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) फंड का एक हिस्सा शिक्षा के लिए अनिवार्य किया जाए। जानकारों का कहना है कि अगर बिना सब्सिडी के चल रही स्टेट प्राइवेट और डीम्ड यूनिवर्सिटीज के लिए कंपनियों को अपने सीएसआर फंड का 10 प्रतिशत देना अनिवार्य कर दिया जाए, तो इससे शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आ सकता है। इससे स्मार्ट क्लासरूम, एआई-इनेबल्ड लर्निंग प्लेटफॉर्म, डिजिटल लाइब्रेरी और अत्याधुनिक लैबोरेटरी विकसित करने की प्रक्रिया तेज होगी।

शिक्षा पर खर्च बढ़ाने की जरुरत

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी देश के विकास की नींव शिक्षा पर टिकी होती है। अगर शिक्षा मजबूत होगी, तो अर्थव्यवस्था, टेक्नोलॉजी और समाज सभी क्षेत्रों में प्रगति संभव होगी। एक जानकार ने बताया कि दुनिया के कई विकसित देश अपनी जीडीपी का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा पर खर्च करते हैं, जबकि भारत में यह आंकड़ा अभी भी 4 से 5 प्रतिशत के बीच ही है। ऐसे में भारत को अपनी जरूरतों और युवा आबादी को देखते हुए शिक्षा पर बजट बढ़ाना चाहिए।

डिजिटल डिवाइड खत्म करना बड़ी चुनौती

डिजिटल युग में शिक्षा को तकनीक से जोड़ना बेहद जरूरी हो गया है। हालांकि देश के कई हिस्सों में अब भी डिजिटल डिवाइड एक बड़ी समस्या बनी हुई है। ग्रामीण और पिछड़े इलाकों के छात्रों को आज भी गुणवत्तापूर्ण डिजिटल शिक्षा सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। जानकारों का कहना है कि बजट में ऐसे प्रावधान होने चाहिए, जिससे इंटरनेट कनेक्टिविटी, डिजिटल डिवाइस और ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म सभी तक समान रूप से पहुंच सकें। इससे शिक्षा में समानता आएगी और छात्रों को बेहतर अवसर मिलेंगे।

पढ़ाई को स्किल्स से जोड़ने पर जोर

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखना चाहिए। आज के दौर में बाजार की जरूरतों के अनुसार स्किल्स का होना बेहद जरूरी है। बजट में ऐसे कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, जो पढ़ाई को इंडस्ट्री से जोड़ें और छात्रों को रोजगार योग्य बनाएं। स्किल-बेस्ड एजुकेशन, इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप और स्टार्टअप से जुड़े कोर्स इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

भारत की ग्लोबल पहचान मजबूत करने में शिक्षा की भूमिका

शिक्षा न केवल व्यक्तिगत विकास का साधन है, बल्कि यह देश की ग्लोबल पहचान को भी मजबूत करती है। यदि भारत शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में आगे बढ़ता है, तो दुनिया भर के छात्र यहां पढ़ने के लिए आएंगे। इससे न केवल ज्ञान का आदान-प्रदान होगा, बल्कि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। जानकारों का मानना है कि बजट 2026-27 में शिक्षा को प्राथमिकता देकर सरकार भारत को एक मजबूत और टिकाऊ आर्थिक शक्ति बना सकती है।

एक फरवरी को पेश होगा बजट

केंद्रीय बजट 2026-27 को वित्त मंत्री एक फरवरी को सुबह 11 बजे संसद में पेश करेंगी। यह वर्ष 2000 के बाद पहली बार होगा जब केंद्रीय बजट रविवार के दिन पेश किया जाएगा। इससे पहले वर्ष 2025 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को बजट पेश किया था। वहीं, दिवंगत अरुण जेटली के नेतृत्व में 28 फरवरी 2015 को भी बजट शनिवार को पेश किया गया था। ऐसे में इस बार का बजट कई मायनों में खास माना जा रहा है।

शिक्षा क्षेत्र को बड़े फैसलों का इंतजार

कुल मिलाकर शिक्षा जगत को बजट 2026-27 से बड़ी उम्मीदें हैं। शिक्षा पर खर्च बढ़ाने, रिसर्च और इनोवेशन को प्रोत्साहन देने, डिजिटल और स्किल-आधारित शिक्षा को मजबूत करने जैसे कदम भारत के भविष्य को नई दिशा दे सकते हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार इन उम्मीदों पर कितना खरा उतरती है और शिक्षा को लेकर कौन-कौन से बड़े ऐलान करती है।

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