कोरोना वायरस संकट: पर्सनल फाइनेंस को लेकर चिंतित हैं? इन 5 सुझावों पर करें अमल 

Personal finance: कोरोना वायरस संकट के दौरान पर्सनल फाइनेंस को लेकर चिंतित हैं?  प्रतिकूल परिस्थिति में आपको शांत रहने और सोच-समझकर फैसले लें।

Worried about your personal finance during Corona virus crisis? Follow these 5 tips
पर्सनल फाइनेंस को मैनेज करने के जानिए 5 तरीके  |  तस्वीर साभार: BCCL

कोविड-19 संकट के कारण पूरी दुनिया में उथल-पुथल मच गया है। शुरू-शुरू में एक स्वास्थ्य संकट के रूप में उभरी इस समस्या ने अब एक बहुत बड़े आर्थिक संकट का रूप ले लिया है। दुनिया भर के शेयर मार्केट में रोज भयानक उतार-चढ़ाव और अस्थिरता देखने को मिल रही है। कोरोना वायरस संकट ने हमारी जिंदगी के हर क्षेत्र को प्रभावित किया है जिसमें हमारी नौकरी और हमारा फाइनेंस भी शामिल है। इस अप्रत्याशित परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार ने देश में 21 दिन के लॉक डाउन की घोषणा की है। भारत में 1000 से भी ज्यादा मामले सामने आने और इस परिस्थिति की अप्रत्याशिता के कारण, हमें एक बहुत लम्बी लड़ाई लड़नी है जिसे कई स्तरों पर लड़ने की जरूरत है। आपके मन में अपने फाइनेंस को लेकर अनगिनत सवाल हो सकते हैं। आपके इन्वेस्टमेंट का क्या होगा? मार्केट में गिरावट देखने को मिल रही है, तो क्या आपको अपने म्यूच्यूअल फंड्स में इन्वेस्ट करते रहना चाहिए? क्या आपको अपनी लिक्विड सेविंग को बढ़ाना चाहिए या लॉक डाउन से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने के लिए जरूरी सामानों पर खर्च करना चाहिए?

इन मौजूदा चुनौतियों का सामना करने में आपकी मदद करने के लिए यहां आपके पर्सनल फाइनेंस से जुड़े कुछ सुझाव दिए गए हैं:

अपने बजट पर टिके रहें
बजट बनाने से आपको अपने जरूरी और गैर जरूरी खर्चों को अलग करने में मदद मिलेगी। इससे आपको अपने इनकम का कुछ हिस्सा जरूरी चीजों पर और बाकी का पैसा बैंक में रखने के लिए इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी। इस मौजूदा संकट की वजह से आपको जरूरी चीजों की जगह घरेलू चीजों पर ज्यादा खर्च करना पड़ा होगा। इस कठिन और अनिश्चित परिस्थिति में, एक बजट पर टिके रहना हमेशा संभव नहीं भी हो सकता है। लेकिन आप उन खर्चों में कटौती करके अपने बजट पर फिर से काम करने की कोशिश कर सकते हैं जिन खर्चों से परहेज किया जा सकता हो। चूंकि इस संकट के खत्म होने की कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है, इसलिए अपनी सेविंग्स को बढ़ाने और सिर्फ अपनी जरूरत पर ध्यान देने की कोशिश करें। सरकार यह सुनिश्चित करने का उपाय कर रही है कि जरूरत का सामान सब को सुनिश्चित रूप से मिलता रहे। अपने घर में फंसे होने के बावजूद, गैर-जरूरी खर्च जैसे सब्सक्रिप्शन कॉस्ट में कटौती करने के तरीके ढूंढने पर विचार करें।

डरें नहीं, सोच-समझकर लें फैसले
डर में लोग अक्सर गलत फैसले ले लेते हैं। किसी भी प्रतिकूल परिस्थिति में आपको शांत रहने और सोच-समझकर फैसले लेने की कोशिश करनी चाहिए। जल्दबाजी में कोई भी फैसला लेने से पहले, अपने आपसे सवाल करें कि आगे चलकर आपके इस कदम का क्या असर पड़ेगा। अपनी फाइनेंसियल जिंदगी के हर पड़ाव पर इस तरह की जांच करने की कोशिश करें, चाहे घरेलू खर्च हो या इन्वेस्टमेंट। उदाहरण के लिए, घरेलू सामान की जमाखोरी करने या अपने म्यूच्यूअल फंड्स से पैसे निकालने की कोशिश न करें क्योंकि यह परेशानी ज्यादा दिनों तक रहने वाली नहीं है। एक बार सोचकर देखें कि लम्बे समय में आपके लिए क्या सबसे अच्छा है और उसी हिसाब से काम करें।

अपने इमरजेंसी फंड को बढ़ाने की कोशिश करें
पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी एक अच्छी आदत के तौर पर एक इमरजेंसी फंड तैयार करके रखना जरूरी है। हमें अपने हाथ में कम से कम 3 से 6 महीने का खर्च चलाने लायक कैश रखना चाहिए। नौकरी छूटने, मेडिकल इमरजेंसी, वेतन मिलने में देरी, इत्यादि जैसी आपातकालीन परिस्थितियों में यह इमरजेंसी फंड, बड़े काम आता है। आपको यह फंड किसी बैंक के फिक्स्ड डिपोजिट में रखना चाहिए। आर्थिक परेशानी और आमदनी की अनिश्चितता से निपटने के लिए, अपने इमरजेंसी फंड को बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए। अपने वर्तमान मुख्य खर्च जैसे EMI, बच्चों की पढ़ाई का खर्च, किराने का सामान, किराया, बिजली का खर्च, इत्यादि को ध्यान में रखने। इससे आपको इमरजेंसी में कर्ज लेने की सम्भावना को कम करने में भी मदद मिलेगी।

डिजिटल तरीके से पेमेंट करें
संकट की इस घड़ी में, आप डिजिटल तरीके से अपनी EMI, SIP, इंश्योरेंस प्रीमियम, किराया और अन्य पेमेंट करके अपने फाइनेंस को मजबूत रख सकते हैं। यदि आप अब तक चेक के माध्यम से अपने लोन की EMI देते आ रहे हैं तो अब उसे छोड़कर ECS के माध्यम से पेमेंट करने का तरीका अपनाएं। अपने उधारदाता से संपर्क करें, अपने बैंक की मदद से ACH या बिल पेमेंट मैंडेट तैयार करें, और टेंशन फ्री हो जाएं। कोविड-19 से छुटकारा पाने के बाद भी आपको यही तरीका अपनाना चाहिए। ऑनलाइन माध्यम से पेमेंट करने पर आपको इस संकट के समय में बाहर निकलने की परेशानी से बचने में मदद मिलेगी और ऑटोमैटिक तरीके से पेमेंट करने पर डिफ़ॉल्ट और देर से पेमेंट की सम्भावना समाप्त हो जाएगी। कोविड-19 संकट के दौरान, भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंकों को डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने का अनुरोध किया है। कोई समस्या होने पर, समय पर सहायता प्राप्त करने के लिए अपने बैंक से संपर्क करें।

अपने हेल्थ कवर का आंकलन करें
एक हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी एक सबसे अच्छा फाइनेंशियल प्रोडक्ट है जिसे आप वैश्विक महामारी जैसी परिस्थितियों के कारण भविष्य में पैदा होने वाले मेडिकल रिस्क को कम करने के लिए खरीद सकते हैं। इंश्योरेंस रेगुलेटरी ऐंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (IRDAI), और सरकार, कोविड-19 से प्रभावित लोगों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए तरह-तरह के उपाय कर रही है। IRDAI ने इंश्योरेंस कंपनियों को कोविड-19 के मामलों को कवर करने और कोविड-19 के लिए किए गए हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम को जल्दी से सेटल करने का भी निर्देश दिया है। कोविड-19 के इलाज के लिए अस्पताल में लम्बे समय तक रुकना पड़ सकता है। इसलिए, इंश्योरेंस रेगुलेटर ने इंश्योरेंस कंपनियों को उन प्रोडक्ट्स के तहत इस बीमारी को कवर करने के लिए कहा है जिनके कवरेज में हॉस्पिटलाइजेशन कॉस्ट शामिल है। आपकी इंश्योरेंस कंपनी के आधार पर, आपके हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज में प्री- और पोस्ट-हॉस्पिटलाइजेशन खर्च, हॉस्पिटलाइजेशन टेस्ट, एम्बुलेंस कॉस्ट, इत्यादि शामिल हो सकता है। यहाँ इस बात पर ध्यान देना भी जरूरी है कि कोविड-19 को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा एक वैश्विक महामारी घोषित कर दिया गया है। यदि सरकार भी एक वैश्विक महामारी के रूप में इसकी पुष्टि कर देती है तो कुछ हेल्थ इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स इसके इलाज को कवर नहीं भी कर सकते हैं। इसलिए, इस संकट से निपटने के लिए एक हेल्थ इंश्योरेंस प्लान लेकर टेंशन फ्री हो जाना चाहिए।

संक्षेप में, शांत रहें, जितना हो सके उतनी बचत करें, डिजिटल तरीका अपनाएं, डरकर फैसलें न लें, और कम खर्चीली जिंदगी जीयें।

(इस लेख के लेखक, BankBazaar.com के CEO आदिल शेट्टी हैं)
(डिस्क्लेमर: यह जानकारी एक्सपर्ट की रिपोर्ट के आधार पर दी जा रही है। बाजार जोखिमों के अधीन होते हैं, इसलिए निवेश के पहले अपने स्तर पर सलाह लें।)

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