PM मोदी ने लॉन्च किया ट्रांसपेरेंट टैक्सेशन प्लेटफॉर्म, टैक्सपेयर्स को होंगे अब ये फायदे

Transparent Taxation Benefits: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'ट्रांसपेरेंट टैक्सेशन- ईमानदारों के लिए सम्मान' नाम से प्लेटफॉर्म को लॉन्च कर दिया है।

Transparent Taxation platform
PM मोदी ने लॉन्च किया ट्रांसपेरेंट टेक्सेशन प्लेटफॉर्म 

मुख्य बातें

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'ट्रांसपेरेंट टैक्सेशन प्लेटफॉर्म लॉन्च कर दिया है।
  • वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए इसे लॉन्च किया गया।
  • 'ट्रांसपेरेंट टैक्सेशन' से टैक्सपेयर्स को होंगे ये फायदे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 'ट्रांसपेरेंट टैक्सेशन- ईमानदारों के लिए सम्मान' नाम से प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। ये सरकार की तरफ से डायरेक्ट टैक्स सुधार की दिशा में उठाया गया एक कदम है। पीएम मोदी ने ट्विटर पर ऐलान किया कि इससे हमारी टैक्स सिस्टम में सुधार और सरल तरीके से हमारे प्रयासों में मजबूती आएगी। यह कई ईमानदार टैक्सपेयर्स को लाभान्वित करेगा, जिनकी कड़ी मेहनत से राष्ट्रीय प्रगति होती है।

वहीं लॉन्च के दौरान केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण और वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य राज्य मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर भी शामिल हुए। इसके अलावा इनकम टैक्स विभाग के अधिकारियों एवं पदाधिकारियों के अलावा विभिन्न वाणिज्य मंडलों, व्यापार संघों एवं चार्टर्ड एकाउंटेंट संघों के साथ-साथ जाने-माने करदाता भी इस आयोजन में उपस्थित थे।

'ट्रांसपेरेंट टैक्सेशन' से टैक्सपेयर्स को होंगे ये फायदे

  1. यह एक कदम होगा जो टैक्सपेयर्स के जीवन को आसान बनाएगा। सीबीडीटी यानी केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड बीते एक साल से टैक्स सुधार की दिशा में कई कदम उठा रहा है। इसी के तहत आयकर विभाग ने कई बड़े सुधार किए हैं, इसमें कॉरपोरेट टैक्स को 30 फीसद से घटाकर 22 फीसदी किया गया। साथ नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए टैक्स रेट कम कर के 15 फीसदी कर दिया गया। वहीं डिविडेंट डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स को हटा दिया गया।
  2. 'ट्रांसपेरेंट टैक्सेशन' के तहत डायरेक्ट टैक्स कानून को आसान बनाना है और साथ ही, संचार में बढ़ती पारदर्शिता पर भी केंद्रित करना है। इस संबंध में एक प्रमुख कदम था डॉक्यूमेंट आइडेंटिफिकेशन नंबर (डीआईएन), जिसमें विभाग का हर संचार एक कंप्यूटर जनरेटेड डॉक्यूमेंट आइडेंटिफिकेशन नंबर लाएगा।
  3. इसी तरह, टैक्सपेयर्स के लिए कंप्लायंस की आसानी के लिए, आईटी विभाग व्यक्तिगत करदाताओं के लिए कंप्लायंस को और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए आयकर रिटर्न की पूर्व तैयारी के साथ आगे बढ़ा है।
  4. टैक्स विवादों को निपटाने के लिए डायरेक्ट टैक्स विवाड से विश्वास अधिनियम, 2020 भी पेश किया गया था। इसके अलावा, आयकर विभाग ने डिजिटल लेनदेन और भुगतान के इलेक्ट्रॉनिक तरीकों को बढ़ावा देने के लिए कई उपाय किए हैं।
  5. विभाग पहल को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और उसने कोविड-19 के दौरान करदाताओं के लिए कंप्लायंस को आसान बनाने के लिए भी प्रयास किए हैं, ताकी रिटर्न दाखिल करने के लिए वैधानिक समय बद्धता बढ़ाकर करदाताओं के हाथों में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए तेजी से रिफंड जारी किए जा सकें।
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