PF के ब्याज पर 1 अप्रैल से लगेंगे टैक्स, तो जानिए निवेश के और विकल्प क्या हैं

आप पीएफ फंड में निवेश करते हैं ताकि आपको अच्छा रिटर्न मिल सके। लेकिन एक अप्रैल से पीफ के ब्याज पर भी टैक्स लगने वाला है। ऐसे निवेश के ये साधन आपके लिए बेहतर होगा।

PF interest will be taxable from April 1, know what are the other investment options
पीएफ ब्याज पर टैक्स लगेगा 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2021-22 में घोषणा की है कि एक वित्तीय वर्ष में 2.5 लाख रुपए से अधिक का पीएफ योगदान अगले वित्तीय वर्ष से टैक्स योग्य होगा। यानी 1 अप्रैल से लेकर अगले मार्च तक पीफ फंड में  2.5 लाख रुपए से ज्यादा निवेश किया तो टैक्स चुकाना पड़ेगा। डेलॉइट इंडिया के पार्टनर आरती रावते ने बताया कि एक संशोधन जो अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को प्रभावित किया है। 1 अप्रैल, 2021 से 250,000 रुपए से अधिक भविष्य निधि में वार्षिक कर्मचारी योगदान के ब्याज पर टैक्स निर्धारण है। पीएफ कई लोगों के लिए वृद्धावस्था का सहारा और यह एक सबसे पसंदीदा निवेश एवेन्यू है। जिसमें सुनिश्चित दर पर रिटर्न मिलता है, निश्चित सुरक्षित लाभ, रिटारमेंट पर एकमुश्त निकासी सुविधा है और निकासी पर टैक्स चुकाना नहीं पड़ता है, बशर्ते कि कर्मचारी पीएफ फंड में 5 साल या उससे अधिक वर्षों के लिए योगदान किया हो। यही कारण है कि कई कर्मचारी अनिवार्य योगदान के अलावा पीएफ के प्रति स्वेच्छा से अधिक राशि का योगदान करना चाहते हैं।

उसने कहा कि यह संशोधन कर्मचारियों के पीएफ वेतन (यानी बेसिक + डीए + रिटेनिंग भत्ता) 20 लाख रुपए से अधिक होने पर प्रभाव डालेगा और अगर हम मानते हैं कि यह कर्मचारी के कुल पारिश्रमिक का कम से कम 50% है, तो उसका कुल वेतन सीमा 40 लाख या उससे अधिक होगा। इसलिए ऐसे कर्मचारियों को आगे जाने वाली ब्याज आय पर टैक्स कटौती का सामना करना पड़ेगा। पीएफ स्कीम अभी भी निम्न-आय वर्ग के लिए आकर्षक है, यह उच्च आय वर्ग के लिए सीन से हटा देती है।

बजट दस्तावेजों के मुताबिक यह टैक्स कर्मचारी भविष्य निधि (EPF), स्वैच्छिक भविष्य निधि (VPF) के साथ-साथ सार्वजनिक भविष्य निधि (PPF) में दिए गए ब्याज पर भी लागू होगा। हालांकि, टैक्स एक्सपर्ट्स ने स्पष्ट किया है कि ईपीएफ या वीपीएफ और पीपीएफ के लिए अलग-अलग सीमाएं हैं यानी पीपीएफ और ईपीएफ या वीपीएफ में योगदान 2.5 लाख रुपए की सीमा की गणना के उद्देश्य से एकत्र नहीं किया जाएगा।

जब पीएफ फंड में निवेश टैक्स योग्य हो गया है तो ऐसे में यहां कुछ अन्य निवेश विकल्प दिए गए हैं, जिनमें आप निवेश कर सकते हैं।

नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस)

मैच्योरिटी पर अब टैक्स-फ्री होने के साथ, पेंशन चाहने वालों के लिए एनपीएस एक अच्छा विकल्प है। व्यापक निवेश विकल्प इसे आक्रामक और रूढ़िवादी दोनों निवेशकों के लिए उपयुक्त बनाते हैं। एनपीएस एक ऐसा विकल्प है, जो एक बेहतर ब्याज दर प्रदान करता है।

इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस)

ईएलएसएस विशेष रूप से इक्विटी निवेशकों के लिए एक अच्छा टैक्स सेविंग निवेश विकल्प है। रिडेप्शन पर, एक वित्तीय वर्ष में 1 लाख रुपए से अधिक लाभ पर 10 प्रतिशत पूंजीगत लाभ टैक्स लगाया जाता है। ईएलएसएस - जो पूंजीगत लाभ के साथ-साथ टैक्स सेविंग का दोहरा लाभ प्रदान करता है। पीएफ और एनपीएस की तुलना में लॉक-इन अवधि सिर्फ 3 वर्ष है।

कुश वत्सराज, एसोसिएट, टीपी ओस्तवाल एंड एसोसिएट्स एलएलपी का कहना है कि प्रस्तावित संशोधन पीपीएफ खातों में योगदान करने वाले किसी को भी प्रभावित नहीं करेगा क्योंकि पहले से ही 1.5 लाख रुपए की वार्षिक कैप है। वेतनभोगी व्यक्ति जो प्रति वर्ष 1.5 लाख रुपए से अधिक अपनी पीएफ स्कीम में योगदान करते हैं। वे भी प्रभावित नहीं होंगे क्योंकि वे केवल धारा 80 सी के तहत 1.5 लाख तक की कटौती का दावा कर सकते हैं, और अतिरिक्त योगदान वेतन आय के रूप में पहले से ही टैक्स योग्य है।

उन्होंने समझाया कि हालांकि, यह देखा गया है कि उच्च वेतनभोगी कर्मचारी अपने पीएफ खातों में भारी योगदान दे रहे हैं, भले ही उनका योगदान 1.5 लाख रुपए प्रति वर्ष (धारा 80 सी के तहत) से परे टैक्स योग्य हो। ऐसा इसलिए है क्योंकि पूरे योगदान पर अर्जित ब्याज पर अभी भी छूट है। यह संशोधन इस तरह के अनुपातहीन लाभ को कम करना चाहता है और 2.5 लाख रुपए से अधिक की राशि में अर्जित ब्याज आय भी टैक्स योग्य होगा। वेतनभोगियों द्वारा अपनी पीएफ योजना के हिस्से के रूप में 2.5 लाख रुपए और पीपीएफ योगदान को प्रभावित नहीं करता है।

Times Now Navbharat पर पढ़ें Business News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।

Times Now Navbharat
Times now
zoom Live
ET Now
ET Now Swadesh
Live TV
अगली खबर