जेट एयरवेज पर कर्जदारों ने 24887 करोड़ रुपए का दावा किया

बिजनेस
Updated Jul 19, 2019 | 14:14 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

जेट एयरवेज पर 24 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के दावे दिवालिया कानून के तहत सामने आए हैं। जेट एयरवेज अप्रैल महीने से बंद पड़ी है। ये एयरलाइंस दिवालिया कानून के तहत आ गई है।

Jet Airways
जेट एयरवेज फिलहाल बंद पड़ी है।  |  तस्वीर साभार: BCCL

नई दिल्ली: पिछले 3 महीने से बंद पड़ी एयरलाइंस जेट एयरवेज पर कर्जदारों ने 24887 करोड़ रुपए का दावा किया है। ये दावे दिवालिया कानून के तहत किए गए हैं। दिवालिया कानून के तहत फाइनेंशियल क्रेडिटर्स को सबसे पहले रकम मिलेगी। इन्होंने जेट पर 10231 करोड़ रुपए का दावा किया है। वहीं 2400 ऑपरेशन क्रेडिटर्स ने 12372 करोड़ रुपए का दावा किया है।

रिजोल्यूशन प्रोफेशनल्स के मुताबिक 24887 करोड़ रुपए के दावे में से उन्होंने 8462.7 करोड़ रुपए के दावे को मान्य किया है। वहीं 15044 करोड़ रुपए के क्लेम अभी भी वैरिफिकेशन की प्रक्रिया में है। 1380.82 करोड़ रुपए के क्लेम रिजेक्ट हो चुके हैं। इसमें से जेट एयरवेज का 230 करोड़ रुपए के कर्ज का क्लेम भी रिजेक्ट हो गया है। यूएई के एक जनरल सेल्स एजेंट ने 426 करोड़ रुपए का दावा किया है।

अब मुद्दा ये है कि इतनी रकम चुकाने के लिए कौन सा निवेशक तैयार होगा। जिसमें 12 हजार करोड़ रुपए तो निवेशक को देने ही हैं। फाइनेंशियल क्रेडिटर्स, ऑपरेशनल क्रेडिटर्स, कर्मचारियों के प्रतिनिधि, कर्मचारी और दूसरे क्रेडिटर्स ने 16643 दावे किए हैं। इसमें से फाइनेंशियल क्रेडिटर्स के सिर्फ 33 दावे ही स्वीकार किए गए हैं।

37 फाइनेंशियल क्रेडिटर्स में से एसबआई का क्लेम 16,44 करोड़ रुपए, यस बैंक का 1084 करोड़ रुपए है। 2027 कर्मचारियों ने 4.43 करोड़ रुपए का क्लेम किया है।
8462.79 करोड़ रुपए का क्लेम स्वीकार किया गया है। इसमें से बैंक और वित्तीय संस्थाओं का 6436.1 करोड़ रुपए का क्लेम है। वहीं विदेशी बैंकों और संस्थान ने 1568.2 करोड़ रुपए के क्लेम किए किए हैं।

एसबीआई की अर्जी पर 20 जून को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने जेट एयरवेज की दिवालिया अर्जी स्वीकार कर ली थी। जेट एयरवेज 18 अप्रैल 2019 से बंद है। बैंकों के अलावा जेट एयरवेज के ऊपर वेंडर्स के 10 हजार करोड़ रुपए भी बकाया है। साथ ही 3000 करोड़ रुपए कर्मचारियों के भी हैं। पिछले कुछ सालों में एयरलाइंस का घाटा 13 हजार करोड़ रुपए रहा है। अब इस मामले की सुनवाई NCLT में 23 जुलाई 2019 को होगी।

जेट एयरवेज के फाउंडर नरेश गोयल और उनकी पत्नी पहले ही एयरलाइंस से बाहर हो चुके हैं। अब एयरलाइंस पर बैंकों का कब्जा है। ये बैंक दिवाला प्रक्रिया के तहत एयरलाइंस को बेच रहे हैं जो भी निवेशक इस एयरलाइंस को खरीदेगा उससे मिली रकम में से बैंक अपने कर्ज की वसूली करेंगे। जो भी नया निवेशक एयरलाइंस में निवेश करेगा उसे कर्ज का बड़ा हिस्सा चुकाना होगा।

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