Inflation पर एसबीआई की चौंकाने वाली रिपोर्ट, 8 फीसद के ऊपर जा सकती है मुद्रास्फीति की दर

बिजनेस
Updated Jan 14, 2020 | 23:35 IST

केंद्र सरकार की तरफ से आर्थिक मंदी से निपटने के लिए तमाम सारी कवायद की गई है। लेकिन एसबीआई की एक रिपोर्ट चिंता बढ़ाने वाली है। रिपोर्ट के मुताबिक इंफ्लेशन का आंकड़ा जनवरी में आठ फीसद का आंकड़ा पार कर सकता है।

Inflation पर एसबीआई की चौंकाने वाली रिपोर्ट, 8 फीसद के ऊपर जा सकती है मुद्रास्फीति की दर
मु्द्रास्फीति पर एसबीआई की चौंकाने वाली रिपोर्ट 

मुख्य बातें

  • सीपीआई आधारित महंगाई दर इस महीने 8 प्रतिशत के ऊपर निकल सकती है
  • सीपीआई आधारित महंगाई दर से तय होती है मौद्रिक नीति
  • मुद्रास्फीति के लिए खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों को बताया जा रहा है जिम्मेदार

नयी दिल्ली: भारतीय स्टेट बैंक की शोध इकाई की एक रपट के अनुसार सब्जियों के दाम में वृद्धि को देखते हुए जनवरी माह में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति 8 प्रतिशत से ऊपर जा सकती है लेकिन उसके बाद इसके नरम पड़ने की उम्मीद है।एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट इकोरैप में यह भी कहा गया है कि मार्च तक खुदरा मुद्रास्फीति सात प्रतिशत से ऊपर बनी रह सकती है और इसे देखते हुए आरबीआई नीतिगत दर वर्तमान स्तर पर बनाए रख सकता है।

मंगलवार को जारी इस रपट में कहा गया है कि अगर खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर में कमी नहीं आती है, हम गतिहीन मुद्रास्फीति (स्टैगफ्लेशन) की स्थिति में जा सकते है जहां आर्थिक वृद्धि कमजोर रहने के साथ महंगाई दर ऊंची होती है।उल्लेखनीय है कि सोमवार को जारी खुदरा महंगाई दर दिसंबर 2019 में उछलकर 64 महीनों (रिपीट 64 महीनों) के उच्च स्तर 7.35 प्रतिशत पहुंच गयी। यह इससे पिछले महीने नवंबर में 5.54 प्रतिशत थी।रिपोर्ट के अनुसार महंगाई दर में वृद्धि का प्रमुख कारण प्याज, आलू और अदरक के दाम में उल्लेखनीय तेजी है। इसके अलावा दूरसंचार शुल्क में वृद्धि के कारण मुद्रास्फीति में 0.16 प्रतिशत का प्रभाव पड़ा है।

इसमें कहा गया है, ‘‘इसे देखते हुए सीपीआई आधारित महंगाई दर इस महीने 8 प्रतिशत के ऊपर निकल सकती है। हालांकि उसके बाद स्थिति में सुधार की संभावना है।’’इकोरैप के अनुसार, ‘‘हालांकि महंगाई दर में वृद्धि को देखते हुए रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति और वृद्धि के अनुमानों पर पुनर्विचार करने के लिये बाध्य हो सकता है। लेकिन हमारे विचार से रुख में बदलाव अवांछित होगा। इसका कारण खपत में उल्लेखनीय रूप से कमी है।’’
रिपोर्ट में कहा गया है कि रिजर्व बैंक के पास दिसंबर में नीतिगत दर में कटौती का अच्छा मौका था। उस समय अक्टूबर में मुद्रास्फीति 4.62 प्रतिशत थी।

आरबीआई मौद्रिक नीति पर विचार करते समय मुख्य रूप से सीपीआई आधारित महंगाई दर पर विचार करता है। केंद्रीय बैंक छह फरवरी को मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करेगा।रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सब्जी के दाम में तेजी को देखते हुए आने वाले समय में अंडा, मांस, मछली जैसे प्रोटीन युक्त खाने के सामान की महंगाई दर बढ़ सकती है। इसका कारण लोग महंगी सब्जी के बजाए दाल, अंडा, मांस के उपभोग को बढ़ा सकते हैं जिससे इनकी कीमतें बढ़ सकती हैं।

रिपोर्ट के अनुसार महंगाई दर चालू वित्त वर्ष की शेष अवधि में लगभग 7 प्रतिशत की दर से ऊंची बनी रह सकती है। वित्त वर्ष 2019-20 में यह औसतन 5 प्रतिशत रहेगी।इसमें कहा गया है, ‘‘हमारा मानना है कि आरबीआई पूरे 2020 में मौद्रिक नीति के मोर्चे पर यथस्थिति बनाये रख सकता है क्योंकि जून-जुलाई 2020 तक मुद्रास्फीति 6 प्रतिशत के ऊपर बनी रह सकती है।

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