Saving: पैसा मैनेज करने के 6 उपाय, कमाई के साथ बचत के तरीके भी जानिए

बिजनेस
Updated Sep 18, 2019 | 17:55 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

Money: अपनी मेहनत की कमाई को मैनेज करना भी एक तरह की कमाई ही है। आज हमारे एक्सपर्ट आपको बताएंगे कि किस तरह से आप अपनी सैलरी को मैनेज करें ताकि आपको ज्यादा से ज्यादा फायदा मिले।

Saving Tips
पैसे बचाने के तरीके।  |  तस्वीर साभार: Thinkstock

मुख्य बातें

  • पैसे कमाने के साथ उसे मैनेज करना भी आना चाहिए
  • इसके लिए आपको निवेश और इंश्योरेंस पर ध्यान देना होता है
  • आपके लिए एक इमरजेंसी फंड भी जरूरी है

हम सब बड़ी मेहनत से पैसे कमाते हैं। असरदार तरीके से सेविंग और निवेश करके हमारी इस मेहनत की कमाई को मैनेज करने में फाइनेंशियल प्लानिंग हमारी काफी मदद करता है। इसलिए अपनी जिंदगी के हर पड़ाव के लिए एक अच्छी फाइनेंशियल प्लानिंग करके रखना बेहद जरूरी है। 

अपने वेल्थ को मैनेज करने के लिए एक परफेक्ट फाइनेंशियल प्लानिंग स्ट्रेटेजी तैयार करने के लिए, पर्सनल फाइनेंस से जुड़े कुछ ख़ास नियमों का पालन करना जरूरी होता है। 

आइए, अपने फाइनेंस को बेहतर तरीके से मैनेज करने के लिए ध्यान में रखने लायक, पर्सनल फाइनेंस से जुड़े कुछ अनुभव-आधारित नियमों पर एक नजर डालते हैं:

50-20-30 का नियम 
50-20-30 का नियम कहता है कि हमें अपनी कुल आमदनी या वेतन का 50% अपने जरूरी खर्च के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। इसमें हमारे महत्वपूर्ण निर्धारित और परिवर्तनशील खर्च जैसे किराया, EMI, भोजन, यूटिलिटी बिल, आने-जाने का खर्च, इत्यादि शामिल होता है। 

इस नियम के अनुसार, अपने वेतन के बचे हुए आधे हिस्से को 20% और 30% में बांटना चाहिए। 20% वेतन का इस्तेमाल तरह-तरह के फाइनेंशियल लक्ष्यों के लिए करना चाहिए जिन्हें आप कम, मध्यम, और लम्बे समय में पूरा करना चाहते हैं और बाकी बचे हुए 30% को फ्लेक्सिबल खर्च के लिए अलग रख देना चाहिए। 

इस नियम की मदद से हमें अपने खर्च को मैनेज करने में आसानी होती है और अपने वेतन को जिम्मेदारियों, उद्देश्यों, और मन-मुताबिक चीजों पर संतुलित तरीके से खर्च करने में मदद मिलती है। इसलिए, यह काम चाहे जितना भी मुश्किल क्यों न लगे, इस नियम पर अटल रहें तभी आपको लम्बे समय में इसका लाभ मिलेगा।

अपने निवेशों को डाइवर्सिफाई करने का नियम 
एक अच्छी फाइनेंशियल प्लानिंग की नींव रखने के लिए अपने निवेश प्रोफाइल को डाइवर्सिफाई करना बेहद जरूरी है। इससे आपको अपने पैसे को अलग-अलग निवेश साधनों में निवेश करके अपने जोखिम को कम करने और अपने कुल निवेश पर एक अच्छा रिटर्न कमाने में मदद मिलेगी। 

अलग-अलग निवेश ऑप्शंस, अपने-अपने जोखिम स्तर के कारण एक समान आर्थिक परिस्थिति में भी अलग-अलग तरीके से काम करते हैं। उदाहरण के लिए, फिक्स्ड डिपोजिट में कम जोखिम होता है, म्यूच्यूअल फंड में जोखिम का स्तर बदलता रहता है, और शेयर में बहुत ज्यादा जोखिम होता है। इसलिए, अपने पैसे को अलग-अलग निवेश साधनों में निवेश करने से आपके पैसे को बढ़ने में तो मदद मिलती ही है, अप्रत्याशित बाजार परिस्थितियों से उसकी रक्षा भी हो जाती है।

इक्विटी में कितना निवेश करना चाहिए उसका नियम 
एक नियम के अनुसार, कहा गया है कि आपको इस बात का पता लगाने के लिए कि आपको इक्विटी में कितना निवेश करना चाहिए, आपको 100 में से अपनी उम्र को घटा देना चाहिए। इस तरह, यदि आपकी उम्र 20 से 30 साल के आसपास है तो आपको इक्विटी में अपने निवेश का 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा निवेश करना चाहिए। 
इक्विटी को काफी अस्थिर माना जाता है, इसलिए इसमें लम्बे समय के लिए निवेश करना सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इससे निवेश अवधि के दौरान बाजार गिरने पर होने वाले नुकसान की भरपाई करने का समय मिल जाता है।

6 महीने का खर्च चलाने लायक इमरजेंसी फंड तैयार करने का नियम 
एक इमरजेंसी फंड, आपके रेगुलर घरेलू खर्च के लिए नहीं होता है बल्कि यह कोई इमरजेंसी आने पर आपके जरूरी खर्च को पूरा करने के लिए होता है। वैसे, एक इमरजेंसी फंड में कितना पैसा रखना चाहिए, इसके लिए कोई अमाउंट फिक्स्ड नहीं है लेकिन इसमें कम से कम इतना पैसा जरूर होना चाहिए कि उससे छः महीने तक आपके जरूरी खर्च जैसे EMI, बिल, बच्चों की फीस, इत्यादि का पेमेंट हो सके। 

इस नियम पर चलने से आपको इमरजेंसी में बेहद जरूरी फाइनेंशियल सपोर्ट भी मिल जाता है और आपको अपने जरूरी खर्च के लिए कर्ज का सहारा लेने की जरूरत भी नहीं पड़ती है।

रिटायरमेंट के लिए सेविंग करने का नियम 
अपने रिटायरमेंट के लिए सेविंग करना बेहद जरूरी है। आपको अपना करिअर शुरू होने के साथ ही अपने रिटायरमेंट के लिए सेविंग शुरू कर देनी चाहिए। इसके लिए आपको अपने इनकम का 10% सेव करना चाहिए और उसे इस तरह निवेश करना चाहिए कि वह समय के साथ बढ़ते हुए एक अच्छी और बड़ी रकम में बदल सके।
हालाँकि यह तय करना थोड़ा मुश्किल है कि रिटायरमेंट के बाद आपको अपना और अपने परिवार का खर्च चलाने के लिए कितने पैसे की जरूरत पड़ेगी, लेकिन फिर भी अपने इनकम का 10% सेव करने से आपको एक अच्छी शुरुआत करने में मदद मिल सकती है जो समय के साथ एक बड़ी रकम में बदल सकता है।

पर्याप्त लाइफ कवर लेने का नियम 
यह सबसे महत्वपूर्ण नियमों में से एक है जिसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। इंश्योरेंस, एक इमरजेंसी के दौरान एक आर्थिक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। पर्याप्त लाइफ कवर लेकर रखने से आपके फाइनेंशियल डिपेंडेंट्स को आपकी मौत के बाद अपने लाइफस्टाइल को मेंटेन करने में मदद मिलेगी। 

आम तौर पर, एक पर्याप्त लाइफ कवर, आपके एनुअल इनकम का कम से कम 10 गुना होना चाहिए। मान लीजिए, आपका एनुअल इनकम 5.40 लाख रु. है, तो आपका लाइफ कवर कम से कम 54 लाख रु. होना चाहिए। मौत के जोखिम को कवर करने के लिए लाइफ इंश्योरेंस खरीदना, एक सुरक्षित फाइनेंशियल प्लान बनाने की दृष्टि से बेहद जरूरी है।

मौज-मस्ती के लिए अपने बोनस का 1% हिस्सा इस्तेमाल करने का नियम 
फाइनेंशियल प्लानिंग का मतलब सिर्फ खर्च में कटौती करना ही नहीं है बल्कि इसका मतलब अपने मेंटल हेल्थ को बनाए रखना और थोड़ी मौज-मस्ती करना भी है। एक संतुलित और स्वस्थ जीवन के लिए थोड़ी मौज-मस्ती करना भी बहुत जरूरी होता है। जब आप कहीं काम करते हैं तो आपको अपने मालिक से एक बोनस भी मिलता है। 
आप उस बोनस का 1% हिस्सा अपने मनोरंजन, शौक, इच्छा, यात्रा, इत्यादि के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। बाकी अमाउंट का इस्तेमाल, अपने निवेश को बढ़ाने या कोई नया निवेश शुरू करने के लिए किया जा सकता है। इस नियम पर चलने से आपको अपने बोनस को सही काम में लगाने में मदद मिलती है। 

अंत में, इन नियमों पर चलना कभी-कभी बहुत मुश्किल लग सकता है लेकिन इससे अपने फाइनेंस को कंट्रोल करने में काफी मदद मिलती है। हालाँकि, प्रतिशत और रकम आपकी उम्र, लक्ष्य, एनुअल इनकम, फाइनेंशियल डिपेंडेंट्स, इत्यादि के आधार पर अलग-अलग हो सकती है, लेकिन फिर भी पर्सनल फाइनल से जुड़े इन अनुभव-आधारित नियमों की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि ये हर उम्र के लोगों और हर तरह की फाइनेंशियल परिस्थितियों पर लागू होते हैं। 

(आदिल शेट्टी, सीईओ, बैंक बाजार डॉट कॉम) (डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं।)
 

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