Economy: मंदी की आहट पर निशाने पर सरकार, विपक्ष मांग रहा जवाब

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Updated Aug 21, 2019 | 11:38 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

कई सेक्टरों की रिपोर्ट के आधार पर यह संकेत मिल रहे हैं कि दुनिया की मंदी का असर भारत पर भी देखा जा सकता है। फिलहाल ऑटो और रियल्टी सेक्टरों पर इसकी मार पड़नी शुरू हो गई है।

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इकोनॉमी में मंदी के संकेत।  |  तस्वीर साभार: Thinkstock

दुनियाभर में एक बार फिर आर्थिक मंदी आने के संकेत मिल रहे हैं। ऑटो सेक्टर, रियल्टी सेक्टर समेत तमाम परंपरागत उद्योग मंदी के संकट से गुजर रहे हैं। इस आर्थिक मंदी को लेकर भारत में भी तमाम तरह की चिंताएं जताई जाने लगी हैं। आर्थिक सर्वे करने वाली कई एजेंसियों की रिपोर्ट में भी यह बात सामने आ रही है कि देश में अब आर्थिक मंदी की आहट सुनाई देने लगी है, जिसकी वजह से ऑटो सेक्टर में कई लाख लोगों की नौकिरियां जाने की डर सता रहा है।

कई अखबारों में छपी आर्थिक मंदी की खबरों को आधार बनाते हुए कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है। प्रियंका ने ट्वीट करते हुए पूछा है कि देश में आर्थिक मंदी के लिए जिम्मेदार कौन है? प्रियंका गांधी ने कहा है कि इस भयंकर मंदी पर सरकार की चुप्पी खतरनाक है। कंपनियों के काम चौपट हो रहे हैं और लोगों को नौकरियों से निकाला जा रहा है। लेकिन सरकार मौन है। देश के नागरिक इस भयंकर मंदी पर वित्तमंत्री से कुछ सुनना चाहते हैं। 

प्रियंका गांधी ने उन अखबारों की खबरों को ट्विटर पर शेयर भी किया है और कहा है कि अकेले ऑटो सेक्टर में 10 लाख से अधिक लोगों की नौकरी जाने की खतरा है और कई कंपनियां तो छटनी भी शुरू कर दी हैँ। 

उधर, अखिलेश यादव ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अर्थव्यवस्था गहरे संकट से गुजर रही है। नोटबंदी और जीएसटी ने व्यापार में भारी तबाही मचाई है। इससे छोटे और घरेलू उद्योग तो बंद हुए ही, अब देश का ऑटो मोबाइल सेक्टर भी दम तोड़ने लगा है। विदेशी मुद्रा भंडार 72.7 करोड़ डालर घट गया है।

भारत की अर्थव्यवस्था फिसलकर सातवें स्थान पर आ गई है। वर्ष 1964 में भी भारत इसी स्थान पर था। पिछले छह वर्षों में मोदी के शासनकाल में तकरीबन 3.7 करोड़ कामगारों ने कृषि कार्य से तौबा कर लिया है। 

इसके पहले जारी की गई एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि देश के नौ बड़े शहरों में 797623 फ्लैट कम कीमत वाले बनाए थे, जिसमें से 412930 फ्लैट अभी तक नहीं बिके हैं। आर्थिक मंदी की वजह से रियल एस्टेट पर गहरा असर पड़ा है। देश के सात बड़े शहरों में 2.2 लाख फ्लैट का निर्माण कार्य अटका पड़ा है, जिनकी शुरुआत 2011 में की गई थी। 

इसके अलावा जिस तरह से सोने-चांदी के दामों में बढ़ोतरी हो रही है, उससे भी मंदी के आसार नजर आ रहे हैं। आर्थिक मंदी के संकेत मिलने पर निवेशक इक्विटी बाजार से पैसा निकाल कर सुरक्षित निवेश करने लगते हैं, जिससे सोने-चांदी में जमकर खरीदारी की जाती है।

बजट आने के एक माह के अंदर विदेशी संस्थागत निवेशकों ने एक माह में 15 लाख करोड़ रुपए की बिकवाली की थी। जिसकी वजह से शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आते हुए दिखी थी। 

बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच ने अपनी एक रिपोर्ट में खुलासा करते हुए कहा है कि अगले एक साल के अंदर दुनिया भर में सबसे खतरनाक मंदी आ सकती है। यह मंदी 2008 से भी बड़ी होगी, जिसकी शुरआत होने की कई जगहों से आहट मिलनी शुरू हो गई है। इसके लिए व्यापार युद्ध को भी जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।

(डिस्क्लेमर : मनोज यादव अतिथि लेखक हैं और ये इनके निजी विचार हैं। टाइम्स नेटवर्क इन विचारों से इत्तेफाक नहीं रखता है।)

 

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